- सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हक मे सीजू एंथोनी ने उठाई आवाज।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। प्रदेश में चल रहे एसआइआर को देखते हुए रिटेंशन से संबंधित आदेश वापस लिए जाने की मांग सेल के डायरेक्टर पर्सनल केके सिंह से की गई है। भिलाई निवास में महापौर परिषद् के प्रभारी (राजस्व विभाग) एवं प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री सीजू एंथोनी ने मुलाकात की।
इस्पात कर्मचारियों के दर्द को महसूस करते एसआइआर का हवाला दिया गया। सीजू एंथोनी ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा छग में मतदाता सूची का गहन पुनरिक्षण का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए जिस स्थान पर मतदाता रहता है, उसी स्थान या निवास से उसे गणना फार्म भरना अनिवार्य है।
इसके कारण बीएसपी के पूर्व कर्मचारी और हाल ही में सेवानिवृत्त कर्मचारी दहशत में हैं कि अगर उनको बीएसपी प्रबंधन के नए आदेश के अनुसार मकान छोड़ना पड़े तो उनका नाम मतदाता सूची में कहां से रहेगा, क्योंकि आज वह गणना फार्म वर्तमान में बीएसपी के आवास से भर देता है, क्योंकि उसका एवं उसके परिवार का नाम वर्षों से इसी निवास से है और कल को बीएसपी के आदेश अनुसार मकान छोड़ना ही पड़ेगा, क्योंकि प्रबंधन ने ग्रेच्युटी की राशि और अवकाश नगदीकरण रोक कर रखा है।
इतना नुकसान तो सेवानिवृत्त कर्मचारी सहन नहीं कर सकता है, तो इस परिस्थिति में वह मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने से वंचित हो जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी एसआइआर की गंभीरता को देखते हुए भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन को हाल ही मे रिटेंशन स्कीम को लेकर जो नवीन आदेश जारी किया गया है, उसे मानवीय आधार पर रद्द किया जाना चाहिए।
सीजू एंथोनी ने बताया कि नवीन आदेश में कर्मचारी और अधिकारी दोनों के लिए जो दर लगाईं गई है वह भी एक समान है, जब कि हाउस एलाटमेंट में हमेशा से प्रबंधन कर्मचारी और अधिकारी में भेद करते आया है। याहं तक कि सेक्टर नाइन में कर्मचारी स्तर का कोई भी आवास नहीं है। फिर दर क्यों एक जैसी रखी गई है।
इसका मतलब है कि सेक्टर नाइन की दर भी वही होगी, जो खुर्सीपार की होगी। यह घोर विसंगति है। इसके अलावा और भी पहलू है जो कहीं से भी पूर्व कर्मचारी और हाल ही में सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के हित में नहीं है। जैसा की सभी को ज्ञात होगा कि छग शासन ने इसी माह जमीन की गाइड लाइन दरें बढ़ा दी है।
इसको लेकर समूचे प्रदेश में आंदोलन चल रहा है और ज़मीन के साथ साथ रजिस्ट्री भी काफ़ी महंगी हो चुकी है। अगर बीएसपी के रिटेंशन के आदेश की दहशत में सेवानिवृत्त कर्मी आपाधापी में कोई मकान खरीदता है तो उसके लाखों रूपए खर्च हो जाएंगे। या कहिये की वह वर्तमान स्थिति में लुट जाएगा।
इसलिए मानवीय आधार पर अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर रहम करते हुए प्रबंधन को रिटेंशन का आदेश वापस लेना चाहिए। वैसे भी बीएसपी हजारों कर्मचारियों का पालनहार है और प्रबंधन को ग्रेच्युटी और अवकाश नगदीकरण रोकने जैसा अमानवीय कृत्य करने से बचना चाहिए। इस अवसर पर जिला कांग्रेस के प्रवक्ता जावेद खान भी मौजूद थे।











