कर्मचारियों से लगातार काम लिया जा रहा है, लेकिन उनकी सुविधाओं और लंबित मांगों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
- उत्पादन तो अंग्रेज भी लेते थे, लेकिन वे डरा कर लेते थे। अच्छा प्रबंधन कर्मचारी संतुष्टि से आता है, जो धरातल पर भी दिखना चाहिए।
सूचनाजी न्यूज, बोकारो। बीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ (BAKS) की विभागीय बैठक एचआरसीएफ कैंटीन में हुई। बैठक में विभाग के कर्मचारियों ने सेल स्तर, बोकारो स्टील प्लांट स्तर और विभागीय स्तर से जुड़े विभिन्न लंबित मुद्दों को यूनियन पदाधिकारियों के समक्ष रखा। कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से समस्याओं का समाधान नहीं होने के कारण उन्हें रोजमर्रा के कामकाज में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सेल कॉरपोरेट और बीएसएल प्रबंधन की तर्ज पर एचआरसीएफ प्रबंधन भी सिर्फ उत्पादन पर जोर दे रहा है। कर्मचारियों से लगातार काम लिया जा रहा है, लेकिन उनकी सुविधाओं और लंबित मांगों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
कर्मचारियों ने गिनाईं 16 लंबित समस्याएं
बैठक में कर्मचारियों ने एचआरसीएफ विभाग की कई समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। इनमें इंसेंटिव/रिवार्ड फॉर्मूले में संशोधन नहीं होना, एक्टिंग अलाउंस की राशि में संशोधन नहीं होना और बिना एक्टिंग अलाउंस के वरिष्ठ ग्रेड का कार्य कराना प्रमुख हैं।
कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर मूलभूत सुविधाओं की कमी का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि कहीं जुगाड़ वाला टीन शेड, टीन बेंच और लोहे की कुर्सियां इस्तेमाल हो रही हैं, जबकि पूल पिट में बैठकर काम करने वाले सभी कर्मचारियों के लिए पर्याप्त कुर्सियां तक उपलब्ध नहीं हैं। जर्जर शौचालय और समय पर सफाई नहीं होने की शिकायत भी की गई।
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बैठक में शॉप की क्षतिग्रस्त छत के कारण बारिश में पानी भरने, क्रेन ऑपरेटरों के लिए टूटी कुर्सियां, क्रेन के टूटे शीशे और अत्यधिक गर्मी में क्रेन परिचालन की दिक्कत का मुद्दा भी उठाया गया।
कर्मचारियों ने घटते मैनपावर के कारण बढ़ रहे कार्यभार पर चिंता जताई। उनका कहना था कि लगातार बढ़ते काम के दबाव से कर्मचारियों में तनाव की स्थिति बन रही है। रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद नॉन-फाइनेंशियल मोटिवेशनल स्कीम शुरू नहीं किए जाने और प्रोत्साहन पुरस्कार में भेदभाव का आरोप भी लगाया गया।
यूनियन सदस्यों ने आरोप लगाया कि विशेष यूनियन से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं को मनचाहे अनुभाग में पदस्थापित कर उपकृत किया जा रहा है। वहीं, विभागीय प्रबंधन के समक्ष उचित मांग रखने पर ट्रांसफर की धमकी दिए जाने की बात भी बैठक में कही गई।
इसके अलावा विभाग और अनुभाग में लगे वाटर प्यूरीफायर की मरम्मत नहीं होने तथा शटडाउन लेने और देने के लिए उचित नियम नहीं बनाए जाने का मुद्दा भी उठाया गया।
स्थानीय स्तर पर समाधान संभव : BAKS
यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि एचआरसीएफ की अधिकांश समस्याएं स्थानीय स्तर पर ही हल की जा सकती हैं। कुछ मामलों में बीएसएल के दूसरे विभागों के साथ समन्वय कर समाधान निकाला जा सकता है। इसके बावजूद समस्याओं का लंबित रहना कर्मचारियों में असंतोष बढ़ा रहा है। बैठक में यूनियन के महासचिव हरिओम, कोषाध्यक्ष राहुल साव, HSM विभागीय प्रतिनिधि शत्रुंजय सिंह सहित यूनियन के सदस्य मौजूद रहे।
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एचआरसीएफ विभाग के कार्मिकों के लंबित मुद्दे
1. इंसेंटिव/रिवार्ड फॉर्मूले में संशोधन नहीं होना।
2. एक्टिंग अलाउंस की राशि में संशोधन नहीं होना तथा बिना एक्टिंग अलाउंस के वरिष्ठ ग्रेड का कार्य कराना।
3. कर्मचारियों के लिए जुगाड़ वाला टीन शेड, टीन बेंच, लोहे की जुगाड़ वाली कुर्सियां आदि उपलब्ध होना।
4. सभी पूल पिट में बैठकर कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए पर्याप्त कुर्सियां उपलब्ध नहीं कराना।
5. शौचालय जर्जर स्थिति में होना तथा समय पर उसकी सफाई नहीं कराना।
6. कार्यरत कर्मचारियों के प्रति अधिकारियों का रूखा एवं शोषणकारी व्यवहार होना।
7. शॉप की छत क्षतिग्रस्त होना, जिससे बरसात के दिनों में पानी भरने की समस्या उत्पन्न होना।
8. क्रेन ऑपरेटरों के लिए क्रेन में टूटी हुई कुर्सियां होना।
9. क्रेन के शीशे टूटे होना तथा अत्यधिक गर्मी में क्रेन का परिचालन करने में कठिनाई होना।
10. घटते मैनपावर के कारण कर्मियों पर कार्यभार बढ़ना, जिससे अधिकतर कर्मचारियों में मानसिक तनाव की स्थिति उत्पन्न होना।
11. रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद नॉन-फाइनेंशियल मोटिवेशनल स्कीम शुरू नहीं करना।
12. प्रोत्साहन पुरस्कार देने में भेदभाव करना।
13. एक विशेष यूनियन के कुछ कार्यकर्ताओं को मनचाहे अनुभाग में पदस्थापित कर उपकृत करना।
14. विभागीय प्रबंधन के समक्ष उचित मांगें रखने पर ट्रांसफर की धमकी देना।
15. विभाग/अनुभाग में लगे वाटर प्यूरीफायर की मरम्मत नहीं होना।
16. शटडाउन लेने/देने के लिए कोई उचित नियम नहीं बनाना।
‘पदनाम से नहीं, प्रबंधकीय दक्षता से दिखता है प्रबंधन’
BAKS के HRCF विभागीय प्रतिनिधि संजीत सिंह ने प्रबंधन पर निशाना साधते हुए कहा, “पदनाम में प्रबंधक लगा लेने से प्रबंधन का गुण नहीं आ जाता, बल्कि प्रबंधकीय दक्षता दिखाना भी जरूरी होता है। उत्पादन तो अंग्रेज भी लेते थे, लेकिन वे डरा कर लेते थे। अच्छा प्रबंधन कर्मचारी संतुष्टि से आता है, जो धरातल पर भी दिखना चाहिए।”








