इंटक, एटक, एचएमएस, ऐक्टू, सीटू,लोईमू, स्टील वर्कर्स यूनियन नेता कर्मचारियों के बीच प्रचार अभियान तेज करते हुए यूआरएम पहुंचे।
- कोरोना महामारी के दौरान देश के अधिकांश सरकारी एवं सार्वजनिक अस्पतालों ने लाखों लोगों का जीवन बचाया।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेक्टर 9 हॉस्पिटल को निजी हाथों में जाने से रोकने का आंदोलन चल रहा है। जन जागरुकता अभियान चलाया जा रहा। प्लांट से टाउनशिप और हॉस्पिटल तक संयुक्त यूनियन के नेताओं ने मोर्चा संभाल रखा है।
इंटक, एटक, एचएमएस, ऐक्टू, सीटू,लोईमू, स्टील वर्कर्स यूनियन नेता संयंत्र के अंदर कैंटीनों में एवं बाहर कर्मचारियों के बीच प्रचार अभियान तेज करते हुए यूआरएम पहुंचे। इसी के तहत अस्पताल के संदर्भ में इस्पात मंत्रालय एवं सेल कॉर्पोरेट स्तर पर लिए जा रहे निर्णय एवं दिए जा रहे निर्देशों पर कटाक्ष किया गया। कहा-सुनियोजित तरीके से यह प्रचार किया जा रहा है कि सार्वजनिक अस्पताल ही सबसे बड़ी समस्या हैं।
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किंतु वास्तविकता यह है कि यदि सार्वजनिक अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, मरीजों की अधिक भीड़, दवाइयों का अभाव या उपकरणों की कमी दिखाई देती है, तो इसका कारण सार्वजनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि वर्षों से पर्याप्त निवेश, नियमित भर्ती और आवश्यक संसाधनों की उपेक्षा है। इसका समाधान निजीकरण नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना है।
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सार्वजनिक एवं सरकारी अस्पतालों में इलाज के कुछ वास्तविक उदाहरण
1) कोरोना महामारी के दौरान देश के अधिकांश सरकारी एवं सार्वजनिक अस्पतालों ने लाखों लोगों का जीवन बचाया। भिलाई का अस्पताल इसका एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक उदाहरण है।
2) गंभीर बीमारियों के इलाज में निजी अस्पतालों के भारी-भरकम बिलों के कारण अनेक परिवार आर्थिक संकट में आ गए, जबकि सार्वजनिक अस्पतालों में कम लागत पर उपचार उपलब्ध होने से लोगों को बड़ी राहत मिली।
3) कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और गरीब परिवारों के लिए सार्वजनिक अस्पताल आज भी सबसे भरोसेमंद स्वास्थ्य व्यवस्था हैं। इसके विपरीत, अनेक निजी अस्पतालों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पहुँचते ही विभिन्न तरीकों से उनके मेडिक्लेम का अधिकतम लाभ उठाने के प्रयास किए जाने की घटनाएँ समय-समय पर सामने आती रहती हैं।
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संयुक्त ट्रेड यूनियनों की मांग
स्वास्थ्य सेवा कोई व्यापार नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। इसलिए सार्वजनिक अस्पतालों का निजीकरण तत्काल बंद किया जाए। अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों, नर्सों, तकनीशियनों तथा अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती की जाए। आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएँ तथा दवाइयों और स्वास्थ्य सुविधाओं पर सार्वजनिक निवेश बढ़ाया जाए।
मजबूत सार्वजनिक अस्पताल ही दे सकते हैं स्वस्थ समाज की गारंटी
आम जनता की संपत्ति को कॉरपोरेट मुनाफे का साधन बनाने के बजाय सार्वजनिक अस्पतालों को आधुनिक संसाधनों, पर्याप्त बजट, डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों से सशक्त किया जाना चाहिए। मजबूत सार्वजनिक अस्पताल ही स्वस्थ, सुरक्षित, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित समाज की सबसे बड़ी गारंटी हैं। इसलिए सरकार की प्राथमिकता निजीकरण नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और सुदृढ़ीकरण होना चाहिए।
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