मौत के बाद मजदूर के अंगों को निकाला ESIC सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ने, बची 3 की जान, गुर्दा निकालकर…
ईएसआईसी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, सनथनगर हैदराबाद का नाम सुर्खियों में। उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं और नवाचारी प्रथाओं तथा अत्याधुनिक तकनीक की तारीफ। ईएसआई लाभार्थियों के स्वास्थ में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। सूचनाजी न्यूज, दिल्ली। ईएसआईसी सनतनगर, हैदराबाद (ESIC Super Speciality Hospital, Sanathnagar,) के एक मृत मरीज (कडैवर) ने 3 अन्य रोगियों की जान बचाई। ईएसआईसी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, सनथनगर (ESIC Super Speciality Hospital, Sanathnagar,) ने चिकित्सा विज्ञान और अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में यह ऐति
- ईएसआईसी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, सनथनगर हैदराबाद का नाम सुर्खियों में।
- उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं और नवाचारी प्रथाओं तथा अत्याधुनिक तकनीक की तारीफ।
- ईएसआई लाभार्थियों के स्वास्थ में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है।
अंगदाता एक 45 वर्षीय पुरुष था जिसे ईएसआईसी अस्पताल, सनथनगर, हैदराबाद में ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था। अस्पताल की न्यूरो सर्जरी टीम ने डॉ. सैमसन के नेतृत्व में तिमारदारों (परिजनों) को अंग दान के बारे में सलाह दी और उन्हें इस बारे में शिक्षित किया।
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पिछले 4 वर्षों से डायलिसिस पर थी महिला, अब मिली किडनी
अंगदान के लिए उचित सहमति दी गई। जीवनधन द्वारा ईएसआईसी को अंग आवंटित किए गए थे। कडैवर की एक किडनी प्राप्त करने वाली एक 50 वर्षीय महिला रोगी थी। यह महिला रोगी ईएसआईसी की लाभार्थी थी और पिछले 4 वर्षों से डायलिसिस पर थी।
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उस्मानिया जनरल अस्पताल को मिले 2 अंग
कडैवर का लीवर और एक अन्य किडनी उस्मानिया जनरल अस्पताल (Osmania General Hospital) को आवंटित की गई, जहां दो और प्राप्तकर्ताओं को दाता के अंगों का लाभ मिला और इस प्रक्रिया में उनकी जान भी बच गई। ये खबर भी पढ़ें: कोयला से CNG प्लांट बनाने Coal India-GAIL में एमओयू साइन, विदेशी निर्भरता होगी कमडाक्टरों की इस टीम ने निभाई भूमिका
मृतक मरीज के अंगों की पुन:प्राप्ति डॉ. मधु, डॉ. संदीप और उनकी टीम द्वारा की गई। ईएसआईसी अस्पताल, सनथनगर (ESIC Super Speciality Hospital, Sanathnagar, Hyderabad) में डोनर ट्रांसप्लांट डॉ. जगदीश्वर और डॉ. पांडु रंगा राव, चीफ ट्रांसप्लांट सर्जन द्वारा किया गया। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. नागार्जुन और नेफ्रोलॉजी टीम का नेतृत्व डॉ. धनलक्ष्मी ने किया।
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