8 साल पहले 4 मई 2018 को भिलाई इस्पात संयंत्र के सेक्टर-9 अस्पताल में ब्लड बैंक को बंद करने का आदेश जारी किया गया था।
- सीटू बोला-सेक्टर-9 अस्पताल के निजीकरण का विरोध आगे भी जारी रहेगा। अस्पताल लाखों श्रमिकों-परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार है।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल भिलाई स्टील प्लांट के सेक्टर 9 हॉस्पिटल पर साल 2018 में भी आफत आई थी। 8 साल पहले 4 मई 2018 को भिलाई इस्पात संयंत्र के सेक्टर-9 अस्पताल में ब्लड बैंक को बंद करने का आदेश जारी किया गया था। यह निर्णय कर्मचारियों, श्रमिकों, उनके परिवारों और आम नागरिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर सीधा प्रभाव डालने वाला था।
आदेश की जानकारी मिलते ही उसी दिन शाम 4 बजे अस्पताल के सामने सीटू के लगभग 150 सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन किया। एक माह तक चले इस आंदोलन में जनभावनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही और लोगों ने स्पष्ट संदेश दिया कि जीवन रक्षक सुविधाओं को समाप्त करने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा। कुछ उसी तरह के हालात एक बार फिर बनता दिख रहा है। अस्पताल को बिकने से बचाने के लिए सीटू ने तैयारी शुरू कर दी है।
जनसंघर्ष की ताकत दिखी थी, भिलाई से मंत्रालय तक
सीटू महासचिव टी. जोगा राव ने कहा-ब्लड बैंक को पुनः चालू करवाने के लिए आंदोलन लगातार आगे बढ़ता गया। भिलाई से रायपुर मंत्रालय तक वार्ता, ज्ञापन और विभिन्न आंदोलन आयोजित किए गए। भिलाई बंद भी सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह लड़ाई केवल एक सुविधा की बहाली तक सीमित नहीं रही, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की रक्षा का व्यापक अभियान बन गई। ट्रेड यूनियनों एवं ऑफिसर एसोसिएशन के साथ मिलकर सामाजिक संगठनों, कर्मचारियों और नागरिकों की एकजुटता ने साबित किया कि संगठित जनशक्ति गलत निर्णयों को बदल सकती है।
संयुक्त प्रयासों से मिली सफलता
इस संघर्ष में ऑफिसर्स एसोसिएशन, विभिन्न ट्रेड यूनियनों और जनसंगठनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लगातार जनदबाव और व्यापक समर्थन के परिणामस्वरूप 4 जून 2018 को ब्लड बैंक को पुनः खोलने का निर्णय लिया गया। यह केवल एक संस्थान की बहाली नहीं, बल्कि जनएकता और संघर्ष की शक्ति की महत्वपूर्ण जीत थी। सीटू नेताओं ने बताया कि वर्ष 2018 में एक माह के संघर्ष के बाद 4 जून को जब ब्लड बैंक पुनः शुरू हुआ था, उस दिन सीटू के सदस्यों ने रक्तदान किया था।
अस्पताल के निजीकरण की साजिश: आठ साल पुरानी योजना
आज आठ वर्ष बाद सेक्टर-9 अस्पताल को निजी हाथों में सौंपने की कोशिशें सामने आ रही हैं। यह दर्शाता है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को कमजोर कर निजीकरण की दिशा में बढ़ाने की सोच नई नहीं है। ब्लड बैंक को बंद करने का प्रयास भी इसी व्यापक नीति का हिस्सा था, इसलिए वर्तमान परिस्थितियों को अलग-अलग घटना के रूप में नहीं देखा जा सकता।
सेक्टर-9 ब्लड बैंक ने डेंगू में बचाई लोगों की जान
जनसंघर्ष के बाद पुनः शुरू हुआ सेक्टर-9 अस्पताल का ब्लड बैंक डेंगू महामारी के दौरान अत्यंत उपयोगी साबित हुआ। सेक्टर 9 अस्पताल सहित आसपास के अनेकों अस्पतालों में सैकड़ों मरीजों को समय पर प्लेटलेट्स उपलब्ध कराए गए। रक्तदाताओं और अस्पताल के संयुक्त प्रयासों से डेंगू के कारण लोगों की जान बचाई जा सकी, जो इसकी उल्लेखनीय उपलब्धि रही।
ये खबर भी पढ़ें: BSP Transfer Order: भिलाई इस्पात संयंत्र के महाप्रबंधक और प्राचार्य का तबादला
निजीकरण के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा
अध्यक्ष विजय कुमार जांगड़े ने कहा-सीटू हमेशा सेक्टर-9 अस्पताल के निजीकरण का विरोध किया है और आगे भी करता रहेगा। यह अस्पताल लाखों श्रमिकों और उनके परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार है। वर्ष 2018 का संघर्ष बताता है कि जनता, कर्मचारी संगठन और जनसंगठन एकजुट होकर बड़ी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा और निजीकरण के हर प्रयास का लोकतांत्रिक एवं संगठित तरीके से विरोध किया जाएगा।

