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मजदूर दिवस 2026: CITU ने फहराया कार्यालय व बोरिया गेट पर झंडा, बकाया एरियर पर केंद्र सरकार को कोसा

Azmat ali 01/05/2026 1 minute read
Labor Day 2026 CITU Hoists Flag at Office and Boria Gate Criticizes Central Government over Pending Arrears

केंद्र सरकार द्वारा थोपे गए अफॉर्डेबिलिटी क्लाज़ के चलते 39 महीने का एरियर्स लंबित है। 112 महीने बीत जाने के बाद भी वेतन समझौता अधूरा।

  • झंडा फहराने के बाद संकल्प लिया कि मज़दूर एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई को और तेज करेंगे। डटकर मुकाबला करेंगे।
  • वेतन समझौता पूर्ण न होने के पीछे भी केंद्र सरकार की नीतियाँ जिम्मेदार हैं।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। मजदूर दिवस पर सीटू द्वारा कार्यालय एवं बोरिया गेट पर झंडारोहण के साथ मज़दूर एकता और संघर्ष का संदेश एक बार फिर मज़बूती से सामने आया। यूनियन कार्यालय में शशि नायर ने तथा बोरिया गेट पर मैथ्यू वर्गिस ने झंडा फहराया। इस अवसर पर सीटू ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि देशभर के मेहनतकश वर्ग की आवाज़ और उनके हक़ की लड़ाई का प्रतीक है।

मज़दूरों के वोटो से जीत कर मज़दूरों पर ही हमलावर है केंद्र सरकार

इस अवसर पर वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि आज की केंद्र सरकार, जो मज़दूरों के वोटों से सत्ता में आई है, वही अब मज़दूरों के अधिकारों पर लगातार हमला कर रही है।

मज़दूरों के हितों की अनदेखी करते हुए श्रम कानूनों में बदलाव, निजीकरण को बढ़ावा, और रोजगार के अवसरों में कमी जैसी नीतियाँ सरकार की मंशा को उजागर करती हैं। इससे साफ है कि सरकार पूंजीपतियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है, जबकि देश का मेहनतकश वर्ग असुरक्षा और शोषण का सामना कर रहा है।

हमला जितना तेज होगा संघर्ष उससे ज्यादा तेज होगा

वक्ताओं ने यह भी कहा कि “हमला जितना तेज होगा, संघर्ष उससे ज्यादा तेज होगा।” यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि मज़दूर आंदोलन की चेतावनी है। मज़दूर वर्ग अब चुप बैठने वाला नहीं है; वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।

वेतन समझौता पूर्ण ना होने के पीछे भी केंद्र सरकार जिम्मेदार

वेतन समझौता पूर्ण न होने के पीछे भी केंद्र सरकार की नीतियाँ जिम्मेदार हैं। केंद्र सरकार द्वारा थोपे गए अफॉर्डेबिलिटी क्लाज़ के चलते 39 महीने का एरियर्स लंबित है। 112 महीने बीत जाने के बाद भी वेतन समझौता पूर्ण नहीं किया जा सका है। वहीं, सरकार की उदासीनता और टालमटोल की नीति के कारण लाखों मज़दूर आज भी उचित वेतन और सुविधाओं से वंचित हैं।

अपनी ही वादे से मुकर रही है केंद्र सरकार

केंद्र सरकार ने नई श्रम संहिताओं को लागू करने के साथ असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों तथा संगठित क्षेत्र में काम करने वाले ठेका श्रमिकों के वेतन में वृद्धि की बात कही गई थी। यह वृद्धि ₹21000 मिनिमम वेतन के रूप में देने की बात जोर-शोर से प्रचार किया गया किंतु जैसे ही लेबर कोड़ लागू हो गए हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश के राज्य सरकार ने ₹15000 न्यूनतम वेतन तय किया। जिसका मजदूर पुरजोर विरोध कर रहे हैं वही मालिकों ने सरकार से मिलकर ऐलान किया है कि हम ₹15000 न्यूनतम वेतन भी नहीं दे सकते हैं जबकि सीटू जीने योग्य वेतन के रूप में न्यूनतम वेतन ₹26000 की मांग करते हुए आंदोलन को तेज कर रहा है।

ये है वर्ष 2026 के मई दिवस आयोजनों का मुख्य केंद्र बिन्दु

वर्ष 2026 के मई दिवस आयोजनों का मुख्य केंद्र बिन्दु, इन श्रमिकों का वर्तमान संघर्ष होना चाहिए। विशेष रूप से 8 घंटे काम की मांग, न्यूनतम वेतन को तत्काल संशोधित कर कम से कम ₹26,000 प्रति माह करना, ट्रेड यूनियन का अधिकार, केंद्र सरकार द्वारा श्रम संहिताओं को रद्द करना और राज्यों में श्रम संहिताओं में किए गए संशोधनों को वापस लेना, भारतीय श्रम सम्मेलन (ILC) को तत्काल बुलाना, सभी गिरफ्तार श्रमिकों की रिहाई और अन्य राज्य स्तरीय मांगें। इस मई दिवस को वर्तमान श्रमिक संघर्षों के प्रति एकजुटता के एक बड़े मंच के रूप में आयोजित किया जाना चाहिए।

झंडा फहराने के बाद अंत में यह संकल्प लिया गया कि मज़दूर एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई को और तेज करेंगे, और किसी भी अन्याय के खिलाफ डटकर मुकाबला करेंगे।

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