स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने BSP प्रबंधन से पूछा-क्या अब सामाजिक जिम्मेदारी भी बच्चों की फीस से पूरी होगी?
- पहले सुविधा, अब वसूली, नीति बदली या नियत जवाब दो?
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा संचालित स्कूलों में अध्ययनरत SC/ST कर्मचारियों के बच्चों से अगस्त माह से ₹884 ट्यूशन फीस वसूली शुरू करने के फैसले पर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), दुर्ग जिला इकाई ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। SFI ने BSP प्रबंधन पर तीखा कटाक्ष करते हुए सवाल किया है कि क्या संयंत्र प्रबंधन की आर्थिक गणित अब इतनी कमजोर हो गई है कि शिक्षा विभाग का खर्च निकालने के लिए भी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बच्चों की जेब देखनी पड़ रही है?
दशकों तक मुफ्त शिक्षा दी, अब अचानक बच्चों से वसूली क्यों?
SFI ने कहा कि जिन SC/ST बच्चों से वर्षों तक ट्यूशन फीस नहीं ली गई, उनसे अचानक ₹884 की वसूली शुरू करने का फैसला कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि बच्चों को वर्षों तक फीस से छूट देना गलत था तो इतने वर्षों तक प्रबंधन सोया क्यों रहा? और यदि वह व्यवस्था सही थी तो अब अचानक उसमें बदलाव किसके इशारे पर किया गया?
क्या BSP की शिक्षा नीति बदल गई है या सामाजिक जिम्मेदारी से पीछा छुड़ाने की तैयारी है? SFI ने मांग की है कि प्रबंधन इस निर्णय का नियम, आधार और नीति सार्वजनिक करे तथा अगस्त माह से वेतन से काटी गई पूरी राशि तत्काल वापस करे।
BSP के मुनाफे का बोझ अब SC/ST बच्चों के कंधों पर डालने की तैयारी?
SFI ने व्यंग्य करते हुए कहा कि क्या संयंत्र को लाभ में लाने की नई रणनीति अब इतनी नीचे पहुंच गई है कि उसकी शुरुआत SC/ST बच्चों से ₹884 वसूलने से की जा रही है? यदि यही BSP की आर्थिक नीति है तो कल शिक्षा, अस्पताल और अन्य सामाजिक सुविधाओं के लिए भी क्या बच्चों और मरीजों की जेब को ही प्रबंधन का सबसे आसान रास्ता माना जाएगा?
SFI ने कहा कि शिक्षा कोई ऐसा खर्च नहीं है जिसे केवल घाटे-मुनाफे की तराजू पर तौला जाए। बच्चों की शिक्षा पर खर्च BSP की कमजोरी नहीं, बल्कि भिलाई के भविष्य में निवेश है।
27 से अधिक स्कूलों की विरासत अब फीस वसूली तक सिमट जाएगी?
कभी BSP के 27 से अधिक स्कूल भिलाई की शिक्षा व्यवस्था की पहचान हुआ करते थे और हजारों बच्चे इन संस्थानों में पढ़ते थे। SFI ने कहा कि स्कूलों को धीरे-धीरे सीमित करना, सुविधाओं और संसाधनों को कम करना और अब SC/ST बच्चों से फीस वसूलना—क्या ये सब शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के कदम हैं या धीरे-धीरे BSP की सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था से हाथ खींचने की रणनीति?
DEO जगजीत सिंह धीर से SFI प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के प्रतिनिधिमंडल ने जिला शिक्षा अधिकारी, दुर्ग जगजीत सिंह धीर से मुलाकात कर उन्हें पत्र सौंपा और इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अविलंब हस्तक्षेप करने की बात कही।
इसके पश्चात SFI ने सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास शाखा, दुर्ग जिला को भी पत्र देकर कार्रवाई की मांग की। पत्र की प्रतिलिपि राज्य अनुसूचित जाति आयोग, राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को भी भेजी गई है।
बच्चों की फीस से सामाजिक जिम्मेदारी नहीं चलेगी
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) दुर्ग जिला की अर्चना ध्रुव ने कहा कि SC/ST बच्चों से ट्यूशन फीस वसूली का निर्णय वापस होने तक विरोध जारी रहेगा। संगठन ने मांग की है कि काटी गई ₹884 की राशि वापस की जाए, भविष्य में ऐसी फीस वसूली बंद की जाए तथा BSP स्कूलों को बंद या कमजोर करने के बजाय पर्याप्त शिक्षक, संसाधन और बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
SFI ने कहा कि जिस भिलाई को BSP ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुविधाओं के माध्यम से बनाया, उसी भिलाई के बच्चों से अब सुविधाओं की कीमत वसूलना सामाजिक जिम्मेदारी से पीछे हटने का संकेत है। शिक्षा को मुनाफे का हिसाब-किताब बनाने की किसी भी कोशिश का SFI पुरजोर विरोध करेगा।
