काले झंडे के साथ 6 अक्टूबर को मौन जुलूस और उसके बाद आमरण अनशन के लिए बीएसएल कर्मचारियों से पूरी तैयारी का आह्वान।
- बीएकेएस बोला-गैर निर्वाचित नेताओं के द्वारा किए गए अवैध बोनस समझौता का हम पुर जोर विरोध करते हैं।
सूचनाजी न्यूज, बोकारो। सेल बोनस तय होने के बाद भी कर्मचारी खुश नहीं है। BAKS बोकारो महासचिव हरिओम का कहना है कि सबसे पहला प्रश्न तो हस्ताक्षर करने वाले वीरों के वीर महावीर नेताओं से की ऐसी कौन सी मजबूरी आन पड़ी थी की आपको 32000 की मामूली सी राशि को बोनस के रूप में स्वीकार करना पड़ा। दूसरी कि जब BAKS के जैसी संगठन जमीन पर उतरकर पुरजोर संघर्ष कर रही है तथा बोनस फार्मूले में बिना बदलाव किए बोनस देने की स्थिति में चरण बद्ध आंदोलन के घोषणा कर रखी है। कर भी रही है। वैसे में ऐसी कौन सी विवशता थी जिस विवशता में आकर के आप लोगों ने इस समझौते को स्वीकार किया?
हरिओम ने कहा-यह आज सेल का प्रत्येक कर्मचारी पूछ रहा है? समझौते को स्वीकार करने वाले वैसे सभी नेता जिन्हें बर्नपुर में मुश्किल से एक परसेंट वोट भी प्राप्त नहीं हुए फिर भी आपने हस्ताक्षर करने का हिम्मत किया यह तो समझ आता है,जिनकी जमीन पर कोई पूछने वाला नहीं वो तो कुछ भी कर सकता है। आपके कृत्यों की जितनी निंदा की जाए वह कम है, तथा बर्नपुर में बड़े-बड़े वादे कर बहुमत प्राप्त करने वाली यूनियन तथा उसके गैर निर्वाचित नेता जो दिल्ली में जाकर हस्ताक्षर करने में इतनी आतुरता दिखाएं और हस्ताक्षर किया।
क्या आप लोगों को उत्पादकता, उत्पादन, लाभप्रदता, आगामी होने वाले लाभ के संभावनाओं जैसे विषयों से कोई संबंध है क्या? आप सभी (हस्ताक्षर करने वालों को) इस महंगाई के दौर में ₹32000 की चूर्ण सी राशि को बोनस कहने में शर्म नहीं आ रही? क्या आप सभी ने निर्लजता की सारी सीमाएं पार कर रखा है?
महासचिव ने कहा-10 में से तीन तो कार्यरत कर्मचारी थे। कार्यरत कर्मचारियों को तो कम से कम इसका विरोध करना था न। 10 में से चार तो बोकारो से ही थे। जहां जमीनी संघर्ष पिछले 10 दिनों से जारी है, उसके बाद भी आप सभी को कार्यरत कर्मचारियों की भावनाएं नहीं समझ आई? आप सब कब तक हमें ऐसे ही हम सभी को ठगते रहोगे? प्रबंधन के द्वारा लिखी गई पठकथा के अनुसार कब तक हमारे पेट पर लात मारते रहोगे?
अंत में हरिओम ने कहा-इस अवैध बोनस समझौता का हम पूर्ण विरोध करते हैं। अपने यूनियन द्वारा पूर्व निर्धारित काला झंडा के साथ 6 अक्टूबर को मौन जुलूस तथा उसके बाद आमरण अनशन के लिए अपने साथियों से पूरी तैयारी का आह्वान करते हैं।
