बोकारो की संयुक्त यूनियन उतरी है सड़क पर। लंबे समय से लंबित वेतन पुनरीक्षण और मजदूरों के साथ भेदभाव को लेकर नाराजगी।
- सेल प्रबंधन की अहंकारपूर्वक नकारने की नीति नहीं चलेगी-मोर्चा।
सूचनाजी न्यूज, बोकारो। सेल प्रबंधन की नीतियों के खिलाफ बोकारो स्टील प्लांट के कर्मचारी एकजुट हो चुके हैं। ट्रेड यूनियन संयुक्त मोर्चा बोकारो के सदस्य मजदूरों से संवाद करने ट्रैफिक डिपार्टमेंट का दौरा किया। इस अवसर पर उपस्थित मजदूरों को संबोधित करते हुए एटक के महामंत्री रामाश्रय प्रसाद सिंह ने कहा कि हम सेल प्रबंधन से एनजेसीएस की सभी लंबित मुद्दों के तत्काल निपटारे की मांग करते हैं। हम लंबे समय से लंबित वेतन पुनरीक्षण और मजदूरों के साथ भेदभाव को तुरंत और तेजी से खत्म करना चाहते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि वेतन समझौता 01जनवरी 2017 से देय है और प्रबंधन द्वारा मजदूरों की वैध मांगों और अच्छी तरह से स्थापित अधिकारों को अहंकारपूर्वक नकारने के कारण अंतिम समझौता अभी तक पूरा नहीं हो सका है।देरी या निपटारे न होने का मुख्य कारण सरकार द्वारा निर्धारित कई पूर्व शर्तों के साथ डीपीई दिशानिर्देशों की भ्रामक आड़ में प्रबंधन का पूरी तरह से नकारात्मक रवैया था।
प्रबंधन ने एक जनवरी 2017 से बकाया राशि के भुगतान पर कोई प्रतिबद्धता नहीं की और केवल एमओयू में उल्लेख किया कि गठित की जाने वाली उप-समिति में इस पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा यह सेल और आरआईएनएल के मजदूरों के लिए भी पूरी तरह से भेदभावपूर्ण था।
सीटू के सचिव इश्तियाक अंसारी ने कहा कि तथाकथित बहुमत के फैसले के माध्यम से प्रबंधित इस मजदूर-विरोधी एमओयू के क्रम में, प्रबंधन ग्रेच्युटी पर लंबे समय से चले आ रहे समझौते को एकतरफा बदलने के लिए और अधिक उत्साहित हो गया। बिना सीमा वाली ग्रेच्युटी की अवधारणा 2021 में एकतरफा वापस ले ली गई है।
सेल पेंशन ट्रस्ट का गठन पेंशन फंड के प्रबंधन के लिए किया गया था। लेकिन प्रबंधन ने इसके शुरू होने से पहले ही इस काम को रोक दिया और पूरे फंड को एकतरफा एनपीएस में स्थानांतरित कर दिया। कुल कोष को एनपीएस में स्थानांतरित करने के लिए कोई आम सहमति नहीं बनी, लेकिन अहंकारी प्रबंधन ने बहुसंख्यक मजदूरों की इच्छा के विरुद्ध फिर से ऐसा किया है।
उन्होंने आगे कहा कि हमने ठेका मजदूरों की नौकरी बचाने के लिए “ठेकेदार बदल सकता है लेकिन ठेका मजदूर नहीं” का नारा उठाया है। समान काम के लिए समान वेतन के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जानबूझकर उल्लंघन किया जा रहा है।सरकार ने ठेका मजदूरों का जितना संभव हो उतना शोषण करने और अधिक लाभ निकालने की चाल के साथ लेबर कोड लागू किए हैं। सेल प्रबंधन ने वर्तमान नीति शासन की जघन्य मंशा से मेल खाते हुए हर यूनिट में 40% ठेका मजदूरों को कम करने के लिए सर्कुलर जारी किए हैं। मजदूर संवाद कार्यक्रम में देव कुमार, प्राण सिंह ने भी विचार व्यक्त किए।

