- बोकारो इस्पात संयंत्र द्वारा प्रमुख विस्तार परियोजनाओं हेतु बिडर्स सम्मेलन का आयोजन।
सूचनाजी न्यूज, बोकारो। सेल-बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) द्वारा अपने विस्तारीकरण योजना के तहत आगामी पूंजीगत परियोजनाओं पर विचार-विमर्श के लिए एक दिवसीय ‘बिडर्स मीट कनेक्ट प्रो’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में देश-विदेश की अग्रणी इंजीनियरिंग कंपनियों ने भाग लिया और परियोजनाओं के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की।
कार्यक्रम का उद्घाटन बोकारो इस्पात संयंत्र के निदेशक प्रभारी प्रिय रंजन द्वारा अधिशासी निदेशकों एवं मुख्य महाप्रबंधकों की उपस्थिति में किया गया। अनीश सेनगुप्ता, अधिशासी निदेशक (परियोजनाएँ), बीएसएल ने कार्यक्रम में आये सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा सभी को इस कार्यक्रम के महत्व एवं प्रयोजन से अवगत कराया।
सम्मेलन के दौरान ब्राउनफील्ड विस्तार कार्य, स्टैम्प चार्ज्ड कोक ओवन बैटरी तथा गुआ लौह अयस्क खदान विस्तार सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण एवं विचार-विमर्श किया गया। इस कार्यक्रम में प्रमुख प्रौद्योगिकी प्रदाताओं एवं बैलेंस ऑफ प्लांट पैकेज प्रदाताओं सहित कुल 17 संभावित निविदाकारों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। साथ ही, परामर्शदाता एम/एस एम एन दस्तूर के प्रतिनिधियों ने भी अपनी प्रस्तुतियाँ दीं, जिससे इस कार्यक्रम के प्रति उद्योग जगत की गहरी रुचि परिलक्षित हुई।
बैठक के दौरान तकनीकी, वाणिज्यिक एवं संविदात्मक पहलुओं पर व्यापक चर्चा की गई, जिसमें निविदा प्रक्रिया को शीघ्रता से पूर्ण करने तथा परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। संवादात्मक सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को सीधे बीएसएल की परियोजना टीम के साथ प्रश्नोत्तर एवं परियोजना के विभिन्न पहलुओं से जुडी बारीकियां समझने का अवसर मिला।
यह पहल बीएसएल की पारदर्शिता एवं दक्षता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है तथा सेल की दीर्घकालिक विकास रणनीति के अनुरूप उत्पादन क्षमता विस्तार को गति प्रदान करने के संकल्प को सुदृढ़ करती है। ब्राउनफील्ड विस्तार योजना के अंतर्गत बोकारो इस्पात संयंत्र की क्रूड स्टील उत्पादन क्षमता में 3 मिलियन टन की वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि यह विस्तार एवं संबद्ध परियोजनाएँ संयंत्र की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित करेंगी। इस उद्देश्य की प्राप्ति हेतु सभी हितधारकों के बीच समन्वय एवं तालमेल को सुदृढ़ करने की दिशा में यह आयोजन एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है, जिससे निर्धारित समयसीमा के अनुरूप परियोजनाओं का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।













