- भिलाई स्टील प्लांट की संयुक्त यूनियन ट्रेड यूनियनों का प्रचार अभियान।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। देशभर में 12 फरवरी को हड़ताल है। भिलाई स्टील प्लांट में भी तैयारियां की जा रही है। ट्रेड यूनियन नेता लगातार कर्मचारियों के बीच मुद्दों को रख रहे हैं।
संयुक्त यूनियन नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार के कॉर्पोरेट मित्र एवं निजी उद्योगों के मालिक महिलाओं से नाइट शिफ्ट ड्यूटी कराना चाहते हैं,ताकि महिलाओं के श्रम को रात में भी इस्तेमाल करके अपना मुनाफा दुगना चौगुना कर सके।
वर्तमान समय में पब्लिक चहल पहल वाले स्थान अर्थात हॉस्पिटल, रेलवे स्टेशन एवं एयरपोर्ट जैसे जगह में महिलाओं की रात्रि पाली में ड्यूटी होती है। किंतु उद्योग के अंदर सुरक्षा के मद्देनजर शाम को 6:00 बजे के बाद से सुबह 6:00 बजे तक महिलाओं का संयंत्र के अंदर काम करने पर शुरू से रोक है, जिसे मौजूदा सरकार हटाने पर तूली हुई है।
समान काम के लिए समान वेतन का अधिकार भी अब खतरे में
सरकार दावा करती है कि लिंग भेद को तोड़ते हुए महिलाओं को भी रात्रि पाली में काम कर समान काम के लिए समान वेतन पक्का करने के लिए यह कानून में प्रावधान किया गया है। किंतु वास्तविकता यह है कि इस कोड से महिलाओं के अधिकार को कुचल दिया जाएगा।
समानता कोई नई चीज नहीं है। यह समानता 1950 से संवैधानिक रूप से मिला हुआ है। 1976 के इक्वल रैम्यूनरेशन एक्ट के तहत पुरुषों और महिलाओं के लिए समान मेहनताना कानूनी तौर पर गारंटी देता है। इन कानून को 2019 में पारित कोड ऑन वेजेस में हटा दिया गया है।
सहमति की बात करने वाले महिलाओं को रात्रि पाली के लिए मजबूर करेंगे भविष्य में
महिलाओं को रात में काम करने की यह तथाकथित इजाजत महिलाओं की आजादी नहीं है, बल्कि नियोक्ताओं की आजादी है। पहले नियोक्ताओं पर महिलाओं से रात में काम करवाने पर रोक थी। इस रोक को हटाकर कोड पूरी तरह से नियुक्ताओं के पक्ष में संतुलन को बदल दिया है। अभी कहां जा रहा है कि महिलाओं से रात्रि पाली में काम करने के लिए सहमति ली जाएगी।
असल में वह महिलाओं के लिए मजबूरी बनता चला जाएगा जो महिलाएं नाइट शिफ्ट करने से मना करेंगे उसे नौकरी या प्रमोशन होने का हमेशा खतरा बना रहेगा। रात्रि पाली में शारीरिक एवं मानसिक सेहत के लिए बढ़ाने वाले खतरे के साथ-साथ ड्यूटी आने जाने एवं काम के दौरान होने वाले खतरे और जोखिम भी बढ़ेंगे।
यौन उत्पीड़न की घटनाएं सबसे ज्यादा बढ़ी है मौजूदा केंद्र सरकार के राज में
मौजूदा केंद्र सरकार के राज में यौन उत्पीड़न की घटनाएं सबसे ज्यादा बढ़ी है। उद्योग के अंदर इस पर नियंत्रण करने एवं यौन उत्पीड़न की घटनाओं का सही जांच कर पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए विशाखा कमेटी भी बनाई जाती हैं।
अब सरकार जो दिन में ही महिलाओं को पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं रख पाती हैं वह रात्रि पाली में महिलाओं को ड्यूटी करवा कर क्या सुरक्षा प्रदान कर पाएगी। यह तो बहुत बड़ा सवाल है जिस पर कोड में कुछ भी नहीं कहा गया है।
क्या इस्पात भवन और कार्मिक विभाग की महिला कर्मचारी भी करेगी रात्रि पाली में ड्यूटी
संयुक्त यूनियन ने प्रचार के दौरान इस्पात भवन और कार्मिक विभाग की महिलाओं से स्पष्ट रूप से इस कानून के बारे में समझाते हुए कहा कि यह कानून केवल निजी मालिकों के लिए नहीं बल्कि जब लागू होगा तो भिलाई स्टील प्लांट का इस्पात भवन, कार्मिक विभाग एवं अन्य वह क्षेत्र जहां महिला कर्मी कार्य करते हैं अछूता नहीं रह पाएगा।
पहले तो प्रबंधन कहेगा कि रात्रि पाली के लिए हम महिलाओं से सहमति ले रहे हैं और उनके सहमति देने पर ही काम करवा रहे हैं। बाद में प्रमोशन एवं नौकरी का डर दिखाकर मजबूर किया जाएगा, जिससे इनकार नहीं किया जा सकता है।
सीआईएसएफ में महिला सुरक्षा कर्मी करते हैं रात में भी ड्यूटी
पहले संयंत्र के अंदर अलग-अलग विभागों में बने पोस्टों में सीआईएसएफ के महिला सिपाही कामगारों को 6:00 बजे के बाद ड्यूटी नहीं दिया जाता था। अब उन सीआईएसएफ के महिला सिपाही कामगारों को ना केवल 12 घंटे काम करवाया जाता है बल्कि रात को 10:00 बजे तक पोस्ट संभालते अक्सर दिख जाते हैं।
संयंत्र के अंदर चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। घटनाओं को रोकने के लिए कार्यवाही के लिए आगे बढ़े पुरुष जवानों पर हमले की घटनाएं घट चुकी हैं। ऐसे में सीआईएसएफ के महिला सिपाहियों को रात में ड्यूटी लगाना कहा तक उचित है। इसका जवाब भी ऊपर से दबाव बना रहे सरकार को ही देना होगा।











