वर्तमान बाजार मूल्य या कलेक्टर गाइडलाइन पर संबंधित आवास निवास कर रहे वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों को ही उपलब्ध कराएं।
- आवेदन में कर्मचारियों ने कहा है कि केंद्र सरकार और नीति आयोग सार्वजनिक उपक्रमों की अतिरिक्त भूमि के मौद्रिकरण की नीति पर काम कर रहे हैं।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) की ऐतिहासिक टाउनशिप को केंद्र सरकार की लैंड मोनेटाइजेशन (भूमि मौद्रिकरण) नीति से बाहर रखने की मांग तेज हो गई है। भिलाई इस्पात संयंत्र के करीब 500 वर्तमान एवं पूर्व कर्मचारियों ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी को आवेदन भेजकर टाउनशिप को इस नीति से मुक्त रखने तथा जनहित में आवश्यक संशोधन करने की मांग की है।
आवेदन में कर्मचारियों ने कहा है कि केंद्र सरकार और नीति आयोग सार्वजनिक उपक्रमों की अतिरिक्त भूमि के मौद्रिकरण की नीति पर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि इस नीति के तहत भिलाई इस्पात संयंत्र की ऐतिहासिक टाउनशिप को भी शामिल किया गया, तो इससे स्थानीय नागरिकों, वर्तमान कर्मचारियों और पूर्व इस्पात कर्मियों के बीच असुरक्षा और चिंता का माहौल पैदा हो जाएगा।
बसा-बसाया शहर उजड़ने की आशंका
वेदन में कहा गया है कि भिलाई टाउनशिप केवल आवासीय क्षेत्र नहीं, बल्कि दशकों से विकसित एक सुव्यवस्थित शहर है। यहां आवासों के अलावा अस्पताल, स्कूल, पार्क और मैत्री बाग जैसी महत्वपूर्ण सामाजिक सुविधाएं मौजूद हैं। यदि इन परिसंपत्तियों का मौद्रिकरण कर निजी हाथों में सौंपा गया, तो एक बसा-बसाया शहर प्रभावित हो सकता है। कर्मचारियों का कहना है कि इससे भौगोलिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक असर पड़ेगा।
टाउनशिप को नीति से बाहर रखने की मांग
कर्मचारियों ने नीति आयोग से आग्रह किया है कि जनहित और लाखों लोगों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए भिलाई टाउनशिप के आवासीय क्षेत्रों एवं सार्वजनिक सुविधाओं को पूरी तरह लैंड मोनेटाइजेशन की प्रक्रिया से बाहर रखा जाए। उनका कहना है कि इससे शहर की पहचान, सामाजिक संरचना और कर्मचारियों का आशियाना सुरक्षित रह सकेगा।
वैकल्पिक भूमि के उपयोग का सुझाव
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि भिलाई इस्पात संयंत्र के पास टाउनशिप और संयंत्र विस्तार क्षेत्र के अतिरिक्त भी पर्याप्त गैर-आबादी वाली भूमि उपलब्ध है। यदि भूमि मौद्रिकरण आवश्यक हो, तो ऐसी खाली और गैर-आवासीय जमीनों का उपयोग किया जाए, ताकि शहर और वहां रहने वाले लोगों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
पहले अधिकार की मांग
कर्मचारियों ने सुझाव दिया है कि यदि किसी अपरिहार्य परिस्थिति में टाउनशिप की भूमि का मौद्रिकरण करना ही पड़े, तो वर्तमान बाजार मूल्य या कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर संबंधित आवास एवं प्लॉट वहां निवास कर रहे वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों को ही उपलब्ध कराए जाएं। उनका तर्क है कि वर्षों से वहां निवास करने के कारण वे “फर्स्ट स्टेकहोल्डर्स” हैं और पहला अधिकार उनका होना चाहिए।
सकारात्मक निर्णय की उम्मीद
आवेदन के अंत में समस्त पूर्व एवं वर्तमान कर्मचारियों ने नीति आयोग से जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि इससे भिलाई की अस्मिता, शहर की पहचान और देश के इस्पात कर्मियों के आशियाने की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

