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Bhilai Steel Plant: नए क्वालिटी लैब में नहीं मिल रहा क्वालिटी वाला पीने का पानी, बनाइए सड़क वरना एक्सीडेंट तय

Azmat ali 08/04/2026 1 minute read
Bhilai Steel Plant Quality Drinking Water is not Available in the new Quality Lab Build a Road or There will be an Accident

पानी और रोड की समस्या को लेकर जीएम आरसीएल के साथ सीटू की बैठक संपन्न। नए रोलिंग मिल लैब पहुंच मार्ग का निर्माण बहुत जरूरी है।

  • महिला एवं पुरुष कर्मियों के लिए रेस्ट रूम की भी व्यवस्था करने के संदर्भ में चर्चा की गई।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल भिलाई स्टील प्लांट के कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान कराने के लिए पूर्व मान्यता प्राप्त यूनियन सीटू लगातार प्रबंधन के संपर्क में है। जीएम आरसीएल के साथ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई।

कर्मियों को अपने विभाग तक पहुंचने के लिए रोड की बेहतर व्यवस्था होना जरूरी है। वहीं, विभाग के अंदर पीने का पानी एवं वॉशरूम जैसे मूलभूत सुविधाओं का इंतजाम किया जाना भी जरूरी है। इन्हीं मुद्दों को लेकर सीटू की टीम जीएम आरसीएल एवी मनोज से मुलाकात कर सीजीएम के नाम पत्र देकर इन समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की। इस पत्र की प्रतिलिपि मुख्य महाप्रबंधक मैकेनिकल जोन को भी दिया गया।

इस बैठक में महिला एवं पुरुष कर्मियों के लिए रेस्ट रूम की भी व्यवस्था करने के संदर्भ में चर्चा की गई। बैठक में यूनियन की ओर से सविता मालवीय, ओमप्रकाश श्रीवास, टी जोगा राव, जगन्नाथ प्रसाद त्रिवेदी, केवेंद्र सुंदर,.त्रिलोचन सेन, डीवीएस रेड्डी उपस्थित थे।

पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं है नए रोलिंग मिल लैब में

संयंत्र के पास आईसीएल जैसे लैब होने के बावजूद नए मॉडल इकाइयों के साथ नए रोलिंग मिल लैब की भी स्थापना की गई। यहां सारी व्यवस्थाओं को करने के बावजूद पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा अभी तक उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। यहां पर पानी को मोटर के माध्यम से लैब के ऊपर स्थित टंकी में चढ़ाया जाता है। किंतु इस टंकी के पानी को पीने के लिए इस्तेमाल करना ठीक नहीं है। इसीलिए कर्मी को अपने साथ पानी लेकर आना पड़ता है। यदि प्रबंधन उच्च गुणवत्ता वाला RO (रिवर्स ऑस्मोसिस) मशीन जैसी कोई व्यवस्था कर दे तो यह पानी पीने योग्य बन सकता है।

मॉडेक्स इकाइयों में शुरू से परेशानी रही है पीने के पानी की

सीटू ने कहा कि मोडेक्स इकाइयों में शुरू से ही पानी की समस्या रही है। इसीलिए कुछ मॉडेक्स इकाई में उसके स्थापना के समय ही बोरिंग भी किया गया था। संयंत्र के अंदर दो प्रकार का पानी आता है। एक इंडस्ट्रियल वॉटर, जो उत्पादन की प्रक्रिया में आवश्यकता अनुसार इस्तेमाल किया जाता है। दूसरा ड्रिंकिंग वॉटर, जिसे पीने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। संयंत्र के कई पुराने इकाइयों में पीने का पानी ही दोनों कार्यों के लिए इस्तेमाल होता है। किंतु नई इकाइयों में इंडस्ट्रियल वॉटर एवं ड्रिंकिंग वॉटर को अलग-अलग किया गया है, क्योंकि ड्रिंकिंग वॉटर के ट्रीटमेंट में बहुत पैसा खर्च होता है।

पहुंच मार्ग का डामरीकरण जरूरी

सीटू ने कहा कि नए रोलिंग मिल लैब के निर्माण के साथ ही यहां के लिए पहुंच मार्ग का निर्माण किया जाना चाहिए था। जिस पक्के रोड के साथ इस लैब को जोड़ा गया है, उस रोड पर नए लैब के बगल में वे ब्रिज होने के कारण दिन भर ट्रैकों की आवाजाही लगी रहती है। इसीलिए इस मार्ग का इस्तेमाल करना लगभग असंभव है। अतः दूसरे कच्चे रास्ते का इंतजाम किया गया। जहां हमेशा धूल उड़ता रहता है। बारिश के मौसम में कीचड़ बन जाता है। इसीलिए इस कच्चे रास्ते अर्थात पहुंच मार्ग का डामरीकरण बहुत जरूरी है।

सिविल पर आकर रुक जाती है बात

रोड की व्यवस्था करनी हो, पीने के पानी का इंतजाम करना हो या फिर टॉयलेट बाथरूम आदि के निर्माण अथवा बेहतर व्यवस्था के संदर्भ में काम करना हो, सभी बातें सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट पर आकर रुक जाती है। चर्चा के दौरान नए रोलिंग मिल लैब तक पहुंचने वाले मार्ग के निर्माण तथा पीने के पानी की व्यवस्था के संदर्भ में यही बात सामने आयी कि सीईडी को इस सन्दर्भ में पहले भी बताया जा चुका है। फिर से सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट को इस संदर्भ में कहा जाएगा ताकि इन मूलभूत व्यवस्थाओं को जल्द से जल्द उपलब्ध कराया जा सके।

नॉन एसी रेस्ट रूम की आवश्यकता है कर्मचारियों को

सैंपल की जांच के लिए लैब में पैकेज एसी लगा हुआ है, जिसका तापमान बहुत कम होता है और कर्मियों को लगातार 8 घंटे वहां पर कार्य करने में परेशानी होती है। इसलिए उन्हें एक नॉन एसी रेस्ट रूम की आवश्यकता है। रेस्ट रूम की आवश्यकता वहां कार्यरत महिला कर्मियों को भी है।

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