धर्मेंद्र प्रधान 31 मई 2019 से 7 जुलाई 2021 तक इस्पात मंत्री की भूमिका में थे। भिलाई दौरे पर सच्चाई को नकार गए थे मंत्री जी।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। छात्रों के आंदोलन के चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दे चुके हैं। प्रधानजी इस्पात मंत्री भी रह चुके हैं। बतौर इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल अच्छा नहीं माना जा रहा। 31 मई 2019 से 7 जुलाई 2021 तक इस्पात मंत्री की भूमिका में थे। इन्हीं के कार्यकाल में स्टील सेक्टर को स्ट्रैटेजिक (Strategic) से नॉन-स्ट्रैटेजिक(Non-Strategic) सेक्टर में डालने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी।
इसका वर्गीकरण फरवरी 2021 में अधिसूचित नई Policy के तहत आया। इस नीति के तहत इस्पात निर्माण को नॉन-स्ट्रेटेजिक सेक्टर माना गया, जिसके कारण सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात उपक्रमों जैसे कि RINL (Vizag Steel) के रणनीतिक विनिवेश (Privatization) या बंद करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
सेल के अधिकारी संघ के मुताबिक जनवरी 2021 में आरआइएनएल के Disinvestment का फैसला धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में ही हुआ था। सरकार के इस फैसले के खिलाफ स्टील एग्जीक्यूटिव फेडरेशन ऑफ इंडिया-सेफी के चेयरमैन नरेंद्र कुमार बंछोर के नेतृत्व में आरआइएनएल के अधिकारियों ने विशाखापट्टनम स्टील प्लांट को बचाने के लिए दिल्ली में धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की थी। साल 2021 से ही आरआइएनएल की ट्रेड यूनियनें सेव वाइजैग के बैनर तले लगातार धरने पर बैठे थे।
अफोर्डेबिलिटी क्लॉज पर कराई थी खुद की फजीहत
20 फरवरी 2020 को तत्कालीन इस्पात मंत्री धर्मंद्र प्रधान भिलाई स्टील प्लांट के दौरे पर आए थे। भिलाई निवास में तत्कालीन डायरेक्टर इंचार्ज अनिर्बान दासगुप्ता की मौजूदगी में मीडिया से बातचीत की थी। उस वक्त मैं नईदुनिया से बतौर सिटी चीफ प्रेस मीट में पहुंचा था। वहां, जब अफोर्डेबिलिटी क्लॉज का मुद्दा उठाया तो मंत्री जी भड़क गए थे। उन्होंने कहा-सेल में ऐसा कुछ भी नहीं है। आप गलत और अफवाह मत फैलाइए। मंत्री जी की बात सुनते ही उन्हें आइना दिखाया गया।
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बहस का टोन काफी हाई होने पर जनसंपर्क अधिकारी जैकब कुरियन बीच में आए। सबके सामने मंत्री को बता कि अभी आपने बीएसपी आफिसर्स एसोसिएशन से जो मांग पत्र लिए हैं, उसमें अफोर्डेबिलिटी क्लॉज का जिक्र है। ट्रेड यूनियन नेता लगातार ज्ञापन सौंप रहे हैं, उसमें भी इसे हटाने की मांग की गई है। इतना ही नहीं, उस समय राज्य सभा सदस्य सरोज पांडेय के सवाल पर सरकार का जवाब भी इसी अफोर्डेबिलिटी क्लॉज पर आया था। इतना सुनने के बाद मंत्री जी मुंह ही देखते रह गए थे।
यूनियन ने मंत्री जी को दिखाया था आइना
21 फरवरी को हिंदुस्तान स्टील एम्पलाइज यूनियन-सीटू ने SAIL के शेयरों के विनिवेश के विरोध तथा वेतन समझौते से ‘अफोर्डेबिलिटी क्लॉज’ (वहनीयता प्रावधान) को वापस लेने की मांग के संबंध में ज्ञापन सौंपा था। सरकार द्वारा वेतन समझौते पर लगाया गया ‘अफोर्डेबिलिटी क्लॉज’ (वहनीयता प्रावधान) SAIL के कर्मचारियों के बीच असंतोष का कारण बना हुआ था।
उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए धर्मेंद्र प्रधान से अनुरोध किया गया था कि वेतन समझौते से ‘अफोर्डेबिलिटी क्लॉज’ को हटाने की पहल करें तथा सरकार द्वारा SAIL के शेयरों के विनिवेश अथवा बिक्री की किसी भी योजना को रोकें।
जानिए कब-क्या हुआ था
- बीएसपी आफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार बंछोर के अनुसार अफोर्डेबिलिटी क्लॉज की वजह से वेतन समझौता रुका हुआ था। लगातार तीन साल घाटे में रहने पर वेतन समझौता रोक दिया गया था।
- सेफी और बीएसपी ओए ने जुलाई 2019 में ही अफोर्डेबिलिटी क्लॉज का मुददा उठाया था। उसी समय माइंस मटेरियल को बेचकर प्रॉफिट में लाने का सुझाव भी धर्मेंद्र प्रधान को दिया था।
- अप्रैल 2018 से 2021 में सेल प्रॉफिट में आया, जिसके चलते पे-रिवीजन के लिए एमओयू हो सका।
- धर्मेंद्र प्रधान के बाद आरसीपी सिंह इस्पात मंत्री बने थे। इन्हीं के कार्यकाल में पे-रिवीजन हुआ था।
- आरसीपी सिंह के समय सेल पेंशन, पे रिवीजन नवंबर 2021 में घोषित हुआ। सितंबर 2021 में करीब 2 हजार करोड़ रुपए कार्मिकों का एनपीएस खाते में भेजा गया। अधिकारियों को 2007 और कर्मचारियों को 2012 से अधिकार मिला।
- सेल में आयरन ओर फाइंस बेचकर प्रॉफिट बढ़ाने का श्रेय धर्मेंद्र प्रधान को ही जाता है। माइंस का फाइंस बेचने का फैसला फैसला प्रधान ने कराया था। इसका फायदा ये था कि 2019-20 में सेल का पीबीटी बढ़ा, जिससे वेज रिवीजन का रास्ता खुल गया।
- इक्वल लीव और पदनाम का मुद्दा हल कराया था। पेट्रोलियम में पदनाम का लाभ दिलाए थे। पेट्रोलियम का अनुभव काम आया और सेल में बिना पैसा बढ़ाए पदनाम बदलने की घोषणा हुई थी।

