क्षेत्रीय संगठन मंत्री सी.वी. राजेश ने कहा-अब केवल ज्ञापन देने का समय नहीं, बल्कि खुलकर संघर्ष करने की आवश्यकता है।
- भिलाई इस्पात संयंत्र में ठेका श्रमिकों की छंटनी, सुविधाओं में असमानता, औद्योगिक क्षेत्रों में कर्मचारियों की कटौती, कम वेतन, वेतन समझौते का मुद्दा।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भारतीय मजदूर संघ छत्तीसगढ़ की कार्यसमिति बैठक 16 और 17 मई को अंबिकापुर में संपन्न हुई। बैठक में प्रदेशभर से संगठन के पदाधिकारी, कार्यसमिति सदस्य, विभाग प्रमुख, जिलाध्यक्ष, जिलामंत्री तथा विभिन्न यूनियनों और महासंघों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में आगामी आंदोलन की रणनीति पर चर्चा करते हुए 1 अक्टूबर 2026 को राजधानी रायपुर में एक लाख श्रमिकों के साथ विशाल आक्रोश रैली निकालने का निर्णय लिया गया।
बैठक में सभी जिलों एवं यूनियनों के प्रतिनिधियों ने पिछली कार्यसमिति बैठक के बाद किए गए कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। प्रदेश महामंत्री दिनेश पांडे ने प्रदेश संगठन की गतिविधियों की जानकारी दी। वहीं, नव नियुक्त क्षेत्रीय संगठन मंत्री सी.वी. राजेश ने यूनियन गतिविधियों को बढ़ाने और कार्यक्षेत्र का विस्तार करने पर जोर दिया।
बैठक में श्रमिकों की समस्याओं और विभिन्न क्षेत्रों में उत्पन्न चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। क्षेत्रीय संगठन मंत्री सी.वी. राजेश ने कहा कि अब केवल ज्ञापन देने का समय नहीं, बल्कि खुलकर संघर्ष करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लगातार मांग पत्र सौंपने के बावजूद सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होने से श्रमिकों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। भारतीय मजदूर संघ लंबे समय तक श्रमिकों की समस्याओं को नजरअंदाज होते नहीं देख सकता। इसी कारण सभी यूनियनों के मुद्दों को लेकर बड़े आंदोलन की जरूरत महसूस की गई।
राष्ट्रीय मंत्री राधेश्याम जायसवाल ने कहा कि आक्रोश रैली को सफल बनाने के लिए सभी श्रमिक क्षेत्रों में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत नुक्कड़ सभाएं, पंपलेट वितरण और गेट मीटिंग आयोजित की जाएंगी।
बैठक में कई महत्वपूर्ण श्रमिक मुद्दों को आंदोलन का प्रमुख आधार बनाया गया। इनमें भिलाई इस्पात संयंत्र में ठेका श्रमिकों की छंटनी, सुविधाओं में असमानता, औद्योगिक क्षेत्रों में कर्मचारियों की कटौती, कम वेतन, वेतन समझौता, सभी श्रमिकों को नियुक्ति पत्र देने की मांग, यूनियन गठन में बाधा, अस्पताल कर्मचारियों से अतिरिक्त कार्य कराने और उचित वेतन नहीं देने जैसे विषय शामिल हैं।
इसके अलावा सरकारी विभागों और निगम-मंडलों में 10 वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मियों को नियमित करने, ट्रक ड्राइवरों की समस्याओं के समाधान, इलेक्ट्रिक ऑटो के लिए चार्जिंग प्वाइंट बनाने, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्कर्स और रसोइया कर्मियों को श्रमिक का दर्जा देने, गिग वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी उपलब्ध कराने तथा परिवहन कल्याण बोर्ड की स्थापना की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई।
बैठक में सुरक्षा गार्डों से 12 घंटे ड्यूटी लेकर कम वेतन देने और होटल कर्मियों के लिए पीएफ, ईएसआई एवं निर्धारित कार्य घंटे लागू कराने की मांग को भी आंदोलन का अहम मुद्दा बताया गया।

