रामलीला मैदान दिल्ली में माकपा की विशाल जन आक्रोश रैली, छत्तीसगढ़ से पहुंची जनता, अमेरिका-इसराइल-मोदी सरकार पर भड़ास

CPI(M) Public outrage Rally at Ramlila Maidan Delhi People from Chhattisgarh Arrive Venting their Anger Against America, Israel and the Modi Government (1)
  • श्रम संहिताएं (Labour Codes) वापस लेने, बिजली संशोधन विधेयक वापस और बीज विधेयक वापस लेने की मांग।

सूचनाजी न्यूज, दिल्ली। बिजली कानून वापस लेने, ग्रामीण रोजगार छीनने मनरेगा में किए गए संशोधन वापस लेने, बीज विधेयक वापस लेने तथा भारत विरोधी भारत अमेरिका व्यापार समझौता रद्द करने की मांग को लेकर दिल्ली में बड़ी रैली हुई। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी द्वारा दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित जन आक्रोश रैली में छत्तीसगढ़ के भी कोने-कोने से सैकड़ो की तादाद में जनता ने भागीदारी की‌।

सभा को माकपा के महासचिव एमए बेबी, पोलित ब्यूरो सदस्य एवं सीटू के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष तपन सेन, किसान सभा के राष्ट्रीय नेता अशोक ढावले, सीटू के अखिल भारतीय अध्यक्ष सुदीप दत्ता, सांसद आमरा राम, पोलित ब्यूरो सदस्य एवं पूर्व जनवादि महिला समिति की पूर्व अध्यक्ष मरियम भावले आदि ने संबोधित किया।

रैली में की गई ये प्रमुख मांगें

• श्रम संहिताएं (Labour Codes) वापस लो ।
• बिजली संशोधन विधेयक वापस लो ।
• बीज विधेयक वापस लो।
• ‘मनरेगा’ बचाओ, ‘वी-बी ग्रामजी’ हटाओ ।
• भारत-अमेरिका व्यापार समझौता रद्द करो ।
• अमेरिका-इजरायल नापाक गठजोड़ युद्ध उन्माद से बाज आए ।

विरोध के मुख्य कारण

-संहिताकरण की आड़ में श्रमिक विरोधी संशोधन किए गए हैं।
-29 श्रम कानूनों को विलय कर बनाई गई 4 श्रम संहिताओं (Labour Codes) में जोड़ें गए प्रावधानों में 1 दिन की अनाधिकृत अनुपस्थिति पर 8 दिन के वेतन कटौती, 300 से कम कर्मियों वाले औद्योगिक प्रतिष्ठान में अवकाश, शिफ्ट व्यवस्था, सेवानिवृत्ति आयु अनुशासनात्मक कार्यवाही आदि संबंधित कोई भी नियम लागू नहीं होगा। इसके अलावा ऐसे प्रतिष्ठानों के मालिकों या प्रबंधन को किसी से भी अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
– महिला कर्मियों को रात्री पाली में नियुक्त करने की अनुमति शामिल है।

बिजली बिल विधेयक

बिजली कानून संशोधन के बारे में माकपा नेताओं का कहना है इन संशोधनों में बिजली वितरण क्षेत्र को निजी कंपनियों को सौंपने का प्रावधान है। स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली बिल कंपनियों को प्रीपेड बिल लेने का अधिकार मिलेगा। प्रीपेड की राशि खत्म होते ही अपने आप बिजली आपूर्ति बंद हो जाएगी। इसके अलावा किसानों एवं गरीब परिवारों को सस्ती दर पर बिजली मिलना बंद हो जाएगा।

