12 फरवरी हड़ताल: भिलाई स्टील प्लांट गेट जाम करने की तैयारी, संयुक्त यूनियन बोली…

12 February strike Preparations to Block Bhilai Steel Plant Gate United Union Said
  • उद्योगों में ट्रेड यूनियन विहीन कार्यस्थल का निर्माण करवाना चाहती है केंद्र सरकार।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल है। भिलाई स्टील प्लांट की यूनियनों ने भी हड़ताल का आह्वान किया है। संयुक्त ट्रेड यूनियनों द्वारा जोरातराई गेट में 12 फरवरी को देश व्यापी हड़ताल के संदर्भ में पर्चा वितरण और माइक प्रचार किया गया।

संयुक्त यूनियन ने कहा कि औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947, ट्रेड यूनियन अधिनियम 1926, एवं औद्योगिक रोजगार अधिनियम 1946 को समाप्त करके आईआर कोड यानी औद्योगिक संबंध संहिता बनाया गया है।

इस कोड के मुताबिक कोई भी व्यक्ति जो पर्यायवाची यानी सुपरवाइजरी क्षमता में कार्यरत है और प्रतिमाह 18000 रुपए या समय-समय पर केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित राशि से अधिक वेतन प्राप्त कर रहा है। वह मजदूर ही नहीं होगा यानी मजदूर की परिभाषा ही बदल दी जा रही है, ताकि ट्रेड यूनियनों से कर्मियों को दूर किया जा सके।

  • प्रबंधन की जेबी संगठन को मिलेगा औद्योगिक संबंध संहिता का लाभ

आईआर कोड में सदस्यता जांच हेतु गुप्त मतदान करवाने का भी कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। यदि गुप्त मतदान द्वारा कर्मियों को अपने मनपसंद यूनियन चुनने का अधिकार खत्म कर दिया गया तो इसका सीधा मतलब है कि प्रबंधन की जेबी यूनियनों को इसका लाभ मिलेगा, जो मजदूर परस्त ना होकर मालिक परस्त होकर रह जाएंगे एवं कर्मियों के पक्ष में आवाज उठाने वालों को धीरे-धीरे कुचलने का प्रयास शुरू हो जाएगा।

  • श्रम न्यायालय से न्याय मिलना भी होगा मुश्किल

संयुक्त यूनियन ने कहा कि प्रशासन के प्रवेश को संभव बनाने के लिए ट्रिब्यूनल की संरचना को बदल दिया गया है। सुलह की सफलता अर्थात एफओसी को ट्रिब्यूनल को रेफर करना वाला अधिकारी नहीं होगा। अब कर्मचारियों द्वारा विवाद लगाने की अवधि भी 3 वर्ष से घटकर 2 वर्ष कर दी गई है। जहां पहले ही श्रम कार्यालय और लेबर कोर्ट में मजदूरों के लिए न्याय पाना मुश्किल हो चुका था। वह अब और भी मुश्किल बना दिया गया है।

  • ट्रेड यूनियन मान्यता भी पड़ जाएगा मुश्किल में

अभी तक गुप्त मतदान द्वारा सदस्यता जांच करने के पश्चात जिस भी यूनियन को 15% से ज्यादा वोट मिलता है। उन सभी यूनियनों को प्रतिनिधि यूनियन का दर्जा प्राप्त होता है। वही 15% से ज्यादा वोट पाने वाले सभी यूनियनों में जिनको सर्वोच्च वोट मिलता है, उसे मान्यता प्राप्त यूनियन का दर्जा दिया जाता है।

किंतु लेबर कोड में बदलाव करते हुए यह नियम बनाया गया है कि 51% या उससे अधिक मजदूरों का समर्थन प्राप्त करने वाले यूनियन को ही मान्यता यूनियन का दर्जा मिलेगा। यदि किसी भी यूनियन को 51% मजदूरों का समर्थन प्राप्त नहीं है ऐसी स्थिति में 20% या उससे अधिक मजदूरों का समर्थन प्राप्त जो भी यूनियन होगी, उन सभी यूनियनों को मिलाकर काउंसिल बनाया जाएगा एवं 20% से ज्यादा मजदूरों का समर्थन प्राप्त यूनियन के सदस्य इस काउंसिल के मेंबर होंगे।

  • मालिकों द्वारा काम पर रखना और निकालना किया आसान

किसी भी 100 कर्मी या उससे बड़े उद्योग में छंटनी करने बंद करने आदि के लिए सरकार की पूर्व स्वीकृति लेने की आवश्यकता होती थी। इसकी संख्या को बढ़ाकर 300 कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अधिकांश कारखाने में मजदूर को बिना सरकारी मंजूरी के निकलना मुमकिन हो जाएगा। इसके साथ ही यह संख्या कभी भी सरकारी अधिसूचना के द्वारा बढ़ाई जा सकती है।

  • जानबूझकर अस्पष्ट रखा गया है हड़ताल पूर्व सूचना देने की अवधि को

संयुक्त यूनियन ने कहा कि जायज मांग को लेकर हड़ताल करना मजदूर वर्ग का अधिकार है। इस अधिकार पर यह कोड प्रतिबंध लगाने का काम कर रहा है। कोड में एक जगह 60 दिन पूर्व सूचना देने की बात कही गई है।

वहीं, दूसरी जगह 14 दिन पहले की बात कही गई है इसका मकसद मालिकों और सरकारी मशीनरी द्वारा अपनी सुविधा के अनुसार गलत व्याख्या करने और मजदूरों के खिलाफ बदले की भावना के साथ कार्रवाई करना है। आईआर कोड सरकारों एवं श्रम विभागों को हड़तालों को रोकने के लिए सुलह प्रक्रिया को जानबूझकर लंबा खींचने की ताकत देता है।