- प्रोपेन की कमी के बीच भिलाई इस्पात संयंत्र के एसएमएस-2 ने वैकल्पिक ईंधन रणनीति अपनाई
- स्लैब कटिंग हेतु DA गैस का सफल ट्रायल एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक कदम के रूप में सामने आया है।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। देश में प्रोपेन गैस की उपलब्धता में आई कमी के मद्देनज़र भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के स्टील मेल्टिंग शॉप 2 (SMS 2) ने वैकल्पिक ईंधन के उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्लैब कटिंग के लिए प्रोपेन के स्थान पर डिसॉल्व्ड एसीटिलीन (DA) गैस का सफल ट्रायल किया।
यह पहल एसएमएस-2 द्वारा लागत नियंत्रण और संसाधनों के कुशल उपयोग की दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों का हिस्सा है। इससे पूर्व भी शॉप ने सबमर्ज्ड एंट्री नोज़ल (SEN) के प्री-हीटिंग में प्रोपेन के स्थान पर मिश्रित गैस का उपयोग शुरू कर अपनी निर्भरता कम की थी, जिससे प्रक्रिया की स्थिरता के साथ-साथ लागत प्रभावशीलता भी सुनिश्चित हुई।
इसी क्रम में स्लैब कटिंग हेतु DA गैस का सफल ट्रायल एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक कदम के रूप में सामने आया है, जिससे भविष्य में परिचालन निरंतरता बनाए रखते हुए संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में मार्ग प्रशस्त हुआ है।
यह पहल एस. के. घोषाल, सीजीएम (एसएमएस-2) के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। उन्होंने टीम को विपरीत परिस्थितियों को अवसर में बदलने के लिए प्रेरित करते हुए बहु-विकल्पीय रणनीतियों प्लान A, प्लान B और प्लान C के निर्माण पर बल दिया। उनका मानना है कि सूक्ष्म स्तर की योजना (माइक्रो-प्लानिंग) ही किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति से सफलतापूर्वक बाहर निकलने की कुंजी है।
इस कार्यान्वयन में सीसीएस मैकेनिकल एवं ऑपरेशन टीमों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रमुख योगदानकर्ताओं में एन. के. डेथे, जीएम आई/सी, सीसीएस (मैकेनिकल), सोवन मिश्रा, जीएम (मैकेनिकल), निकुंज सिंघल, जीएम (मैकेनिकल) तथा शांतनु देब सिकदार, जीएम आई/सी, सीसीएस (ऑपरेशन) शामिल रहे।
यह पहल न केवल प्रोपेन पर निर्भरता कम करने में सहायक सिद्ध होगी, बल्कि भिलाई इस्पात संयंत्र की दक्षता, लचीलापन और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ करती है।















