वोटर लिस्ट में जिन लोगों का नाम शामिल नहीं था, उन्होंने चुनाव अधिकारी को ही घेर लिया था। आपत्ति दर्ज कराई है।
- पिछले 15 दिनों से कॉलोनी के भीतर चुनाव प्रचार ने माहौल बनाए रखा।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। तालपुरी इंटरनेशनल कॉलोनी बी ब्लॉक का चुनाव विवाद के बाद दोबारा हो रहा है। सुबह से वोट डाले जा रहे हैं। यह चुनाव कई मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनावी मैदान में 15 उम्मीदवार हैं। रविवार सुबह 8 बजे से मतदान शुरू हुआ, दोपहर 3 बजे तक वोट डाले जाएंगे। शाम 4 बजे से वोटों की गिनती होगी। रात में रिजल्ट घोषित किया जाएगा। मतदान के दौरान कुछ रहवासियों ने विरोध दर्ज कराया, जिनका नाम वोट लिस्ट में नहीं है। चुनाव अधिकारी को भी घेर लिया था। काफी देर तक बहस के बाद स्थिति सामान्य हो गई।
चुनाव अधिकारी बीएसपी के पूर्व सीजीएम टाउनशिप एसवी नंदनवार हैं। अध्यक्ष पद के लिए दो उम्मीदवार, महासचिव पद के लिए तीन उम्मीदवार, कोषाध्यक्ष पद के लिए दो उम्मीदवार, उपाध्यक्ष के लिए चार उम्मीदवार, सहायक महासचिव के लिए दो उम्मीदवार हैं। इनमें से एक अध्यक्ष, एक महासचिव, एक कोषाध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष और दो महासचिव चुना जाना है।
लगभग पिछले 15 दिनों से कॉलोनी के भीतर चुनाव प्रचार ने माहौल बनाए रखा था। लेकिन इतने बड़े कॉलोनी में जहां 1233 मकान है और वर्तमान में 603 सदस्य हैं। लेकिन पिछले चुनाव को निरस्त कर उसी सदस्यता के आधार पर जिसमें 439 सदस्य थे, वही मताधिकार का प्रयोग कर रहे।
तालपुरी बी ब्लॉक में डेजी 175 आवास, डहलिया 218 आवास, मोगरा 336 आवास, जूही में 240 आवास और ओरकिड 264 आवास है।
तालपुरी एसोसिएशन चुनाव की चर्चा हर तरफ हो रही है। आखिर क्यों एक संगठन का चुनाव इतना बड़ा बन गया। अगर दूसरी जगह होता तो शायद मनोनयन से काम हो जाता। लेकिन जब हम थोड़े पीछे जाते हैं और वहां के पुराने लोगों से सूचनाजी ने बात करने की कोशिश की तो कभी सुनील चौरसिया, यमलेश देवांगन, असीम सिंह, कुबेर देशमुख, रविंद्र कुमार दत्ता, आशीष दीवान ऐसे कई पुराने लोग हैं, जो सभी मिलकर कॉलोनी बनते समय मूलभूत सुविधाओं को लेकर अलग-अलग स्तर पर सभी ने मिलकर हाउसिंग बोर्ड के साथ लड़ाई लड़ते दिखे थे।
लेकिन आज वह दो गुट में बंट गए हैं और वह भी दोनों के बीच एक बहुत बड़ी लकीर खींच गई है और वह लकीर थाने, कोर्ट-कचहरी, मारपीट तक भी पहुंच गई, जिसका परिणाम यह हुआ दोनों एक दूसरे पर आरोप लगाते। भ्रष्टाचार से लेकर गबन तक का आरोप लगा रहे हैं।
कुल मिलाकर यह चुनाव दो वर्गों के बीच में साफ दिखने लगा। लेकिन यह भी देखा गया पिछले कार्यकाल में कुछ हद तक जमीनी स्तर पर माहौल थोड़ा शांत होता दिखा था।
तमाम दावों से उलट हकीकत कुछ अलग ही बयां कर रही है। ना एसटीपी पूरी तरीके से सुधरा है। ना लोगों के घर में सही ढंग से पानी आ रहा है। ना ही बी ब्लॉक के निवासियों को पारिजात से छुटकारा मिल पा रहा है। ना ही ए ब्लॉक की तरह बेहतर सुरक्षा एवं साफ सफाई व्यवस्था मुहैया हो पा रही है। ना गार्डन की स्थिति में सुधार हो रहा है। कॉलोनीवासियों का सवाल यह है इतनी बड़ी लड़ाई क्यों? आपस में लड़ाई तो बहुत ऊंचे स्तर की हो रही है? लेकिन काम जमीन पर कुछ नहीं दिख रहा है?
इतना ही काम हुआ है तो ए ब्लॉक की तरह बी ब्लॉक क्यों नहीं दिख रहा है? इतना संघर्ष हुआ है तो ए ब्लॉक का परिजात बी ब्लॉक में कैसे आ गया? यह बुनियादी सवाल आम लोगों के मन में है? लेकिन चुनाव अपनी जगह पूरी ताकत से लड़ा जा रहा है। यह चुनाव एक ऐसोसिएशन न का चुनाव न होकर बंगाल चुनाव का तरह लग रहा है।
आज यह भी आशंका जताई जा रही है चुनावी मैदान में मतदान के दौरान कड़ी धूप के साथ गर्माहट भी है। और शाम होते-होते नतीजा क्या होता है, यह देखना है कि दोनों गुटों में किसका अहम और वहम टूटेगा?

