SAIL Mobile Reimbursement Policy: सेल कार्मिक छोड़ें BSNL का साथ, सिम पोर्ट कराने पर ₹3,000 तक रीइंबर्समेंट
SAIL कार्मिकों के मोबाइल-ब्रॉडबैंड बिल का पैसा देगी कंपनी, ग्रेड के हिसाब से ₹700 से ₹3,000 तक मासिक रीइंबर्समेंट। SAIL कारपोरेट आफिस के बाद अब Ranchi की नई मोबाइल-टेलीफोन रीइंबर्समेंट पॉलिसी लागू।
सूचनाजी न्यूज, रांची। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) कार्मिकों के लिए अच्छी खबर है। बीएसएनएल के खराब नेटवर्क से छुटकारा पाने का आदेश जारी हो गया है। अब आप अपने मन-पसंद के नेटवर्क में बीएसएनएल सिम पोर्ट करा सकते हैं। पुराने नंबर को ही जारी रखना होगा। इसका जो खर्च आएगा, हर माह कंपनी भुगतान करेगी। प्रतिपूर्ति राशि तय कर दी गई है। सेल कारपोरेट आफिस के बाद रांची यूनिट ने आदेश जारी किया है। सेफी चेयरमैन एनके बंछोर का कहना है कि पिछली मीटिंग में सेल प्रबंधन ने मांग को स्वीकार किया था। अब बारी-बारी से सभी जगह सर्कुलर जारी होंगे।
रांची स्थित सेल कार्यालयों में कार्यरत कार्मिकों के लिए मोबाइल, टेलीफोन और ब्रॉडबैंड खर्च की प्रतिपूर्ति को लेकर नई व्यवस्था लागू की गई है। अब मोबाइल फोन के बिल के साथ घर के लैंडलाइन, ब्रॉडबैंड, फाइबर और डेटा कनेक्शन का खर्च भी एक ही निर्धारित सीमा के भीतर रीइंबर्स कराया जा सकेगा। ग्रेड के अनुसार यह सीमा ₹700 से लेकर ₹3,000 प्रति माह तक निर्धारित की गई है।
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कॉमन यूजर ग्रुप (CUG) मोबाइल सुविधा बंद
SAIL Units Ranchi की ओर से 14 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में संशोधित कंपोजिट मोबाइल/टेलीफोन रीइंबर्समेंट पॉलिसी का सर्कुलर जारी किया गया है। यह व्यवस्था पहले मोबाइल और आवासीय लैंडलाइन के लिए अलग-अलग लागू प्रतिपूर्ति प्रावधानों की जगह लाई गई है। कंपनी के रांची कार्यालय में कॉमन यूजर ग्रुप (CUG) मोबाइल सुविधा बंद किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है।
किस ग्रेड को कितना मिलेगा पैसा
E0: ₹700
E1–E2: ₹750
E3–E4: ₹800
E5–E6: ₹1,100
E7: ₹2,000
E8: ₹2,200
E9: ₹3,000
ध्यान देने वाली बात यह है कि ये अधिकतम सीमाएं हैं, निश्चित नकद भत्ता नहीं। कार्मिक ने जितना पात्र खर्च किया है, प्रतिपूर्ति उसी के अनुसार होगी। खर्च निर्धारित सीमा से कम होने पर वास्तविक खर्च की राशि ही मिलेगी।
एक लैंडलाइन और दो मोबाइल कनेक्शन तक का खर्च शामिल
संशोधित पॉलिसी के तहत एक आवासीय लैंडलाइन कनेक्शन के साथ ब्रॉडबैंड, फाइबर या डेटा सेवा और अधिकतम दो मोबाइल कनेक्शनों का खर्च शामिल किया जा सकता है। इन सभी कनेक्शनों पर होने वाला पात्र खर्च संबंधित ग्रेड की एक संयुक्त मासिक सीमा के भीतर ही रीइंबर्स किया जाएगा। यानी मोबाइल और घर के इंटरनेट बिल के लिए अलग-अलग अधिकतम सीमाओं के बजाय अब दोनों को मिलाकर निर्धारित कंपोजिट सीलिंग लागू होगी।
हर महीने के बिल का अगले महीने करना होगा दावा
नई पॉलिसी में रीइंबर्समेंट के लिए सेल्फ-डिक्लेरेशन की व्यवस्था रखी गई है। वित्त एवं लेखा (F&A) विभाग HRMS या ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से दावों की प्रक्रिया पूरी करेगा। किसी महीने के खर्च की प्रतिपूर्ति का दावा उसके अगले महीने में करना होगा। यदि प्रीपेड या पोस्टपेड प्लान कई महीनों के लिए है, तो संबंधित महीने के अनुपात में आने वाला खर्च ही दावा किया जा सकेगा। दावे में प्रत्येक कनेक्शन पर हुए खर्च का अलग-अलग विवरण देना होगा। कार्मिकों को संबंधित बिलों की प्रतियां तीन साल तक सुरक्षित रखनी होंगी, ताकि जरूरत पड़ने पर सत्यापन किया जा सके।
अपनी पसंद की टेलीकॉम कंपनी चुनने की छूट
कर्मचारी अपनी पसंद के नेटवर्क या सेवा प्रदाता का चयन कर सकते हैं। हालांकि, घोषित फोन नंबरों पर उपलब्ध रहना होगा। घोषित मोबाइल नंबर बदलने की स्थिति में निर्धारित ऑनलाइन मॉड्यूल के जरिए नया नंबर अपडेट किया जा सकेगा।
प्लांट सेंटरों में CUG सुविधा छोड़ने के बाद मिलेगा लाभ
सर्कुलर के मुताबिक, प्लांट सेंटरों और सब-सेंटरों में तैनात कर्मचारी इस योजना का लाभ तभी ले सकेंगे, जब वे अपने संबंधित प्लांट से मिली मौजूदा CUG सुविधा को सरेंडर कर दें या वह सुविधा बंद हो जाए। इसका उद्देश्य CUG और नई प्रतिपूर्ति सुविधा का एक साथ लाभ लेने की स्थिति से बचना है।
1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी मानी जाएगी पॉलिसी
सर्कुलर में संशोधित योजना को 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी बताया गया है। इसके तहत पुराने मोबाइल और आवासीय लैंडलाइन रीइंबर्समेंट संबंधी निर्देशों को निर्धारित सीमा तक प्रतिस्थापित किया जाएगा।
नई व्यवस्था से SAIL के रांची कार्यालय में पात्र कार्मिकों को मोबाइल तथा घरेलू इंटरनेट खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए एकीकृत प्रक्रिया मिलेगी। हालांकि, लाभ लेने से पहले HRMS में कनेक्शन का विवरण दर्ज करने, पात्र खर्च के बिल सुरक्षित रखने और निर्धारित समय पर दावा करने की शर्तों का पालन करना होगा।