पेपर लीक और परीक्षा घोटालों ने शिक्षा व्यवस्था की साख पर किया गंभीर हमला। भिलाई स्टील प्लांट के कर्मचारी परिवार समेत पहुंचे।
- सरकार को लीपापोती छोड़कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई करनी होगी तथा शिक्षा व्यवस्था में जनता का विश्वास बहाल करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने होंगे।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। हिंदुस्तान स्टील एम्पलॉईज यूनियन (सीटू) ने 20 जुलाई को सिविक सेंटर स्थित सेल परिवार चौक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया तथा भिलाई कोतवाली थाना प्रभारी के माध्यम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन प्रेषित किया। सीटू ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, परीक्षा संबंधी अनियमितताओं तथा मूल्यांकन में कथित गड़बड़ियों ने पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता को गहरे संकट में डाल दिया है। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य, उनके परिश्रम और देश के शिक्षा तंत्र पर सीधा हमला है।
भ्रष्ट तंत्र हमला कर रहा है विद्यार्थियों के मेहनत पर
सीटू ने कहा कि नीट सहित विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार हुए पेपर लीक ने साबित कर दिया है कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित एवं निष्पक्ष बनाए रखने में सरकार पूरी तरह विफल रही है। लाखों विद्यार्थी वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं, लेकिन संगठित पेपर लीक गिरोहों, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के कारण उनकी मेहनत बर्बाद हो जाती है। इससे प्रतिभा का सम्मान नहीं, बल्कि भ्रष्ट तंत्र को संरक्षण मिलने का संदेश जाता है और युवाओं का व्यवस्था से विश्वास उठता जा रहा है।
विश्वसनीय नहीं रह गया है पेपर मूल्यांकन प्रक्रिया
सीटू ने कहा कि केवल पेपर लीक ही नहीं, बल्कि सीबीएसई बोर्ड की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में सामने आई कथित अनियमितताओं ने भी शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। गलत मूल्यांकन के कारण अनेक विद्यार्थियों के अंक प्रभावित हुए, जिससे उनके उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश, छात्रवृत्ति और भविष्य के अवसरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। यदि मूल्यांकन प्रक्रिया ही विश्वसनीय नहीं रहेगी तो विद्यार्थियों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कैसे कायम रहेगा?
धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लें और इस्तीफा दें
सीटू ने कहा कि लगातार सामने आ रही इतनी गंभीर घटनाओं के बावजूद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार न करना लोकतांत्रिक जवाबदेही से बचने का प्रयास है। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब किसी विभाग के अंतर्गत लगातार गंभीर विफलताएं सामने आती हैं तो संबंधित मंत्री का नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करना लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है। लेकिन यहां जवाबदेही तय करने के बजाय लगातार टालमटोल की जा रही है, जिससे जनता का विश्वास और कमजोर हो रहा है।
राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग
सीटू ने राष्ट्रपति से मांग की है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए इस्तीफा लिया जाए, नीट सहित सभी प्रभावित परीक्षाओं तथा सीबीएसई मूल्यांकन संबंधी कथित अनियमितताओं की उच्च स्तरीय न्यायिक अथवा सीबीआई जांच कराई जाए तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा कर उसे भंग किया जाए तथा नई व्यवस्था बनाई जाए जो पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और विश्वसनीय हो।
राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है शिक्षा व्यवस्था
सीटू अध्यक्ष विजय कुमार जांगड़े ने कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होती है। यदि युवाओं का शिक्षा व्यवस्था से विश्वास टूटता है तो इसका दुष्प्रभाव केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश के सामाजिक, आर्थिक और वैज्ञानिक भविष्य पर पड़ेगा। इसलिए सरकार को लीपापोती छोड़कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई करनी होगी तथा शिक्षा व्यवस्था में जनता का विश्वास बहाल करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने होंगे।

