भिलाई स्टील प्लांट में सफाई के नाम पर हराम की कमाई, क्या कोई खा रहा रिश्वत की मलाई…!

A Joke is Being Played in the Name of Cleanliness in Bhilai Steel Plant CITU Exposes it
  • संयंत्र के अंदर होने वाली चोरियां, संयंत्र के लिए स्पेयर खरीदने में कमीशन खोरी, ठेकेदारी में बंदरबाट और कई किस्म के लूट के चलते कंपनी को नुकसान होता है।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल भिलाई इस्पात संयंत्र को साफ सुथरा रखने के लिए कई किस्म के सफाई कॉन्ट्रैक्ट होते हैं। उसमें से एक है सड़कों की सफाई। इस सड़क की सफाई में जहां कुछ महिला कामगार झाड़ू लेकर रोड की सफाई करती हैं। वहीं दूसरी तरफ कंप्रेसर सक्शन मशीन से सफाई का कार्य चलता है, जिसके काम करने के तरीके को देखने से स्पष्ट होता है कि सफाई के नाम पर मजाक किया जा रहा है।

भिलाई स्टील प्लांट की पूर्व मान्यता प्राप्त यूनियन सीटू की टीम ने मौके पर पहुंच कर देखा कि मशीन के दोनों तरफ जो ब्रश लगे हुए हैं, उसमें से एक ब्रश तो जमीन से काफी ऊपर है। वहीं दूसरी तरफ धूल एवं कचरा को सक्शन के माध्यम से अंदर खींचने वाला कंप्रेसर भी काम नहीं कर रहा है।

मशीन से बेहतर तो मजदूर कर रहे हैं संयंत्र के अंदर कचरा की सफाई

यूनियन नेताओं ने कहा-तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो आज के नजारे से यह स्पष्ट हो रहा था कि मशीन से बेहतर प्लांट के अंदर सफाई में लगे मजदूर कामगार बेहतर तरीके से कचरा की सफाई कर रहे थे, जिस पर प्रबंधन को भी गौर करना होगा।

क्योंकि संयंत्र के अंदर रोड की सफाई करने के लिए ट्रकों वाली दो मशीन हैं, जिनका औसत एवरेज अधिकतम 5 किलोमीटर प्रति लीटर डीजल हो सकता है। और यह गाड़ी सफाई नहीं करने के बावजूद सफाई के नाम पर कछुए की चाल से धीरे-धीरे एक ही रोड पर कई बार घूमते रहती है।

मौन बैठे रहते हैं मॉनिटरिंग करने वाले जिम्मेदार अधिकारी

पूछताछ के दौरान पता चला कि यह सफाई का ठेका सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के अधीन आता है। वहां पर बैठे अधिकारी की जिम्मेदारी है कि इसकी मॉनिटरिंग करें। किंतु गाड़ी धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी तथा रोड पर कचरा जस का तस पड़ा हुआ था और मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारी अपने दफ्तर में ऐसे मौन बैठे रहते हैं, जैसे मानो सफाई का ठेका लेने वाली कंपनी पैसा लेकर नहीं बल्कि मुफ्त में सफाई कर रही है या फिर बंदरबाट का कोई और कहानी हो तो इनकार नहीं किया जा सकता है।

1 लाख करोड़ का बिजनेस करके भी कमा रहे हैं मात्र 2000 करोड़ मुनाफा

सीटू नेताओं ने बताया कि एक उच्च स्तर के अधिकारी किसी खास मौके पर चर्चा के दौरान बता रहे थे कि हम साल भर में लगभग 1 लाख करोड़ का बिजनेस करते हैं, जिसे हम 1 लाख करोड़ का टर्नओवर भी कह सकते हैं। किंतु साल के आखिरी में जब पूरा मुनाफा का गणना करते हैं तो पाते हैं कि 2000 करोड़ से 3000 करोड़ का ही मुनाफा हुआ है।

कभी-कभी तो कंपनी घाटे में रहती है। अब इसकी तुलना किसी निजी व्यापारी से करें तो पता चलता है कि 1 लाख करोड़ का टर्नओवर वाला कोई भी बिजनेस कम से कम 20% अर्थात 20 हज़ार करोड़ रूपया मुनाफा कमाने की दिशा में काम करता है।

स्टील सेक्टर के एक बहुत बड़े उद्योगपति कहते थे कि इंडस्टी से कभी घटा नहीं होता है। अर्थात लोहे के कारखाने में कचरा भी बेचो तो पैसा मिलता है। किंतु संयंत्र के अंदर होने वाली चोरियां, संयंत्र के लिए स्पेयर खरीदने में कमीशन खोरी, ठेकेदारी में बंदरबाट और कई किस्म के लूट के चलते संयंत्र घाटे में चला जाता है, जिसका खामियाजा कर्मियों को झेलना पड़ता है। इसका असर वेतन समझौता में होने वाली देरी से लेकर एरियर्स ना देने वाली बात तक हर जगह नजर आता है।