जय झारखंड मजदूर समाज ने कर्मियों की छंटनी के खिलाफ कोक ओवन बैटरी नंबर-4 के सामने प्रदर्शन किया।
- 12 मई को दोपहर 12:30 बजे प्लांट गोलचक्कर में आयोजित “हल्लाबोल” कार्यक्रम में मजदूरों के शामिल होने की अपील।
सूचनाजी न्यूज, बोकारो। सेल बोकारो स्टील प्लांट में मजदूरों की छंटनी के खिलाफ जय झारखंड मजदूर समाज विरोध कर रही है। यूनियन का कहना है कि मोदी सरकार को यह याद रखना चाहिए कि यह विशाखापत्तनम नहीं है, जहां मनमाने फैसले कर दिए जाएं। यह भगवान बिरसा मुंडा और सिद्धू-कान्हू की धरती बोकारो है, जहां अंग्रेजों की गुलामी के खिलाफ पहली लड़ाई लड़ी गई थी।
बाद में यह धरती स्वर्गीय शिबू सोरेन के संघर्षों के कारण भी पहचानी जाने लगी, जिन्होंने झारखंडवासियों के सर्वांगीण विकास के लिए गुड़िला युद्ध से लेकर आर्थिक नाकेबंदी तक आंदोलन चलाया और अलग झारखंड राज्य के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने यह संघर्ष इसलिए नहीं किया था कि बोकारो स्टील प्लांट के लिए अपनी जमीन देने वाले लोग ही रोजगार और रोजी-रोटी से बेदखल हो जाएं।
यह बातें जय झारखंड मजदूर समाज द्वारा ठेका कर्मियों की छंटनी के खिलाफ विभागीय स्तर पर चलाए जा रहे जनजागरण कार्यक्रम के तहत कोक ओवन एवं कोक केमिकल विभाग के बैटरी नंबर-4 के सामने आयोजित सभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सदस्य सह जय झारखंड मजदूर समाज के महामंत्री बी.के. चौधरी ने कही।
उन्होंने कहा कि बोकारो स्टील प्लांट में कार्यरत ठेका कर्मियों में 90 से 95 प्रतिशत स्थानीय मूलवासी और विस्थापित परिवारों के लोग हैं। इनके पूर्वजों ने बोकारो स्टील प्लांट निर्माण के लिए अपनी जमीन औने-पौने दाम पर दे दी थी, जिसके बाद ठेका मजदूरी के अलावा इनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचा।
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले से ही इन मजदूरों का खून-पसीने की कमाई से “मनीकट” के जरिए आर्थिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है। उस पर केंद्र सरकार से आया यह अमानवीय आदेश कि 40 प्रतिशत ठेका मजदूरों को काम से निकाला जाए, किसी भी सूरत में बर्दाश्त करने योग्य नहीं है।
बी.के. चौधरी ने कहा कि इस तरह के आदेश से मजदूरों के साथ-साथ अधिकारियों में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया है, जिसका असर उत्पादन पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार निजी कंपनियों जैसे जिन्दल, एसआर और टाटा का उदाहरण देकर कम मैनपावर में उत्पादन की बात कर रही है, लेकिन शायद सरकार यह भूल रही है कि बोकारो स्टील प्लांट की स्थापना केवल उत्पादन के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र में रोजगार और चौमुखी विकास के उद्देश्य से की गई थी।
उन्होंने सरकार से इस “काले और अमानवीय आदेश” को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि जिस बोकारो स्टील प्लांट ने उत्पादन और मुनाफे में लगातार परचम लहराया है, उस पर कुदृष्टि डालना बंद किया जाए।
अंत में बी.के. चौधरी ने अपील करते हुए कहा कि प्रस्तावित 12 मई 2026 को दोपहर 12:30 बजे प्लांट गोलचक्कर में आयोजित “हल्लाबोल” कार्यक्रम में हजारों की संख्या में पहुंचकर मजदूर अपनी चट्टानी एकता का प्रदर्शन करें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागीय वरिष्ठ नेता सी.के.एस. मुंडा ने की, जबकि संचालन संयुक्त महामंत्री अनिल कुमार ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से संयुक्त महामंत्री एन.के. सिंह, अनिल कुमार, सी.के.एस. मुंडा, रौशन कुमार, आर.बी. सिंह, तुलसी साहू, ए.के. मंडल, आई. अहमद, रामा रवानी, आमोद कुमार, बी.के. साह, आर.आर. सोरेन, बादल कोयरी, कार्तिक सिंह, मानिक चंद्र साह, जे.पी. सोरेन, मनजीत कुमार, बी. रजवार, दयाल मांझी, नूर अंसारी, अरूप मंडल, मनोज एक्का, उत्तम कुमार, राजेंद्र प्रसाद, जितेंद्र राय, तपेसर महतो, सचिन कुमार, विनोद राम, बलराम महतो, सोमनाथ मंडल, नासिर अहमद खान, मनोज कुमार सिंह, राजेश कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

