बीएमएस को 2189, इंटक को महज 781 और सीटू को 215 वोट मिले। एटक को 33, एचएमएस को 31, आइएमयू को 17, एआइयूटीयूसी को 17 वोट प्राप्त हुए।
- बीएमएस के केंद्रीय नेता व राउरकेला इस्पात कारखाना कर्मचारी संघ के पदाधिकारी हिमांशु शेखर बल पिछले 8 दिनों से बर्नपुर में हैं। चुनावी रणनीति बनाने से लेकर रिजल्ट तक अहम किरदार निभाए।
सूचनाजी न्यूज, बर्नपुर। सेल इस्को स्टील प्लांट बर्नपुर की पहली मान्यता प्राप्त यूनियन का दर्जा भारतीय मजदूर संघ से संबंद्ध यूनियन को मिल गया है। गुरुवार को हुए चुनाव में भारी मतों से जीत हासिल की है। 66.49% वोट हासिल करके इंटक,सीटू, एटक, एचएमएस आदि यूनियनों को हरा दिया। 3514 कर्मचारियों में से 3291 ने मतदान में हिस्सा लिया था। इसमें से 2189 कर्मचारियों ने बीएमएस को वोट किया। जबकि इंटक को महज 781 और सीटू को 215 वोट ही मिले। 8 वोट इनवैलिड हो गए। वहीं, कुल 3514 कर्मचारियों की बात करें तो बीएमएस को 62.29 प्रतिशत समर्थन मिला है।
मान्यता प्राप्त यूनियन का दर्जा हासिल करने के लिए 51 प्रतिशत वोट चाहिए थे, लेकिन यूनियन ने 66.49% वोट प्राप्त किया। जीत की खबर बाहर आते ही जश्न शुरू हो गया। बीएमएस के केंद्रीय नेता हिमांशु शेखर बल भी बर्नपुर में पिछले 8 दिनों से डेरा डाले हुए हैं। जीत के 4 कारणों पर सूचनाजी.कॉम ने उनसे बातचीत की। पढ़िए, हिमांशु शेखर बल ने क्या-क्या प्वाइंट बताए।

जीत का कारण हिमांशु बल की जुबानी…
मतदान का अधिकार बीएमएस ने दिलाया: कर्मचारियों को यह बात समझ में आ चुकी थी कि आइएसपी में सिर्फ बीएमएस ही परिवर्तन करा सकती है। इंटक आदि यूनियनों के वर्चस्व को समाप्त करने के लिए चुनाव कराने की मांग बीएमएस ने की। सुप्रीम कोर्ट तक लड़े और मतदान का अधिकार लेकर रहे। जबकि चुनाव को कैंसिल कराने के लिए कुछ यूनियनें सुप्रीम कोर्ट तक गई थीं। कर्मचारियों ने ऐसी यूनियनों को सबक सीखा दिया है।

सिर्फ कर्मचारियों का नेतृत्व स्वीकार: बीएमएस, आइएसपी कर्मचारियों के बीच युवा और कर्मचारी का नेतृत्व में लेकर गई थी। रिटायर्ड नेताओं को आइएसपी के कर्मचारियों ने भी नकार दिया है। युवा कर्मचारियों ने अपने वोट से रिटायर्ड नेताओं का बहिष्कार किया है।
आवास की बदहाली: इस्को स्टील प्लांट के कर्मचारी बदहाल आवासों में रहते हैं। टाउनशिप की स्थिति अच्छी नहीं है। भयंकर बदहाली है। इस बात का गुस्सा कर्मचारियों ने अपने वोट से इंटक आदि यूनियनों पर उतार दिया है।
मैनेजमेंट का अत्याचार: आइएसपी के कर्मचारी बहुत परेशान हैं। प्रबंधन बात-बात में धमकी देता है। कर्मचारियों को डरा देता है। सस्पेंड और ट्रांसफर की धमकी दी जाती है। बाकी यूनियनें प्रबंधन का समर्थन करती हैं। यह बात कर्मचारी समझ चुके थे। इसलिए कर्मचारियों के बीच में बीएमएस को लेकर सकारात्मक माहौल बना।
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