निलंबन की कार्रवाई से नाराज कुछ कार्मिकों ने डायरेक्टर इंचार्ज (DIC) के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की बात कही है।
- सोमवार को करीब आधा दर्जन लोग बयान दर्ज कराने भिलाई निवास पहुंचे।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल-भिलाई स्टील प्लांट (BSP) में स्क्रैप चोरी के मामले में विभागीय जांच का सिलसिला जारी है। पिछले कई दिनों से मामले से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों और अन्य लोगों से पूछताछ की जा रही है। सोमवार को भिलाई निवास में विजिलेंस टीम ने विभागीय जांच के तहत सस्पेंड किए गए अधिकारी-कर्मचारियों के करीबियों के बयान भी दर्ज किए।
बताया जा रहा है कि विभागीय जांच के दौरान तीनों कार्मिकों से उनके संबंधित विभागों में काम करने वाले कुछ लोगों के नाम मांगे गए थे, ताकि उनके बयान दर्ज किए जा सकें। कार्यस्थल पर संबंधित कार्मिकों के व्यवहार, कार्यप्रणाली और उनके साथ काम करने वाले कर्मचारियों की जानकारी जांच का हिस्सा बताई जा रही है।
सोमवार को करीब आधा दर्जन लोग बयान दर्ज कराने भिलाई निवास पहुंचे। हालांकि, कुछ लोगों को अनुमति नहीं मिल सकी। जानकारी के मुताबिक, एक सेवानिवृत्त कार्मिक को भी बयान के लिए अनुमति नहीं दी गई। कर्मचारी के समर्थन में कुछ ट्रेड यूनियन नेता भी भिलाई निवास पहुंचे।
निलंबन को लेकर कार्मिकों में नाराजगी
मामले में विभागीय जांच के बीच निलंबित कार्मिकों और उनके करीबियों में प्रबंधन के निर्णय को लेकर नाराजगी है। उनका कहना है कि पुलिस जांच और विभागीय जांच पूरी होने से पहले ही निलंबन की कार्रवाई कर दी गई।
बयान देने के बाद बाहर आए कुछ कार्मिकों ने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने दबाव में आकर निलंबन की कार्रवाई की। उनका कहना है कि जिस ठेका कंपनी को स्क्रैप हटाने की जिम्मेदारी दी गई थी, उसके कर्मचारियों पर भी जांच का दायरा होना चाहिए।
कार्मिकों का दावा है कि कथित तौर पर स्क्रैप हटाने की गतिविधियां रात के समय हुईं, जबकि जिन अधिकारियों-कर्मचारियों को निलंबित किया गया, वे सामान्यतः जनरल शिफ्ट में ड्यूटी करते थे। उन्होंने सवाल उठाया कि विभागीय जांच पूरी होने और तथ्यों की स्पष्टता से पहले निलंबन की कार्रवाई क्यों की गई?
हाईकोर्ट से जमानत के बाद विभागीय जांच जारी
इस मामले में BSP प्रबंधन ने स्टील मेल्टिंग शॉप-3 के जीएम हिमांशु मलिक, कर्मचारी मनोज देवांगन और असिस्टेंट मैनेजर वर्मा को निलंबित किया था। मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया था। बाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वे बाहर आए। अब विभागीय स्तर पर अलग से जांच चल रही है। इसी जांच के तहत विजिलेंस टीम संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों और उनके संपर्क में रहने वाले लोगों के बयान दर्ज कर रही है।
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जीएम ने पुलिस को साक्ष्य दिए, फिर उन्हीं पर कार्रवाई क्यों?
निलंबित कार्मिकों के समर्थन में पहुंचे लोगों ने कहा कि जीएम हिमांशु मलिक ने ही पुलिस को मामले से जुड़े साक्ष्य उपलब्ध कराए थे। इसके बावजूद उन्हें ही मामले में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी से पहले ही निलंबित कर दिया गया। उनका कहना है कि विभागीय जांच की रिपोर्ट आने तक प्रबंधन को इंतजार करना चाहिए था। कार्मिकों ने निलंबन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं है।
हालांकि, यह पक्ष संबंधित कार्मिकों और उनके समर्थकों की ओर से रखा गया है। मामले में विभागीय जांच अभी जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि स्क्रैप चोरी की घटना में किसकी क्या भूमिका थी।
डीआईसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी का दावा
निलंबन की कार्रवाई से नाराज कुछ कार्मिकों ने डायरेक्टर इंचार्ज (DIC) के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की बात कही है। उनका कहना है कि वे निलंबन के फैसले और उससे जुड़े अन्य पहलुओं को लेकर अदालत का रुख कर सकते हैं। फिलहाल विभागीय जांच जारी है। विजिलेंस टीम द्वारा दर्ज किए जा रहे बयान और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर जांच में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
