बारिश में भी CITU का गुस्सा न हो सका ठंडा, बोनस फार्मूला तत्काल रद्द करने और बकाया एरियर पर निकला भड़ास

खराब मौसम और भारी बारिश में भी कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन, हुमत नहीं, मजदूर हित सर्वोपरि होना चाहिए। सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल बोनस, बकाया एरियर आदि विषयों को लेकर हिंदुस्तान स्टील एम्प्लाइज यूनियन (सीटू) के सदस्य बारिश में भी नहीं रुके। प्रबंधन के खिलाफ कर्मचारियों के हक में भींगते हुए नारेबाजी

  • खराब मौसम और भारी बारिश में भी कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन, हुमत नहीं, मजदूर हित सर्वोपरि होना चाहिए।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल बोनस, बकाया एरियर आदि विषयों को लेकर हिंदुस्तान स्टील एम्प्लाइज यूनियन (सीटू) के सदस्य बारिश में भी नहीं रुके। प्रबंधन के खिलाफ कर्मचारियों के हक में भींगते हुए नारेबाजी करते रहे। हाथों में झंडा और जुबां पर बकाया एरियर और बोनस की बात रही। सीटू के नेतृत्व में 25 सितंबर बोरिया गेट में आयोजित प्रदर्शन में कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि NJCS की बैठकों को केवल “बहुमत का खेल” बनाकर मजदूरों के हितों की बलि देना अब स्वीकार नहीं किया जाएगा। वर्षों से चली आ रही सहमति और संवाद की परंपरा को दरकिनार कर ऐसे निर्णय लिए गए जिनका खामियाजा आज स्टील कर्मी भुगत रहे हैं। प्रदर्शन के बाद सेल प्रबंधन को संबोधित मांग पत्र बीएसपी आइआर विभाग को सौंपा गया। ये खबर भी पढ़ें: SAIL ISP Election Results: बीएमएस को 66.49% वोट, इंटक, CITU, HMS, एटक औंधे मुंह गिरे, जीत के 4 कारण हिमांशु बल की ज़ुबानी 39 माह का एरियर और अधूरा वेतन समझौता महासचिव टी. जोगा राव ने कहा- जनवरी 2017 से देय वेतन समझौते को लेकर कर्मचारियों ने लंबा संघर्ष किया, हड़तालें कीं और आंदोलन किए। इसके बावजूद हुए MoU में 39 माह के बेसिक एवं DA के एरियर्स का समाधान नहीं हुआ। HRA, अतिरिक्त इंक्रीमेंट, S-11 के बाद S-12 ग्रेड तथा अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे आज भी लंबित हैं। यदि मेमोरेंडम का अंडरस्टैंडिंग के बाद भी कर्मचारियों के मूल प्रश्न अनुत्तरित हैं, तो यह स्पष्ट संकेत है कि वेतन समझौता अभी पूर्ण नहीं हुआ है और उस पर पुनः सार्थक चर्चा आवश्यक है। ये खबर भी पढ़ें: SAIL ISP Burnpur Union Election Result: 107 साल में पहली बार चुनाव, BMS बनी पहली मान्यता प्राप्त यूनियन मजदूर विरोधी बोनस फार्मूला तत्काल रद्द हो 23 मार्च 2023 को लागू बोनस फार्मूले को लेकर शुरू से ही गंभीर आपत्तियां उठाई गई थीं। सीटू और एटक ने इस फार्मूले पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। अब वे संगठन भी, जिन्होंने इस पर हस्ताक्षर किए थे, इसके दुष्परिणाम समझने के बाद विरोध दर्ज करा रहे हैं। इसके बावजूद प्रबंधन द्वारा उसी फार्मूले को बनाए रखने का प्रयास कर्मचारियों में असंतोष पैदा कर रहा है। अक्टूबर में दिए जाने वाले बोनस पर तत्काल यूनियनों के साथ चर्चा कर सम्मानजनक राशि सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा मजदूर विरोधी फार्मूले को वापस लेकर नए सिरे से सहमति आधारित व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। ये खबर भी पढ़ें: Ferro Scrap Nigam: कर्मचारियों को 25 हजार बोनस, रेगुलर कर्मी पाएंगे चांदी का 50 ग्राम और ठेका मजदूर 20 ग्राम सिक्का 10 वर्ष का वेतन समझौता और MGB का प्रश्न सीटू लगातार 5 वर्ष की वेतन समझौता अवधि का पक्षधर रहा है। लेकिन 10 वर्ष की अवधि, कम Minimum Guaranteed Benefit (MGB), रात्रि पाली भत्ता तथा अन्य मुद्दों पर बार-बार बहुमत के आधार पर निर्णय थोपे गए। परिणाम यह हुआ कि कर्मचारियों की वास्तविक आर्थिक अपेक्षाओं और समझौते के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया। यदि किसी निर्णय से व्यापक असंतोष उत्पन्न हो रहा है, तो उसकी समीक्षा लोकतांत्रिक और औद्योगिक दोनों दृष्टियों से आवश्यक है। ये खबर भी पढ़ें: SAIL 54th AGM Highlights: वंदे भारत के पहियों से नौसेना के 5 युद्धपोतों तक पहुंचा सेल का स्टील, पहली बार ₹1.09 लाख करोड़ से ज्यादा राजस्व, ये लाभांश स्थायी और ठेका कर्मियों के साथ समान न्याय प्रदर्शन में यह मांग भी प्रमुखता से उठाई गई कि SAIL एवं RINL के ठेका कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन, रोजगार सुरक्षा और कम से कम 20 प्रतिशत वार्षिक बोनस सुनिश्चित किया जाए। “ठेकेदार बदल सकता है, लेकिन ठेका कर्मचारी नहीं” के सिद्धांत को व्यवहार में लागू किया जाए। साथ ही नियमित कार्यों के बढ़ते आउटसोर्सिंग, ठेका कर्मियों की संख्या में कटौती तथा रोजगार असुरक्षा पर रोक लगाई जाए। ये खबर भी पढ़ें: बैंक हड़ताल: 28 से 30 सितंबर तक स्ट्राइक, SBI ने पहले निपटा लेने को कहा जरूरी काम संवाद से समाधान निकाले प्रबंधन प्रदर्शनकारियों ने प्रबंधन से मांग की कि 39 माह का एरियर, बोनस फार्मूला, अतिरिक्त इंक्रीमेंट, HRA, S-12 ग्रेड सहित अन्य लंबित मुद्दों पर तत्काल द्विपक्षीय वार्ता शुरू की जाए। कर्मचारियों की आवाज को बहुमत की औपचारिकता के पीछे दबाने के बजाय वास्तविक समाधान खोजा जाए। मजदूरों का धैर्य उनकी कमजोरी नहीं है। सम्मानजनक वेतन, न्यायपूर्ण बोनस और सुरक्षित रोजगार उनका अधिकार है, और इन अधिकारों की प्राप्ति के लिए संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।