15 दिनों की अवधि (अनावसर काल) में महाप्रभु को केवल विभिन्न जड़ी-बूटियों, काढ़े और दिव्य औषधियों का ही भोग लगेगा।
- श्री जगन्नाथ मंदिर सेक्टर-4 में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुई देवस्नान पूर्णिमा; ‘जय जगन्नाथ’ के उद्घोष से गूंजा परिसर।
- 108 कलशों के सुगंधित व औषधियुक्त जल से महाप्रभु का हुआ दिव्य स्नान, गजराज वेश में भक्तों को दिए दर्शन।
- स्नान के बाद अणसर गृह (विश्राम कक्ष) पधारे महाप्रभु; 14 जुलाई तक बंद रहेंगे मंदिर के पट।
- 16 जुलाई 2026 को दोपहर 2:00 बजे से निकाली जाएगी भव्य 57वीं रथयात्रा।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेक्टर-4 स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में इस वर्ष भी महाप्रभु श्री जगन्नाथ स्वामी के 57वें रथयात्रा महोत्सव 2026 की शुरुआत पारंपरिक श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ की गई है। रथयात्रा महोत्सव की पहली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में आज मंदिर परिसर में ‘देवस्नान पूर्णिमा’ का भव्य आयोजन किया गया। पूरा मंदिर परिसर श्रद्धालुओं के ‘जय जगन्नाथ’ के गगनभेदी उद्घोष से गुंजायमान रहा।
पारंपरिक विधि-विधान से संपन्न देवस्नान व श्रृंगार
धार्मिक परंपरा के अनुसार, महाप्रभु श्री जगन्नाथ स्वामी, बड़े भाई भगवान श्री बलभद्र देव तथा बहन देवी सुभद्रा जी को पारंपरिक बाजे-गाजे के साथ ‘पहंडी’ करते हुए गर्भगृह से देव स्नान मंडप पर लाया गया। इसके पश्चात मुख्य पुरोहित श्री पितवास पाढ़ी के नेतृत्व में पुरोहित सर्वश्री परितोष पाणिग्रही, रंजन महापात्र, रंजीत रथ, सुशांत सतपथी एवं सरोज दास द्वारा समस्त वैदिक विधि-विधान के साथ महाप्रभु का सुगंधित एवं दिव्य जड़ी-बूटियों से युक्त जल से महास्नान कराया गया। स्नान के उपरांत महाप्रभु का अलौकिक *’गजराज वेश’ (हाथी रूप)*में भव्य श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
अणसर गृह में पधारे महाप्रभु, 14 जुलाई को होंगे ‘नेत्र उत्सव’ पर दर्शन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अत्यधिक स्नान के कारण महाप्रभु बीमार (ज्वर से पीड़ित) हो गए हैं। स्नान पूर्णिमा के बाद महाप्रभु को स्वास्थ्य लाभ और विश्राम के लिए ‘अणसर गृह’ में स्थापित कर दिया गया है। आज से लेकर आगामी 14 जुलाई 2026 तक मंदिर के पट आम दर्शनार्थियों के लिए पूरी तरह बंद रहेंगे। इस 15 दिनों की अवधि (अनावसर काल) के दौरान महाप्रभु को केवल विभिन्न जड़ी-बूटियों, काढ़े और दिव्य औषधियों का ही भोग लगाया जाएगा।
14 जुलाई 2026 को ‘नेत्र उत्सव’ का आयोजन किया जाएगा, जिसके बाद महाप्रभु स्वस्थ होकर पुनः भक्तों को दर्शन देंगे और मंदिर के पट आम जनता के लिए खोल दिए जाएंगे।
16 जुलाई को निकलेगी 57वीं भव्य रथयात्रा
श्री जगन्नाथ समिति के महासचिव सत्यवान नायक ने बताया कि सेक्टर 4 जगन्नाथ मंदिर से निकलने वाली यह रथ यात्रा भिलाई की सबसे पुरानी रथ यात्रा है।जगन्नाथ संस्कृति के इस सबसे बड़े महापर्व का मुख्य आकर्षण यानी भव्य रथयात्रा का आयोजन 16 जुलाई 2026 (गुरुवार) को दोपहर 2:00 बजे से किया जाएगा। रथयात्रा सेक्टर-4 स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से पूरे वैभव और भव्यता के साथ निकाली जाएगी।
समिति की सक्रिय सहभागिता
इस पावन उत्सव को गरिमामय व सफल बनाने में श्री जगन्नाथ समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र सतपति एवं महासचिव सत्यवान नायक सहित समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों अनाम नाहक, वृंदावन स्वांई, डी त्रिनाथ, त्रिनाथ साहू, बसंत प्रधान, बीसी बिस्वाल, भीम स्वांई, सीमांचल बेहेरा, सुशांत सतपथी, कालू बेहेरा, बीसी केशन साहू, निरंजन महाराणा, प्रकाश स्वांई, कवि बिस्वाल, कैलाश पात्रो, रबि स्वांई, जगन्नाथ पटनायक, वी के होता एवं हिमांशु शांति ने विशेष योगदान दिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहकर पुण्य लाभ कमाया।

