152 करोड़ के बैंक घोटाले में 6 दोषी, CBI कोर्ट ने दी 5 साल तक की सजा

CBI Court Convicts and Sentences Two Private Companies and Six Individuals in Bank Fraud Cases of Rs 152 Crore
  • जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 31 दिसंबर 2022 को आरोपियों और दोनों कंपनियों के खिलाफ दो आरोप पत्र दाखिल किए थे।

सूचनाजी न्यूज, दिल्ली। पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने 152 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में दो निजी कंपनियों और छह व्यक्तियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। अदालत ने 13 जनवरी 2026 को दिए अपने आदेश में एम/एस एसआरएस रियल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और एम/एस एसआरएस रियल एस्टेट लिमिटेड सहित छह निजी व्यक्तियों-राजेश सिंगला, अनिल जिंदल, बिशन बंसल, नानक चंद टायल, सीमा नरंग और धीरज गुप्ता को दोषी करार दिया।

अदालत ने दोनों दोषी कंपनियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं, आरोपी राजेश सिंगला और अनिल जिंदल को पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास (आरआई) की सजा के साथ 1.20 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है।

बिशन बंसल और नानक चंद टायल को भी पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी गई है, साथ ही प्रत्येक पर 80-80 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। सीमा नरंग और धीरज गुप्ता को चार-चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है और प्रत्येक पर 40-40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

सीबीआई ने यह मामला 14 जुलाई 2020 को केनरा बैंक के सर्किल कार्यालय, करनाल (हरियाणा) की शिकायत पर दर्ज किया था। आरोप था कि आरोपियों ने आपसी साजिश के तहत धोखाधड़ी करते हुए बैंक से 152 करोड़ रुपये की क्रेडिट सीमा/ऋण स्वीकृत कराई और उस धनराशि का उपयोग स्वीकृत उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों में किया।

जांच में सामने आया कि दोनों निजी कंपनियों ने अपने निदेशकों के माध्यम से फर्जी तरीके से ऋण प्राप्त कर केनरा बैंक को भारी नुकसान पहुंचाया। एम/एस एसआरएस रियल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने 42 करोड़ रुपये की क्रेडिट सीमा लेकर 41.95 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया, जबकि एम/एस एसआरएस रियल एस्टेट लिमिटेड ने 110 करोड़ रुपये की क्रेडिट सीमा लेकर 93.20 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया। ऋण की राशि को बिना किसी वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि के डमी कंपनियों के माध्यम से डायवर्ट किया गया।

जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 31 दिसंबर 2022 को आरोपियों और दोनों कंपनियों के खिलाफ दो आरोप पत्र दाखिल किए थे। अदालत ने 22 दिसंबर 2025 को सभी आरोपियों को दोषी ठहराया और 13 जनवरी 2026 को सजा सुनाई।