Life Insurance Corporation of India: एलआईसी में सरकार की हिस्सेदारी बिक्री की AIIEA ने कड़ी निंदा की। कुल विनिवेश 6.5% तक पहुँच सकता है।
- AIIEA ने देशभर के अपने सदस्यों और कर्मचारियों से 5 अगस्त 2026 को भोजनावकाश में प्रदर्शन करेगी।
- मई 2022 में एलआईसी के आईपीओ के माध्यम से 3.5% हिस्सेदारी बेची जा चुकी थी।
सूचनाजी न्यूज, रायपुर। आल इंडिया इंश्योरेंस एम्पलाईज एसोसिएशन (AIIEA) ने केंद्र सरकार द्वारा 3 अगस्त 2026 को घोषित ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में अपनी हिस्सेदारी और कम करने के निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा की है। एआईआईईए के अध्यक्ष धर्मराज महापात्र तथा महासचिव श्रीकांत मिश्रा ने कहा कि सरकार के इस प्रस्ताव में एलआईसी की चुकता इक्विटी का 2.5% आधार बिक्री ( बेस ऑफर ) तथा अतिरिक्त 4% ग्रीनशू विकल्प (ग्रीन शू ) शामिल है, जिससे कुल विनिवेश 6.5% तक पहुँच सकता है।
सरकार ने इस कदम को यह कहकर उचित ठहराने का प्रयास किया है कि सेबी (SEBI) के नियमों के अनुसार मई 2027 तक न्यूनतम 10% सार्वजनिक शेयरधारिता सुनिश्चित करना आवश्यक है। लेकिन यह तकनीकी अनुपालन इस बड़े सत्य को नहीं छिपा सकता कि भारत की अग्रणी वित्तीय संस्था में जनता की हिस्सेदारी का एक और भाग बाजार के हवाले किया जा रहा है। इससे पहले मई 2022 में एलआईसी के आईपीओ के माध्यम से 3.5% हिस्सेदारी बेची जा चुकी थी। यह सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता से सरकार के लगातार पीछे हटने का प्रमाण है।
AIIEA अध्यक्ष धर्मराज महापात्र और महासचिव श्रीकांत मिश्रा ने कहा कि यह नया विनिवेश सरकार की आर्थिक नीतियों के गहरे संकट को भी उजागर करता है। निवेश बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजित करने तथा टिकाऊ तरीकों से राजस्व बढ़ाने में असफल रहने के कारण सरकार अब राजकोषीय घाटे की भरपाई के लिए सार्वजनिक संपत्तियाँ बेचने पर अधिकाधिक निर्भर होती जा रही है। चालू वित्तीय वर्ष में ही सरकार सात सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के शेयर बेचकर ₹21,000 करोड़ से अधिक जुटा चुकी है। यह अपनी आर्थिक नीतियों की विफलताओं को छिपाने के लिए देश की अमूल्य सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने जैसा है।
उन्होंने कहा कि एलआईसी केवल एक लाभ कमाने वाली संस्था नहीं है, बल्कि करोड़ों पॉलिसीधारकों के विश्वास और बचत से निर्मित एक विशिष्ट राष्ट्रीय संस्था है। इसने घरेलू बचत को संगठित करने, राष्ट्र निर्माण के लिए वित्त उपलब्ध कराने तथा देश के कोने-कोने तक जीवन बीमा पहुँचाने में अतुलनीय भूमिका निभाई है। ऐसी संस्था में सार्वजनिक स्वामित्व को कमजोर करना पॉलिसीधारकों, अर्थव्यवस्था और राष्ट्र-तीनों के दीर्घकालीन हितों के विरुद्ध है।
AIIEA पुनः दोहराता है कि एलआईसी भारत के लोगों की संस्था है, शेयर बाजार की नहीं। संगठन ने कहा कि हम सरकार से आग्रह करते हैं कि प्रस्तावित OFS को तत्काल वापस लिया जाए तथा सार्वजनिक संपत्तियों के टुकड़ों-टुकड़ों में निजीकरण की नीति को त्याग दिया जाए। AIIEA सभी लोकतांत्रिक शक्तियों, ट्रेड यूनियनों, पॉलिसीधारकों और देशवासियों से अपील करते हैं कि वे एलआईसी और सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा के लिए एकजुट हों, क्योंकि ये समान विकास, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय प्रगति के लिए अपरिहार्य साधन हैं।
AIIEA ने देशभर के अपने सदस्यों और कर्मचारियों से 5 अगस्त 2026 को भोजनावकाश में प्रदर्शन आयोजित कर सरकार के इस निर्णय के विरुद्ध अपना प्रबल विरोध दर्ज कराने का आह्वान किया है। यह प्रदर्शन एलआईसी के सार्वजनिक स्वरूप की रक्षा तथा इस राष्ट्रीय संस्था में सरकारी स्वामित्व को कमजोर करने के हर प्रयास का विरोध करने के कर्मचारियों के संकल्प को पुनः व्यक्त करेगा।