बीज विधेयक विरोध के प्रमुख बिंदु

• कारपोरेट नियंत्रण: प्रस्तावित क़ानून से निजी बीज कंपनियों का एकाधिकार और कार्पोरेट समूहों का नियंत्रण बढ़ेगा।
• पारंपरिक बीज प्रथा पर ख़तरा: इस विधेयक में बीजों के अनिवार्य पंजीकरण के आवश्यकता है , जिससे किसानों को देशी बीज सहेजने, पुनः उपयोग करने और आदान प्रदान करने की परम्परा बाधित होगी।
• महंगे बीज पर निर्भरता: धीरे धीरे किसान बड़ी बीज विक्रेता कम्पनियों की महंगी बीजों पर निर्भर हो जायेंगे जिसके बाद बड़ी कम्पनियां, किसानों से मनमानी कीमत वसूलेंगे।
माकपा नेताओं ने आगाह किया कि इस विधेयक में मुआवजे का प्रावधान एक छलावा मात्र है। खराब या अयोग्य बीज के कारण फसल बर्बाद होने पर मुआवजे की प्रक्रिया जटिल एवं अव्यवहारिक है ।
खाद्य आत्म निर्भरता और सम्प्रुभुता के लिए ख़तरा- इस विधेयक की सबसे ख़तरनाक बात यह है कि इस विधेयक के पारित होने से भारत की खाद्य संप्रभुता और स्वतन्त्रता के पश्चात इतने वर्षों में प्राप्त आत्मनिर्भरता खतरे में पड़ जायेगी ।

‘मनरेगा को हटाकर’ ‘वी-बी ग्रामजी’ से कम होगा ग्रामीण रोजगार अधिकार

• अधिकार में कटौती: मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी क़ानून ) में रोजगार का कानूनी अधिकार था,जबकि इसे हटा कर लाए गए ‘वी-बी ग्रामजी’ (विकसित भारत ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन) केन्द्रीय नियमों एवं बजट आबंटन पर निर्भर होगा।

• ठेकेदारी बढ़ेगी: नयी योजना के तहत ठेकेदारों की भूमिका बढ़ेगी और कार्य की प्रकृति बदलने से ग्रामीण श्रमिकों की आजीविका छिन जाएगी।
• राज्यों पर अतिरिक्त भार: राज्यों पर खर्च के भार को 10% से बढ़ाकर 40% किया गया है । पहले से आर्थिक तंगी का सामना कर रहे राज्य जब इस योजना के लिए धन जुटा नहीं पायेंगे तो योजना का ठप्प होना तय है।

• महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सिद्धांतों के विरूद्ध- महात्मा गांधी के नाम को हटाकर बनाये गए इस क़ानून में पंचायतों के निर्णय लेने की स्वतन्त्रता को कमजोर किया गया है।

भारत अमेरिका व्यापार समझौता

• अमेरिका से आयात होने वाले फल, डेयरी उत्पाद,कपास, सूखे मेवे पर शून्य आयत कर लगेगा।
• भारत से अमेरिका निर्यात होने वाले उत्पादों पर 18% शुल्क लगेगा।
• भारत को अमेरिका से आयत होने वाले उत्पादों पर नान टैरिफ बाधाएं हटाना है अर्थात किसानों को खाद ,बिजली बीज आदी पर दी जाने वाली रियायत समाप्त करनी है।
• भारत को रूस से सस्ता कच्चा तेल की खरीद को सीमित करना होगा तथा अमेरिका एवं वेनेजुएला से महँगा कच्चा तेल खरीदी बढ़ाना होगा।

भारत की संप्रभुता विरोधी अमरीकी राष्ट्रपति के बयान पर भारत सरकार क्यों है मौन

पुलवामा कांड के बाद भारत का पाकिस्तान के आतंकवादी शिविरों पर हमला तत्पश्चात युद्ध विराम पर अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा बार-बार यह कहना कि उन्होंने युद्ध विराम करवाया।
• अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कभी रूस से सस्ते कीमत पर कच्चे तेल खरीदने पर शर्त लगाने वाले तो कभी छूट देने वाले बयान।
• भारत अमेरिका ट्रेड डील के बारे में ट्रंप द्वारा एक तरफ घोषणा करना ।
• अमेरिका की तरफ से यह बयान आना कि वे भारत को चीन नहीं बनने देंगे ।
जैसे कई बयान है जिस पर भारत सरकार की तरफ से कोई दृढ़ प्रतिक्रिया नहीं दिया गया।

अमेरिका इजरायल के युद्ध उन्माद से उपजे संकट पर भारत सरकार की चुप्पी

• अमेरिका-इजरायल गठबंधन द्वारा बिना किसी उचित करण के ईरान पर किए गए हमले से पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र पर युद्ध का ऐसा बवंडर मचा है जो निरंतर फैलता जा रहा है।

• इस युद्ध में अमेरिका इसराइल गठजोड़ ने युद्ध के सारे नियमों को तक पर रखकर ईरान में बच्चियों के स्कूलों एवं रिहायशी इलाकों पर हमला किया है।