भिलाई टाउनशिप के मकानों और जमीनों पर पहला हक यहां रहने वाले वर्तमान और पूर्व बीएसपी कर्मियों का होना चाहिए।
- पूर्व मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने संभावित प्रभावों और आशंकाओं को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की।
- लैंड मोनेटाइजेशन से संबंधित किसी अंतिम निर्णय को लेकर अब तक कोई आदेश सामने नहीं आया।
- भिलाई टाउनशिप की संपत्तियों की बिक्री को लेकर केंद्र सरकार, नीति आयोग, सेल या बीएसपी बयान जारी करें।
- ‘एम्प्लॉइज फर्स्ट’ यानी कर्मचारी प्रथम नीति अपनाते हुए गाइडलाइन में संशोधन किया जाए।
- भिलाई टाउनशिप में रहने वाले परिवारों के आशियाने और भविष्य को सुरक्षित रखने की मांग।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) टाउनशिप को लेकर एक बार फिर बड़ी चिंता सामने आई है। पूर्व राज्य मंत्री और भिलाई इस्पात संयंत्र के पूर्व कर्मचारी बदरुद्दीन कुरैशी ने चेतावनी दी है कि यदि लैंड मोनेटाइजेशन नीति को मौजूदा स्वरूप में लागू किया गया तो भिलाई की पहचान, टाउनशिप की संरचना और यहां रहने वाले हजारों परिवारों का भविष्य संकट में पड़ सकता है।
उन्होंने नीति आयोग के उपाध्यक्ष और सीईओ, प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर मांग की है कि भिलाई टाउनशिप के मकानों और जमीनों पर पहला हक यहां रहने वाले वर्तमान और पूर्व बीएसपी कर्मियों का होना चाहिए।
भिलाई टाउनशिप पर मंडरा रहा बड़ा खतरा
बदरुद्दीन कुरैशी का दावा है कि केंद्र सरकार की लैंड मोनेटाइजेशन नीति के तहत सार्वजनिक उपक्रमों की अतिरिक्त जमीनों और संपत्तियों के उपयोग की नई व्यवस्था बनाई जा रही है। उनका कहना है कि इस नीति का असर भिलाई टाउनशिप पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में बीएसपी सिर्फ स्टील प्लांट संचालन तक सीमित रह सकती है। अस्पताल, स्कूल, टाउनशिप, मैत्री बाग और अन्य सामाजिक परिसंपत्तियां उसके दायरे से बाहर हो सकती हैं।
स्थानीय प्रबंधन भी खुद को असहाय महसूस कर रहा
पूर्व मंत्री ने कहा कि अब सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़ी नीतियां सीधे नीति आयोग के स्तर पर तय हो रही हैं। ऐसे में स्थानीय प्रबंधन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका सीमित होती जा रही है। उनका कहना है कि पहले प्रबंधन जरूरत के अनुसार लीज, लाइसेंस और रिटेंशन जैसी योजनाएं बनाकर कर्मचारियों को राहत देता था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।
पहला हक कर्मचारियों और निवासियों को मिले
कुरैशी ने मांग की है कि यदि टाउनशिप की जमीनों का मौद्रिकरण करना ही है तो सबसे पहले उन लोगों को मालिकाना हक दिया जाए, जो वर्षों से यहां रह रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि क्वार्टरों की जमीन को प्लॉट के आकार के अनुसार कलेक्टर गाइडलाइन या प्रचलित बाजार मूल्य पर वर्तमान निवासियों को बेच दिया जाए। इसके बाद बची हुई खाली जमीनों के बारे में सरकार निर्णय ले सकती है।
भिलाई जैसा बसा-बसाया शहर उजड़ सकता है
पूर्व मंत्री ने इसे सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि लाखों लोगों की पहचान और भविष्य का सवाल बताया है। उन्होंने कहा कि कोई भी जनप्रतिनिधि भिलाई जैसे बसे-बसाए शहर को बिखरते हुए नहीं देखना चाहेगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, सांसदों और जनप्रतिनिधियों से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की है।
हजारों परिवारों की चिंता का मुद्दा
कुरैशी ने नीति आयोग से आग्रह किया है कि इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाए। साथ ही ‘एम्प्लॉइज फर्स्ट’ यानी कर्मचारी प्रथम नीति अपनाते हुए गाइडलाइन में संशोधन किया जाए, ताकि भिलाई टाउनशिप में रहने वाले परिवारों के आशियाने और भविष्य को सुरक्षित रखा जा सके।

