- आयकर अधिनियम के अनुपालन संबंधी मुद्दों को हल करने के लिए एक बार की माफी योजना को मंजूरी दी है।
सूचनाजी न्यूज, दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन-ईपीएफओ माफी योजना लेकर आया है। इस योजना में ऐसा क्या है कि हर तरफ चर्चा हो रही है। छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों के लिए माफी योजना को मंजूरी दी गई है। सीबीटी मीटिंग में श्रम मंत्री मंसुख मांडविया और श्रम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे की मौजूदगी में रिपोर्ट पेश की गई।
डॉ. मांडविया की अध्यक्षता में ईपीएफओ में सुधारों को जारी रखते हुए कई एजेंडा मदों को चर्चा और अनुमोदन के लिए बोर्ड के समक्ष रखा गया। इसमें छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों के लिए माफी योजना भी शामिल रही।
बोर्ड ने आयकर अधिनियम, 2026 के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए ईपीएफ एवं एमपी अधिनियम, 1952 के अंतर्गत अभी तक शामिल न किए गए या छूट प्राप्त न कर चुके आयकर अधिनियम के अनुपालन संबंधी मुद्दों को हल करने के लिए एक बार की माफी योजना को मंजूरी दी है।
प्रस्तावित योजना का उद्देश्य प्रतिष्ठानों और ट्रस्टों को निर्धारित छह महीने की अवधि के भीतर अनुपालन में लाना है, मुख्य रूप से श्रमिकों के हितों की रक्षा करना और उन प्रतिष्ठानों के लिए हर्जाना, ब्याज और जुर्माना माफ करना है, जिन्होंने पहले ही वैधानिक योजना के बराबर या उससे बेहतर लाभ प्रदान किए हैं।
यह योजना निर्दिष्ट शर्तों के अधीन पूर्वव्यापी छूट या माफी की अनुमति देती है और यह सुनिश्चित करती है कि सभी पात्र कर्मचारियों को वैधानिक लाभ प्राप्त हों। इस उपाय से 100 से अधिक सक्रिय मुकदमे और कई अन्य मामलों के समाधान की उम्मीद है, जिससे हजारों ट्रस्ट के सदस्यों को लाभ होगा। यह योजना उन छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों पर लागू होगी, जिन्होंने ईपीएफ एवं एमपी अधिनियम, 1952 के प्रावधानों का अनुपालन किया है।
ईपीएफ छूट संबंधी नई सरल मानक संचालन प्रक्रिया
बोर्ड ने ईपीएफ छूट संबंधी नई सरल मानक संचालन प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है, जिसमें मौजूदा चार एसओपी और छूट नियमावली को एक व्यापक ढांचे में समेकित किया गया है। इसका उद्देश्य अनुपालन बोझ को कम करना है। यह एसओपी पिछले संचय को सरेंडर करने और स्थानांतरित करने के लिए एक संपूर्ण डिजिटल प्रक्रिया भी प्रदान करती है।
प्रौद्योगिकी संचालित यह प्रबंधन दृष्टिकोण छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों के ऑडिट को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाएगा। एक एकीकृत ढांचा व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देगा, कागज रहित काम के साथ साथ पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा, छूट संबंधी मामलों के सरेंडर/कैंसलेशन मामलों की तेजी से प्रोसेसिंग करेगा और जोखिम-आधारित ऑनलाइन ऑडिट के माध्यम से अनुपालन व्यवहार को प्रोत्साहित करेगा।



















