- थीम “Empowering Neurodiversity: Building Inclusive Futures” रही।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। पीजी कॉलेज ऑफ नर्सिंग, भिलाई में विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस 2026 का प्रभावशाली आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम समाज में समावेशन, गरिमा और समान अवसरों के प्रति एक सशक्त संदेश के रूप में उभरा। कार्यक्रम का आयोजन प्राचार्या डॉ. रोजा प्रिंसी के दूरदर्शी मार्गदर्शन तथा उप-प्राचार्य डॉ. डेज़ी अब्राहम एवं डॉ. जी. हेमावती के सहयोग से संपन्न हुआ।
इस वर्ष का आयोजन द्वारा निर्धारित थीम “Empowering Neurodiversity: Building Inclusive Futures” पर आधारित रहा, जिसने यह स्पष्ट किया कि अब समय केवल जागरूकता तक सीमित रहने का नहीं, बल्कि ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) से प्रभावित व्यक्तियों के लिए वास्तविक समावेशन एवं स्वीकार्यता सुनिश्चित करने का है।
कार्यक्रम का आयोजन Durg- Bhilai Academy of Pediatrics के तत्वावधान में किया गया, जिसमें अध्यक्ष Dr Naresh Motwani एवं सचिव Dr Sandeep Thute की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को शैक्षणिक एवं चिकित्सीय दृष्टि से और अधिक सुदृढ़ बनाया।
मुख्य अतिथि भिलाई स्टील प्लांट के एसएमएस-3 की जीएम Pushpa Ambrose ने अपने प्रेरक उद्बोधन में ऑटिज़्म को किसी कमी के रूप में नहीं, बल्कि मानव विविधता के एक विशिष्ट आयाम के रूप में देखने पर बल दिया।
उन्होंने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में एवं जैसे व्यक्तित्वों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि ऑटिज़्म से जुड़े व्यक्तियों ने अपनी अद्वितीय क्षमताओं के बल पर नवाचार, दृढ़ता और उत्कृष्टता की नई परिभाषाएँ स्थापित की हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि जब समाज सहानुभूति से आगे बढ़कर स्वीकृति को अपनाता है, तभी असाधारण संभावनाओं का वास्तविक विकास संभव होता है।
कार्यक्रम की शैक्षणिक अतिथि, Dr Mala Choudhary, वरिष्ठ परामर्शदाता, बाल रोग विभाग, जेएलएनएचआरसी, भिलाई ने अपने सुव्यवस्थित एवं विचारोत्तेजक व्याख्यान में ऑटिज़्म की प्रारंभिक पहचान, बहु-विषयक उपचार पद्धति एवं अभिभावकों की निरंतर भूमिका के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि ऑटिज़्म “न्यूरोविकास का एक भिन्न रूप है, जिसे सुधारने नहीं बल्कि समझने की आवश्यकता है।” अपने वक्तव्य में उन्होंने एवं जैसे महान व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हुए यह स्पष्ट किया कि न्यूरोडायवर्सिटी सदैव से समाज के विकास और नवचिंतन की आधारशिला रही है।
कार्यक्रम में ऑटिज़्म से जुड़े व्यक्तियों के अधिकार, सम्मान एवं सामाजिक समावेशन को केंद्र में रखते हुए यह संदेश दिया गया कि उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में समान अवसर प्राप्त होना चाहिए। वक्ताओं ने सामाजिक भ्रांतियों को समाप्त कर एक समावेशी वातावरण निर्मित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर नर्सिंग विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। भविष्य के स्वास्थ्यकर्मी के रूप में उन्होंने न केवल संवेदनशील देखभालकर्ता, बल्कि जागरूकता के सशक्त वाहक बनने का संकल्प लिया। उन्हें “प्रकाश स्तंभ” के रूप में समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने हेतु प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का समापन गरिमा, समानता एवं समावेशन के मूल्यों को आत्मसात करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि एक सच्चा प्रगतिशील समाज वही है, जो मानव विविधता के प्रत्येक रूप को सम्मान, समानता और करुणा के साथ स्वीकार करता है।















