निष्कासित प्रतिनिधियों की सूची शीघ्र ही प्रदेश इंटक एवं केंद्रीय इंटक को भेजी जाएगी, ताकि संगठन के विभिन्न पदों से हटाया जाए।
39 माह के एरियर एवं नई वेज कमेटी के गठन को लेकर होगा आंदोलन। रिटेंशन और लाइसेंस की उठी आवाज।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील इम्प्लाइज यूनियन (इंटक) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इंटक यूनियन छोड़कर भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) में शामिल होने वाले प्रतिनिधियों को संगठन की प्राथमिक सदस्यता एवं सभी पदों से निष्कासित किया जाता है।
यूनियन के महासचिव संजय कुमार साहू ने कहा कि जिन लोगों की संगठन के प्रति आस्था नहीं है, उनके दूसरे संगठन में जाने से इंटक और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि जिन प्रतिनिधियों की पहचान वर्षों तक इंटक यूनियन से बनी, वे व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण संगठन छोड़कर चले गए हैं। इतिहास गवाह है कि जब-जब कुछ लोग इंटक छोड़कर गए हैं, तब-तब इंटक पहले से अधिक मजबूत होकर उभरी है।
उन्होंने कहा कि आज भी भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों के बीच इंटक यूनियन श्रमिकों के हितों के लिए संघर्ष करने वाली अग्रणी यूनियन के रूप में स्थापित है। बड़ी संख्या में युवा कर्मचारी इंटक से जुड़ रहे हैं और आगामी आईडी एक्ट चुनाव में इंटक यूनियन 51 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त कर नंबर-1 यूनियन बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि निष्कासित प्रतिनिधियों की सूची शीघ्र ही प्रदेश इंटक एवं केंद्रीय इंटक को भेजी जाएगी, ताकि संगठन के विभिन्न स्तरों पर उनके पदों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
39 माह के एरियर एवं नई वेज कमेटी के गठन को लेकर होगा आंदोलन
बैठक में कर्मचारियों के लंबित 39 माह के एरियर के भुगतान तथा 1 जनवरी 2027 से नई वेज कमेटी के गठन की मांग को लेकर व्यापक आंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया। यूनियन ने कहा कि सेल प्रबंधन शीघ्र वेतन समझौता पूरा करे। कर्मचारियों में इस विषय को लेकर गहरा असंतोष है। यदि 1 जनवरी 2017 से वेतन समझौता समय पर लागू हो जाता, तो कर्मचारियों को बेसिक वेतन, महंगाई भत्ता (डीए), सीपीएफ तथा उस पर मिलने वाले ब्याज का लाभ समय पर मिलता। देरी के कारण कर्मचारियों को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है, जबकि कर्मचारी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सेल की प्रगति में योगदान दे रहे हैं।
रिटेंशन एवं लाइसेंस व्यवस्था पुनः शुरू करने की मांग
बैठक में भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन से रिटेंशन एवं लाइसेंस व्यवस्था पुनः प्रारंभ करने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारियों ने लगभग 40 वर्षों की मेहनत से संयंत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। वर्तमान में नियमित कर्मचारियों की संख्या कम होने से अनेक आवास खाली पड़े हैं। लगभग 70 वर्ष पुराने इन आवासों का रखरखाव कर्मचारियों ने अपने खर्च पर किया है तथा वे नियमित रूप से किराया, बिजली एवं पानी का भुगतान भी कर रहे हैं।
यूनियन ने आरोप लगाया कि रिटेंशन पर रह रहे कर्मचारियों से ₹24 प्रति वर्ग फुट की दर से किराया लिया जा रहा है, जबकि गैर-बीएसपी व्यक्तियों से मात्र ₹8 प्रति वर्ग फुट लिया जा रहा है। यह कर्मचारियों के साथ अन्याय है। यूनियन ने प्रबंधन से मांग की कि शीघ्र निर्णय लेकर रिटेंशन एवं लाइसेंस की व्यवस्था पुनः लागू की जाए।
बैठक में पूरन वर्मा, जी.आर. सुमन, गिरिराज देशमुख, विश्वनाथ सिंह साहू, सुरेश श्याम कुँवर, जी.के. सूर्यवंशी, शिवशंकर सिंह, रेशम राठौर, सी.पी. वर्मा, एस.बी. सिंह, रमन मूर्ति, ताम्रध्वज सिन्हा, गुरुदेव साहू, राजकुमार, दीनानाथ सिंह सार्वा, विजय कुमार विश्वकर्मा, जयराम ध्रुव, डी.पी. खरे, गोविंद राठौर, विसेंट पटेरा, राजकुमार नायर, महेश साहू, संतोष ठाकुर, मनोज कुलदीप, आनंद खालरकर, राजेंद्र, गजेंद्र, अश्वनी राठौर, किशोर प्रधान एवं डी. शंकर खिलेंद्र ठाकुर सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

