SAIL कर्मचारियों को दोहरा घाटा, वेतन समझौते के बाद भी साइड सुविधाएं ठप

Double Loss for SAIL Employees Side Facilities Stalled Even after Wage Agreement

ट्रेड यूनियन का दावा-सेल अधिकारियों को मिलने वाली साइड सुविधाओं में लगातार बढ़ोतरी और संशोधन जारी है।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के कर्मचारियों को वेतन समझौते के बाद भी दोहरे घाटे का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर जहां वर्षों से नन-स्टैच्यूअरी (गैर वैधानिक) सुविधाएं या तो बंद कर दी गई हैं या आज तक संशोधित नहीं की गईं। वहीं, दूसरी ओर सेल अधिकारियों को मिलने वाली साइड सुविधाओं में लगातार बढ़ोतरी और संशोधन जारी है।

इसी मुद्दे को लेकर बीएसपी अनाधिशासी कर्मचारी संघ ने निदेशक (कार्मिक), सेल को पत्र लिखकर सभी नन-स्टैच्यूअरी सुविधाओं को वर्तमान समय और महंगाई के अनुरूप संशोधित करने की मांग की है।

यूनियन का कहना है कि वर्ष 2011-12 तक कई नन-स्टैच्यूअरी लाभ सेव नन-एक्जीक्यूटिव कर्मचारियों को दिए जाते थे, जिनका उल्लेख सेल की कॉरपोरेट सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट 2010–11 में भी दर्ज है। परंतु बाद के वर्षों में इन सुविधाओं का आर्थिक भार कर्मचारियों पर डाल दिया गया, कुछ को स्थगित कर दिया गया और कई को वर्षों से संशोधित ही नहीं किया गया।

यूनियन ने आरोप लगाया कि जहां नॉन-एक्जीक्यूटिव कर्मचारियों की सुविधाएं सिमटती जा रही हैं, वहीं अधिकारी वर्ग की विशेष सुविधाएं-जैसे मोबाइल सेट खरीद, फर्नीचर एडवांस, कंप्यूटर/लैपटॉप एडवांस और ड्रेस पर आयकर छूट को नए दरों के अनुसार लगातार अपडेट किया जा रहा है।

पत्र में कर्मचारियों की वर्तमान सुविधाओं की स्थिति का विस्तार से उल्लेख किया गया है। सामूहिक दुर्घटना बीमा का प्रीमियम कर्मचारियों के वेतन से लिया जा रहा है, जबकि दुर्घटना रोकथाम की प्राथमिक जिम्मेदारी नियोक्ता की होती है।

ईएफबीएस योजना लाकर सामान्य मृत्यु में अनुकंपा नियुक्ति बंद कर दी गई है, जबकि कोल इंडिया सहित कई पीएसयू में यह व्यवस्था आज भी लागू है। चिकित्सा सुविधा के नाम पर सेल के अस्पतालों में भवन और इंफ्रास्ट्रक्चर तो हैं, लेकिन डॉक्टरों, जांच उपकरणों और सहायक स्टाफ की भारी कमी के कारण मरीजों को बड़ी संख्या में बाहर रेफर किया जा रहा है।

इसके अलावा मेडिक्लेम योजना सेवानिवृत्त कर्मियों से प्रीमियम लेकर दी जा रही है, वाहन अग्रिम और आवास निर्माण अग्रिम वर्ष 2012 से स्थगित हैं, जबकि पिछले कई वर्षों से सेल को मुनाफा हो रहा है। त्योहार अग्रिम की राशि वर्ष 2008 के बाद से आज तक 5000 पर ही अटकी है।

दीर्घ सेवा पुरस्कार और सेवानिवृत्ति सम्मान में आज भी नाममात्र का उपहार दिया जा रहा है, जबकि अन्य नवरत्न कंपनियों में स्वर्ण मुद्राएं या महंगे गिफ्ट कूपन दिए जाते हैं। छात्रवृत्ति योजना में भी वर्षों से राशि संशोधित नहीं हुई है, जो मात्र ₹150 से ₹500 प्रति माह है।

यूनियन ने मांग की है कि नॉन-स्टैच्यूअरी लाभों को कंपनी खर्च पर संशोधित किया जाए और इसमें मोबाइल सेट खरीद राशि, फर्नीचर व लैपटॉप एडवांस, बच्चों की उच्च शिक्षा हेतु ऋण तथा निःसंतान कर्मियों के लिए निःशुल्क आईवीएफ सुविधा जैसी योजनाएं भी जोड़ी जाएं।

बीएकेएस भिलाई के महासचिव किशोर कुमार साव ने कहा, “हम सभी कर्मचारी सेल के स्टेक होल्डर हैं, लेकिन एनजेसीएस नेताओं के समर्थन के बल पर प्रबंधन हमारे साथ दोयम दर्जे का व्यवहार कर रहा है। विवश होकर यूनियन को अब न्यायालय का रुख करना पड़ेगा।”