हम भारत के लोग: प्रदर्शनकारी बोले-दिल्ली मार्च में पुलिस की बर्बरता लोकतंत्र पर गंभीर सवाल। छात्रों और नौजवानों की आवाज दबाने का प्रयास।
- छात्रों और नौजवानों के लोकतांत्रिक आंदोलनों को कुचलने के बजाय उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और संसद भवन की तरफ कूच कर रहे छात्रो पर लाठीचार्ज का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। भिलाई के युवाओं ने भी आंदोलन को अब जारी रखने का दम भरा है। दिल्ली मार्च के दौरान आंदोलनरत छात्रों और नौजवानों के साथ पुलिस द्वारा की गई कथित बर्बरता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अपने अधिकारों, शिक्षा, रोजगार और भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहे युवाओं को सुनने के बजाय उनके आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। लोकतंत्र में सरकार का दायित्व जनता की आवाज सुनना और उसकी समस्याओं का समाधान करना है, न कि सवाल पूछने वालों को रोकना।
सरकार के दावों का जवाब मांग रहा युवा वर्ग
सरकार अपने कार्यों और उपलब्धियों के जो बड़े-बड़े दावे करती है, उन पर छात्रों और नौजवानों के पास सवाल उठाने एवं जवाब देने के पर्याप्त सामग्री मौजूद हैं। आज आंदोलन कर रहे युवाओं के किसी भी महत्वपूर्ण सवाल का संतोषजनक जवाब सरकार के पास दिखाई नहीं देता। शिक्षा व्यवस्था की स्थिति, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता, पेपर लीक और रोजगार के संकट ने करोड़ों युवाओं के भविष्य को असुरक्षित बना दिया है।
जिम्मेदारी तय करने से क्यों बच रही है सरकार
सरकार हर मामले में जिम्मेदारी तय करने की बात कर रही है, लेकिन जब शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं में गंभीर खामियां सामने आती हैं, तब जिम्मेदारी तय करने के सवाल पर सरकार आनाकानी करती नजर आ रही है। यदि पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के कारण छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है, तो इसकी जवाबदेही तय होना जरूरी है। केवल बयान और आश्वासन देने से युवाओं का विश्वास वापस नहीं आएगा।
सत्ता तक पहुंचाने वाले युवाओं से ही विश्वासघात
जिन छात्रों और नौजवानों ने बेहतर भविष्य, रोजगार और बदलाव की उम्मीद में सरकार को सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, आज वही युवा अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर हैं। सत्ता में आने के बाद यदि नीतियां छात्रों और नौजवानों के हितों के विपरीत जाती हैं, तो यह लोकतांत्रिक जनादेश की भावना के साथ अन्याय है। युवाओं को रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित भविष्य देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए, जिसमें सरकार विफल रही है।
हम भारत के लोग मांग करते हैं-युवाओं के सवालों का जवाब दो
युवाओं का कहना है कि हम भारत के लोग मांग करते हैं कि छात्रों और नौजवानों के लोकतांत्रिक आंदोलनों को कुचलने के बजाय उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए। पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो, शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए और युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर सुनिश्चित किए जाएं।
सरकार पुलिस की शक्ति से नहीं, बल्कि संवाद, जवाबदेही और जनहितकारी नीतियों से जनता का विश्वास हासिल करे। देश के युवा केवल आश्वासन नहीं, अपने भविष्य के लिए ठोस कार्रवाई चाहते हैं। लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं, बल्कि नागरिकों का अधिकार है।

