- सिंटर प्लांट 3 के मशीन 2 में नोडुलाइज़र बाय-पास च्यूट एवं फ्लैप गेट का सफल कमीशनिंग।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। बीएसपी के सिंटर प्लांट 3 की मशीन 2 में नोडुलाइज़र बाय-पास च्यूट एवं फ्लैप गेट का सफलतापूर्वक कमीशनिंग एवं उद्घाटन किया गया। यह उपलब्धि संयंत्र के संचालन में लचीलापन, विश्वसनीयता एवं अनुरक्षण दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नोडुलाइज़र, सिंटर मशीन के संचालन हेतु एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपकरण है, जिसके अनुरक्षण के लिए पूर्व में पूरी मशीन को बंद करना पड़ता था। अब बाय-पास च्यूट एवं फ्लैप गेट की स्थापना के पश्चात नोडुलाइज़र का अनुरक्षण बिना सिंटर मशीन को बंद किए किया जा सकता है, जिससे उत्पादन में निरंतरता बनी रहेगी।
बाय-पास च्यूट प्रणाली के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं
• नोडुलाइज़र में खराबी की स्थिति में सिंटर मशीन के पूर्ण रूप से बंद होने का जोखिम काफी हद तक कम हो गया है तथा अब इसे केवल लगभग आधे घंटे के अल्पकालिक शटडाउन तक सीमित किया जा सकता है।
• नोडुलाइज़र की कैपिटल रिपेयर अब स्वतंत्र रूप से की जा सकती है, जिसके लिए पूरी सिंटर मशीन की कैपिटल रिपेयर की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे अनुरक्षण योजना एवं संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।
इस पहल से सिंटर मशीन 2 की विश्वसनीयता में वृद्धि होने के साथ-साथ उत्पादन क्षमता में भी सुधार होने की अपेक्षा है। उद्घाटन समारोह का शुभारंभ बीके बेहरा, सीजीएम I/c (M&U) द्वारा किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारीगण एवं संयंत्र नेतृत्व उपस्थित रहे, जिनमें कृष्ण कुमार, सीजीएम (इलेक्ट्रिकल), एच. के. सचदेव, सीजीएम (शॉप्स), पी. के. सिंह, सीजीएम (मैकेनिकल) तथा सजीव वर्गीज, सीजीएम (ओएचपी एवं एसपी 3) शामिल थे। इनके मार्गदर्शन एवं सहयोग से इस परियोजना का सफल क्रियान्वयन संभव हो सका।
यह उपलब्धि आई. वी. रमण (जीएम, एमएम, एसपी 3) के नेतृत्व में संपूर्ण टीम के समर्पित प्रयासों का परिणाम है। एसपी–3 के प्रमुख सदस्यों में ए. के. बेडेकर (जीएम), आर. डी. शर्मा (जीएम), एम. यू. राव (डीजीएम), डी. के. गुप्ता (एजीएम), ओम नमः शर्मा (सीनियर मैनेजर), जितेश एच. सहानी (सीनियर मैनेजर), विपिन मौर्य (सीनियर मैनेजर), अरुणेश शर्मा (सीनियर मैनेजर), विकास पिपरानी (एजीएम) एवं राहुल सिंह (सीनियर मैनेजर) शामिल हैं, जिनका निरंतर योगदान सराहनीय रहा है।
इस उपलब्धि में केंद्रीय एजेंसियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिनमें मेजी मेजर सिंह (जीएम, ईडीडी), देवेंद्र सोनार (डीजीएम, ईडीडी), जितेंद्र मोटवानी (जीएम, एफ एंड एसएस) तथा राजीव सोंटाके (जीएम, सीपीडी) शामिल हैं। यह सफल कमीशनिंग उत्कृष्ट टीमवर्क, तकनीकी दक्षता एवं सतत सुधार के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है, जो भविष्य की परियोजनाओं के लिए एक मानक स्थापित करती है।














