बीएकेएस की आमसभा में कर्मचारियों ने उठाए सवाल, यूनियन ने दिया जवाब; 6 अक्टूबर को काला झंडा लेकर मौन जुलूस का ऐलान।
- NJCS की वर्तमान व्यवस्था और उसमें निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी सुधार की आवश्यकता है।
सूचनाजी न्यूज, बोकारो। बीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ (बीएकेएस) की आमसभा रविवार को सेक्टर-2 स्थित कला केंद्र में आयोजित की गई। सभा में बड़ी संख्या में बीएसएल के नियमित कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान कर्मचारियों ने यूनियन पदाधिकारियों के समक्ष विभिन्न मुद्दे और सवाल रखे, जिनका पदाधिकारियों ने जवाब देकर सदस्यों की शंकाओं को दूर करने का प्रयास किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता यूनियन अध्यक्ष दिलीप कुमार ने की, जबकि मंच संचालन उप महासचिव माणिक राम मुंडा ने किया। कोषाध्यक्ष राहुल प्रसाद साव ने यूनियन का वार्षिक लेखा-जोखा तथा आय-व्यय का विवरण सदस्यों के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसे सभा ने मंजूरी दी।
सेल और बीएसएल के लंबित मुद्दों पर हर स्तर पर लड़ाई
सभा को संबोधित करते हुए महासचिव हरिओम ने कहा कि बीएकेएस सेल कॉर्पोरेट और बीएसएल स्तर के लंबित मुद्दों को लेकर अलग-अलग मंचों पर संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन “पेपर से लेकर कोर्ट तक और सड़क से लेकर संयंत्र तक” कर्मचारियों के मुद्दों को उठाने का प्रयास कर रहा है।
हरिओम ने आरोप लगाया कि सेल कर्मचारियों से जुड़े कई मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं। उनके अनुसार, संगठन को सेल प्रबंधन के साथ-साथ इस्पात मंत्रालय और सरकार की नीतियों के खिलाफ भी अपनी आवाज उठानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के मुद्दों को लेकर स्थिति ऐसी बन गई है कि उन्हें अपने ही प्रबंधन के विरुद्ध कई मामलों में न्यायालय की शरण लेनी पड़ रही है।
वेज रिवीजन से लेकर बोनस और पे-स्केल तक उठाए सवाल
हरिओम ने वेज रिवीजन में NJCS संविधान के कथित उल्लंघन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि MGB, एरियर और पर्क्स प्रतिशत को लेकर भी कर्मचारियों के बीच असमानता रही है। उन्होंने भिलाई इस्पात संयंत्र में इंटक के कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाया और आरोप लगाया कि इसके बावजूद संबंधित हस्ताक्षर के आधार पर एमओयू लागू किया गया।
उन्होंने बोनस फॉर्मूला, रात्रि पाली भत्ता, पे-स्केल, ग्रेच्युटी, पेंशन और CTC बैठक समेत कई मुद्दों पर भी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
हरिओम ने कहा कि सेल कॉर्पोरेट स्तर पर 45 से अधिक मुद्दे लंबित बताए जा रहे हैं, जबकि बीएसएल स्तर पर भी 60 से अधिक मामले लंबित हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सेल और बीएसएल के शीर्ष स्तर पर इतने अधिकारी मौजूद हैं, तो कर्मचारियों से जुड़े इतने मुद्दे लंबे समय से लंबित क्यों हैं।
गैर-निर्वाचित प्रतिनिधित्व पर भी सवाल
महासचिव ने बीएसएल और सेल प्रबंधन के साथ होने वाले समझौतों में कर्मचारियों के वास्तविक प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि संगठन इस बात को लेकर भी संघर्ष कर रहा है कि कर्मचारियों की ओर से समझौते करने का अधिकार किसे और किस प्रक्रिया के तहत मिलना चाहिए।
दिलीप कुमार बोले-NJCS की व्यवस्था में बदलाव जरूरी
सभा को संबोधित करते हुए अध्यक्ष दिलीप कुमार ने कहा कि श्रमिकों की समस्याओं के लिए केवल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। NJCS की वर्तमान व्यवस्था और उसमें निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी सुधार की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि कई महत्वपूर्ण विषय लंबे समय से लंबित हैं। NJCS में आवश्यक बदलाव को लेकर बीएकेएस की ओर से न्यायालय में कानूनी लड़ाई जारी है और संगठन श्रमिक हित में इस प्रयास को आगे भी मजबूती से जारी रखेगा। दिलीप कुमार ने कहा कि श्रमिकों के अधिकार, सम्मान और सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर बीएकेएस संवाद का रास्ता भी अपनाएगा और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन भी जारी रखेगा।
6 अक्टूबर को काला झंडा लेकर मौन जुलूस
सभा में आगामी आंदोलन को लेकर भी चर्चा हुई। यूनियन की ओर से 6 अक्टूबर को काला झंडा लेकर मौन जुलूस निकालने की घोषणा की गई। यूनियन ने कर्मचारियों से इसमें भाग लेने की अपील की है। सभा को उपाध्यक्ष कृष्ण रजवार, उप महासचिव माणिक मुंडा, कोषाध्यक्ष राहुल साव और उप कोषाध्यक्ष देवेंद्र ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यसमिति के सदस्य शत्रुंजय, त्रिवेणी, लीलू, चुन्नी सिस्टर, अमित, सोमेश सहित अन्य पदाधिकारियों और सदस्यों ने योगदान दिया।
