वेदांता पॉवर प्लांट एक्सीडेंट अपडेट: अब तक 16 मजदूरों की मौत, 5 नाजुक, 35 लाख मुआवजा, अनुकंपा नियुक्ति की घोषणा

Vedanta Power Plant Accident Update 16 Workers Dead 5 Critical, Rs 35 Lakh Compensation Compassionate Appointment Announced
  • केंद्र सरकार ने 2-2 लाख परिजनों को, घायलों को 50-50 हजार, राज्य सरकार ने परिजनों को 5-5 लाख, घायलों को 50-50 हजार देने की घोषणा की।

सूचनाजी न्यूज, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर लिमिटेड के संयंत्र में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। मरने वालों की संख्या 13 पर पहुंच गई है। अब भी कई जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। गंभीर रूप से जख्मी मजदूरों को बेहतर इलाल देने के लिए एयर एम्बुलेंस से बाहर भेजा जा रहा है।

वहीं, वेदांता प्रबंधन ने मृतक के परिजनों को 35-35 लाख और घायलों को 15-15 लाख रुपए मुआवजा देने की बात कही है। साथ ही पूरा पेमेंट, इंश्योरेंस, पीएफ आदि अलग से मिलेगा। मृतक मजदूर के आश्रित परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी। वेदांता ग्रुप ने हादसे की जांच के लिए मुंबई से विशेषज्ञों की टीम भेजा है।

बता दें कि बॉयलर यूनिट-1 में स्टीम पाइप और वॉटर सप्लाई पाइप के ज्वाइंट में तकनीकी खराबी आने से हुए हादसे में 34 श्रमिक प्रभावित हुए, जिनमें 13 मजदूरों की मौत हो गई। कई श्रमिक अब भी अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

यह हादसा सिर्फ एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि उन परिवारों पर टूटा पहाड़ है जिनके घरों के कमाने वाले सदस्य अब कभी वापस नहीं लौटेंगे। कई घरों के चूल्हे बुझ गए, बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया और परिजनों की आंखों में सिर्फ आंसू और सवाल बाकी हैं।

प्रशासन का बड़ा एक्शन

घटना की गंभीरता को देखते हुए सक्ती कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी ने तत्काल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। अनुविभागीय दंडाधिकारी, डभरा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि हादसे के हर पहलू की जांच होगी और जिम्मेदारों को बख्शा नहीं जाएगा।

इस प्वाइंट पर होगी जांच

  • हादसा कब और कैसे हुआ
  • उस समय कौन-कौन मजदूर ड्यूटी पर थे
  • मौत और घायलों की वास्तविक स्थिति क्या है
  • सुरक्षा मानकों में लापरवाही हुई या नहीं
  • तकनीकी खामी थी या मानवीय गलती
  • आखिर जिम्मेदार कौन है
  • भविष्य में ऐसी घटना रोकने के क्या उपाय होंगे

30 दिन में रिपोर्ट

जांच अधिकारी को 30 दिनों के भीतर पूरी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी औद्योगिक इकाई में अगर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत थी, तो फिर 12 मजदूरों की जान कैसे चली गई? क्या पहले से खतरे के संकेत थे? क्या मजदूरों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया? अब इन सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट से सामने आएंगे।

पूरे प्रदेश की नजर जांच पर

यह हादसा सिर्फ सक्ती नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के औद्योगिक सुरक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर गया है। अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी है।