Steel Secretary’s Review Meeting: SAIL में 20% नहीं, 35% होगी कर्मचारियों की छंटनी, जबरिया रिटायरमेंट का ये प्लान, फंसे BSP अधिकारी

Steel Secretarys Review Meeting SAIL to Reduce Employee Numbers
  • परफॉर्मेंस को लेकर उच्चाधिकारियों को जमकर फटकरार लगी।
  • घंटों चली रिव्यू मीटिंग में आधुनिकीकरण और विस्तारीकरण प्रोजेक्ट और प्रोडक्शन पर खुलकर कई संदेश दिए गए हैं।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल का खर्च कम करने की मुहिम को इस्पात सचिव ने अपने हाथों में ले लिया है। प्राइवेट कंपनियों में 2 से 6 प्रतिशत तक मैनपॉवर कास्ट है। सेल में यह हद से ज्यादा है। 11 अप्रैल को भिलाई स्टील प्लांट का दौरा करने के बाद 15 अप्रैल को इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक ने बीएसपी की रिव्यू की मीटिंग की।

परफॉर्मेंस को लेकर उच्चाधिकारियों को जमकर फटकरार लगी। मैनपॉवर कम करने पर पूरी तरह से फोकस रहा। आरआइएनएल का उदाहरण तक दिया गया। स्पष्ट रूप से कहा गया कि आरआइएनएल वाले भी यही बोलते थे कि मैनपॉवर कम करना मुश्किल है। बार-बार बात को टाल रहे थे। मंत्रालय ने दो-टूक कहा कि अलग से लिस्ट हम लोग ही तैयार कर लेते हैं। उसी दिन शाम तक आरआइएनएल से मैनपॉवर कम करने की लिस्ट सामने आ गई थी। लगता है बीएसपी भी कुछ ऐसा ही चाह रहा है।

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भिलाई स्टील प्लांट के अधिकारियों को साफ शब्दों में मैसेज दिया गया है कि 35 प्रतिशत मैनपॉवर कास्ट को कम करो। पहले 20 प्रतिशत ठेका मजदूरों की छंटनी का फरमान था। अब 15 प्रतिशत और बढ़ा दिया गया है। साथ ही इस 15 प्रतिशत में नियमित कर्मचारियों का भी जिक्र है। अधिकारी भी इस अभियान से वंचित नहीं होंगे।

बरन रिटायरमेंट आदि को लेकर प्लान बनाने के साथ ही अमल करने का हुक्म दिया गया है। बीएसपी के उच्चाधिकारियों का कहना है कि 55 वर्ष की आयु के कर्मचारी या जिनकी 30 वर्ष की सेवा हो गई है, उनको लक्ष्य किया जाएगा। अक्षमता, चिकित्सा, लगातार अवकाश पर रहने वाले, भगौड़े, गैर हाजिर रहने आदि पैरामीटर को अपनाया जाएगा।

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कई घंटे तक चली रिव्यू मीटिंग में आधुनिकीकरण और विस्तारीकरण प्रोजेक्ट और प्रोडक्शन पर खुलकर कई संदेश दिए गए हैं। मीटिंग के बाद भिलाई स्टील प्लांट में भी इस मैराथन बैठक की सुगबुगाहट रही।

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कर्मचारियों का कहना है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए, क्योंकि संयंत्र में नियमित कर्मचारियों के अलावा आस-पास के ग्रामीण अंचलों से 80% ठेका श्रमिक आते हैं और यह सीधे-सीधे उनकी रोज़ी रोटी से जुड़ा हुआ मामला है। संयंत्र की स्थापना का उद्देश्य ही स्थानीय लोगों के रोजगार को मद्देनजर रखते हुए किया गया था।