SAIL को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: मकान नहीं छोड़ने वाले रिटायर्ड कर्मचारियों की ग्रेच्युटी रोकी जा सकेगी, BSL केस पर फैसला

SAIL Gets Major Relief from Supreme Court Gratuity of Retired Employees who do not Vacate Their Houses can be Withheld, Decision on BSL Case
  • झारखंड हाईकोर्ट ने पहले कर्मचारियों को राहत देते हुए ग्रेच्युटी भुगतान का आदेश दिया था।
  • SAIL ने अपनी ग्रेच्युटी नियमावली 1978 का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित कर्मचारियों या उनके कानूनी वारिसों को 4 सप्ताह के भीतर क्वार्टर खाली करने का निर्देश दिया है।

सूचनाजी न्यूज, नई दिल्ली। Supreme Court of India ने Steel Authority of India Limited (SAIL) को बड़ी कानूनी राहत देते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि सेवानिवृत्त कर्मचारी निर्धारित समय के बाद भी कंपनी के क्वार्टर खाली नहीं करते हैं, तो SAIL उनकी ग्रेच्युटी रोक सकता है और उस पर पेनल रेंट (दंडात्मक किराया) एडजस्ट कर सकता है।

जस्टिस Pankaj Mithal और S. V. N. Bhatti की बेंच ने यह फैसला सुनाते हुए Jharkhand High Court के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें रिटायर्ड कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और उस पर ब्याज देने का निर्देश दिया गया था। बोकारो स्टील प्लांट के पूर्व कार्मिक ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां उन्हें झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को याचिकाकर्ता शंभु प्रसाद सुना दिया है।

बोकारो स्टील प्लांट से जुड़ा है मामला

मामला Bokaro स्टील प्लांट के उन पूर्व कर्मचारियों से जुड़ा था, जिन्होंने रिटायरमेंट के बाद भी कंपनी के आवास खाली नहीं किए थे। हाईकोर्ट ने पहले कर्मचारियों को राहत देते हुए ग्रेच्युटी भुगतान का आदेश दिया था, लेकिन SAIL ने अपनी ग्रेच्युटी नियमावली 1978 का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी कर्मचारी एक तरफ कंपनी का क्वार्टर कब्जे में रखे और दूसरी तरफ ग्रेच्युटी पर ब्याज की मांग करे, यह स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने साफ किया कि बिना क्वार्टर खाली किए ग्रेच्युटी और ब्याज की मांग करना “prima facie अवैध” है।

ग्रेच्युटी पर ब्याज देना अनधिकृत कब्जे को बढ़ावा देने जैसा

कोर्ट ने यह भी माना कि कंपनी की नीति के अनुसार अनधिकृत कब्जे की स्थिति में पेनल रेंट लगाना स्वाभाविक है और इसे ग्रेच्युटी समेत अन्य बकाया से समायोजित किया जा सकता है। साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में ग्रेच्युटी पर ब्याज देना अनधिकृत कब्जे को बढ़ावा देने जैसा होगा।

रिटायर्ड कर्मचारियों पर अत्यधिक आर्थिक बोझ से राहत

हालांकि, कोर्ट ने कर्मचारियों को राहत देते हुए इस मामले में पेनल रेंट ₹1000 प्रति माह तय किया, ताकि रिटायर्ड कर्मचारियों पर अत्यधिक आर्थिक बोझ न पड़े। साथ ही स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल इस केस तक सीमित रहेगी और भविष्य के मामलों में मिसाल नहीं बनेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित कर्मचारियों या उनके कानूनी वारिसों को 4 सप्ताह के भीतर क्वार्टर खाली करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही SAIL को भी 4 सप्ताह में देय राशि की गणना कर जानकारी देने को कहा गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रेच्युटी का भुगतान और क्वार्टर का खाली होना—दोनों प्रक्रियाएं एक साथ पूरी की जाएंगी।

यह फैसला SAIL समेत अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां आवासीय सुविधाओं के दुरुपयोग के मामले सामने आते रहे हैं।

याचिका को खारिज कर दिया

सुप्रीम कोर्ट ने शंभू प्रसाद सिंह द्वारा दायर अवमानना याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में कथित अवज्ञा (Contempt) ऐसी नहीं है, जिस पर आगे विचार किया जाना आवश्यक हो।

न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि संबंधित सिविल अपील (संख्या 3499-3500/2026), जो विशेष अनुमति याचिका (SLP) से जुड़ी है, में पहले ही जो निर्णय लिया जा चुका है, उसे देखते हुए अवमानना के आरोप टिकते नहीं हैं। ऐसे में वर्तमान अवमानना याचिकाएं खारिज की जाती हैं।

अदालत ने साथ ही यह भी आदेश दिया कि इस मामले से जुड़े सभी लंबित आवेदनों का भी निस्तारण कर दिया जाए। यह फैसला न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने सुनाया।