जुलाई 2026 से प्रस्तावित बिजली दर वृद्धि को तत्काल निरस्त करें। घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों एवं छोटे व्यापारियों को राहत दें।
- छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के नाम सहायक अभियंता (सीएसपीडीसीएल) भिलाई को ज्ञापन सौंपा गया।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। बिजली दर वृद्धि के खिलाफ भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) दुर्ग जिला सांगठनिक समिति एवं हिंदुस्तान स्टील एम्पलाइज यूनियन भिलाई (सीटू) ने विरोध प्रदर्शन किया। सेक्टर-1 अंडर ब्रिज के पास स्थित छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (सीएसपीडीसीएल) कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शन के उपरांत छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के नाम सहायक अभियंता (सीएसपीडीसीएल) भिलाई को ज्ञापन सौंपकर जुलाई से प्रस्तावित बिजली दर वृद्धि को तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
महंगाई के दौर में जनता पर अतिरिक्त बोझ अस्वीकार्य
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश की जनता पहले से ही खाद्य सामग्री, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन तथा दैनिक उपयोग की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से परेशान है। ऐसे समय बिजली दरों में वृद्धि करना आम नागरिकों, मजदूरों, कर्मचारियों, किसानों तथा छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने जैसा है। बिजली आज कोई विलासिता की वस्तु नहीं बल्कि जीवन की बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है।
हर परिवार के मासिक बजट पर पड़ेगा सीधा असर
र्तमान में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 0 से 100 यूनिट तक लगभग ₹4.10 प्रति यूनिट, 101 से 200 यूनिट तक ₹5.20 प्रति यूनिट, 201 से 400 यूनिट तक ₹5.60 प्रति यूनिट तथा 400 यूनिट से अधिक खपत पर ₹6.20 प्रति यूनिट की दर लागू है। यदि प्रस्तावित वृद्धि लागू होती है तो प्रति माह 200 से 400 यूनिट बिजली उपयोग करने वाले लाखों परिवारों के मासिक बजट पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। पहले से बढ़ी हुई महंगाई के बीच बिजली बिल में अतिरिक्त वृद्धि आम जनता की क्रय शक्ति को और कमजोर करेगी।
स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ रही हैं शिकायतें
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद अनेक उपभोक्ताओं द्वारा पूर्व की तुलना में अधिक बिजली बिल आने, खपत के आंकड़ों में विसंगति तथा बिलिंग संबंधी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इन शिकायतों का समाधान किए बिना बिजली दरों में वृद्धि करना उपभोक्ताओं के साथ अन्याय होगा। आयोग एवं बिजली कंपनियों को पहले उपभोक्ताओं की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर राहत प्रदान करनी चाहिए।
अक्षमताओं का बोझ जनता पर डालना बंद हो
माकपा एवं सीटू ने कहा कि बिजली वितरण व्यवस्था में तकनीकी हानियां, लाइन लॉस तथा प्रबंधन संबंधी कमियों का भार उपभोक्ताओं पर नहीं थोपा जाना चाहिए। बिजली कंपनियों की कार्यकुशलता बढ़ाने, अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण करने तथा वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने के बजाय बार-बार बिजली दरों में वृद्धि का रास्ता अपनाना जनहित के विरुद्ध है। बिजली जैसी आवश्यक सेवा का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं बल्कि जनता को सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण सेवा उपलब्ध कराना होना चाहिए।
जनहित में प्रस्ताव वापस लेने की मांग
संयुक्त प्रदर्शन में मांग की गई कि जुलाई 2026 से प्रस्तावित बिजली दर वृद्धि को तत्काल निरस्त किया जाए, घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों एवं छोटे व्यापारियों को राहत देने हेतु बिजली दरों में कमी की जाए तथा उपभोक्ता हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला यह प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो व्यापक जनजागरण एवं लोकतांत्रिक आंदोलन चलाया जाएगा। माकपा एवं सीटू ने प्रदेश की जनता से भी इस जनविरोधी प्रस्ताव के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने का आह्वान किया।

