सवाल यह है कि किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार क्यों किया जा रहा है? कर्मचारी सांड के हमले में घायल हो चुका है। क्या किसी की लाश उठाकर मानेंगे…?
- फॉरेस्ट एवेन्यू की स्ट्रीट लाइट लंबे समय से बंद रहने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र और टाउनशिप की सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। बारिश के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। प्लांट के भीतर और टाउनशिप की सड़कों पर गाय-भैंस और अन्य मवेशी अक्सर सड़कों पर बैठे या घूमते नजर आ रहे हैं। इससे सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पिछले दिनों एक कर्मचारी पर सांड ने हमला कर दिया था। इस घटना में कर्मचारी के हाथ में चोट आई और उसे प्लास्टर तक लगाना पड़ा। इसके बावजूद प्लांट और टाउनशिप की सड़कों पर मवेशियों की समस्या का स्थायी समाधान होता नजर नहीं आ रहा है।
ताजा तस्वीर इस्पात भवन के सामने नवनिर्मित पीएम ट्रॉफी की है। बताया जा रहा है कि तस्वीर शाम करीब 6:15 बजे की है। तस्वीर में कई मवेशी पीएम ट्रॉफी के आसपास नजर आते हैं। यह नजारा देखकर व्यंग्यात्मक तौर पर कहा जा सकता है कि मानो गाय-भैंस भी पीएम ट्रॉफी का अवलोकन करने पहुंच गई हों। लेकिन यह स्थिति महज तस्वीर तक सीमित नहीं है। संयंत्र के भीतर भी कई जगहों पर मवेशियों के झुंड सड़कों पर बैठे और घूमते देखे जा रहे हैं।
शिकायतों के बावजूद नहीं निकल रहा स्थायी समाधान
बीएसपी कर्मचारियों ने कहा-कुछ समय पहले भी संयंत्र के भीतर मवेशियों का इसी तरह जमावड़ा हुआ था। इसको लेकर लगातार शिकायतें की गईं और मवेशियों के कारण दुर्घटनाएं होने की बात भी सामने आती रही। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
इस मामले की शिकायत उच्च स्तर तक भी पहुंचाई गई थी। इसके बाद एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाराजगी जताते हुए कथित तौर पर कहा था कि यदि उन्हें सड़क पर मवेशी दिखाई दिए तो वह स्वयं गाड़ी रोककर उन्हें सड़क से हटाएंगे। इसके बाद सुरक्षा विभाग में हलचल हुई और कुछ मवेशियों को पकड़कर संयंत्र से बाहर भी किया गया। हालांकि, मौजूदा स्थिति को देखकर लगता है कि यह अभियान स्थायी रूप से जारी नहीं रह सका।
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फॉरेस्ट एवेन्यू में बंद स्ट्रीट लाइट भी बढ़ा रही परेशानी
दूसरी ओर, फॉरेस्ट एवेन्यू की स्ट्रीट लाइट लंबे समय से बंद रहने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। रात के समय अंधेरे में सड़क पर बैठे गाय-भैंस वाहन चालकों को दिखाई नहीं देते। इससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है। एक तरफ सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा और दूसरी तरफ पर्याप्त रोशनी का अभाव, दोनों मिलकर रोड सेफ्टी के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर रहे हैं।
सेंट्रल सेफ्टी तक शिकायत, कार्रवाई का इंतजार
मवेशियों को सड़कों से हटाने को लेकर लगातार सेंट्रल सेफ्टी के स्तर पर भी शिकायतें की जा रही हैं। इसके बावजूद अब तक ऐसी कोई व्यापक मुहिम नजर नहीं आ रही है, जिससे प्लांट और टाउनशिप की सड़कों को मवेशियों से मुक्त किया जा सके।
सवाल यह है कि किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार क्यों किया जा रहा है? जब पहले ही कर्मचारी सांड के हमले में घायल हो चुका है और सड़कों पर मवेशियों की मौजूदगी लगातार बनी हुई है, तो संबंधित विभाग समय रहते ठोस कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं?
अब देखना यह है कि सड़क सुरक्षा से जुड़े अधिकारी इस समस्या पर कब गंभीरता से ध्यान देते हैं। क्या इसके लिए फिर किसी वरिष्ठ अधिकारी को सड़क पर उतरकर मवेशियों को भगाना पड़ेगा, या जिम्मेदार विभाग स्वयं पहल कर इस समस्या का स्थायी समाधान करेंगे?

