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कर्मचारियों के राष्ट्रीय मंच से Corporate-सांप्रदायिक गठजोड़ के खिलाफ प्रस्ताव पारित, सरकार पर गुस्सा

Azmat ali 12/09/2025 (Last updated: 12/09/2025) 1 minute read
Resolution passed against Corporate-Communal Nexus from the Platform of Steel Workers Federation of India, anger on the Government 1

सार्वजनिक संसाधनों की लूट, सरकारी संपत्तियों का निजीकरण, भ्रष्टाचार, असहमति के ख़िलाफ़ कठोर क़ानून पर ये बात आई।

  • ग्लोबल हंगर इंडेक्स के अनुसार, भारत 111वें स्थान पर है।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। राउरकेला में स्टील वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया-एसडब्ल्यूएफआई का 10वां खास रहा। कर्मचारियों के लिए कई प्रस्ताव पारित किए। एक-एक कर मुद्दे कर्मचारियों के बीच साझा किए जा रहे हैं।

सम्मेलन में हिस्सा लेकर भिलाई लौटे सीटू नेता एसपी डे ने विस्तार से प्रस्ताव को साझा किया। सम्मेलन में नेताओं ने कहा-2014 में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार की जीत के बाद से, भारत में बड़े कॉर्पोरेट्स और सांप्रदायिकता के बीच एक खतरनाक गठजोड़ लगातार बढ़ता जा रहा है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारतीय जनता पार्टी सरकार की नवउदारवादी आर्थिक नीतियों ने देश का शासन कॉर्पोरेट्स के हाथों में सौंप दिया है, जिससे अभूतपूर्व असमानता को बढ़ावा मिला है।

साथ ही, सांप्रदायिक राजनीति, आक्रामक राष्ट्रवाद और अल्पसंख्यकों पर हमलों के ज़रिए भय का माहौल बनाया गया है। इस प्रकार, मोदी सरकार के शासन में दो प्रवृत्तियाँ एक साथ दिखाई दे रही हैं: देश के संसाधनों का बड़े व्यवसायों को बेरहमी से सौंपना और हिंदुत्व विचारधारा का आक्रामक प्रचार।

इन दोनों ने मिलकर हमारे गणतंत्र की धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और बहुलवादी बुनियाद को नष्ट कर दिया है। सार्वजनिक संसाधनों की लूट, सरकारी संपत्तियों का निजीकरण, राजनीतिक भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद, असहमति के ख़िलाफ़ कठोर क़ानून और विपक्षी आवाज़ों का निर्मम दमन, ये सभी इस खतरनाक कॉर्पोरेट सांप्रदायिक गठजोड़ के लक्षण हैं।

कई नीति ने संविधान के चार स्तंभों पर गंभीर प्रहार किया है। ये स्तंभ हैं धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र, संघीय ढांचा, सामाजिक न्याय और आर्थिक संप्रभुता। इस नीति के प्रभुत्व में, सांप्रदायिक शक्ति हमारे सामाजिक-आर्थिक जीवन के हर क्षेत्र में घुसपैठ कर चुकी है।

नेताओं ने कहा-कॉरपोरेट ताकतें, सांप्रदायिक शक्तियों के साथ मिलकर, साल भर चुनावों पर भारी मात्रा में धन खर्च कर रही हैं, चुनाव से पहले सांप्रदायिक राजनीति फैलाने के लिए मीडिया का इस्तेमाल कर रही हैं। परिणामस्वरूप, सामाजिक शक्ति पर कॉरपोरेट ताकतों का कब्जा हो रहा है और इस देश की संपत्ति लूटी जा रही है। जीएसटी जैसे अप्रत्यक्ष करों ने आम लोगों पर बोझ बढ़ा दिया है।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट में भारत 111वें स्थान पर

ग्लोबल हंगर इंडेक्स के अनुसार, भारत 111वें स्थान पर है-यह दर्शाता है कि यह कॉर्पोरेट-संचालित नीति मेहनतकश लोगों के प्रति कितनी अमानवीय रही है। अति-राष्ट्रवादी राजनीति, कॉर्पोरेट-हितैषी नीतियां, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और किसान-विरोधी, मजदूर-विरोधी उपाय देश को तबाह कर रहे हैं। ग्रामीण गरीबी और बेरोजगारी चिंताजनक रूप से बढ़ी है।कुपोष

ण, भुखमरी और खाद्यान्न की कमी में तेज़ी से वृद्धि हुई है, जबकि कॉर्पोरेट परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण ने बड़ी संख्या में किसानों और आदिवासियों को विस्थापित किया है। नवउदारवादी पूंजीवाद के वैचारिक वर्चस्व ने देश की आत्मनिर्भरता को कमज़ोर किया है।

असमानता, बेरोज़गारी, मुद्रास्फीति

एसडब्ल्यूएफआई नेताओं ने कहा-बढ़ती असमानता, बेरोज़गारी, मुद्रास्फीति और ईंधन व खाद्यान्न जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण, देश के समग्र विकास को जानबूझकर खतरे में डाला गया है। मज़दूर वर्ग, किसान, आदिवासी समुदाय और गरीब अभूतपूर्व हमलों का सामना कर रहे हैं, जबकि सरकार के ख़िलाफ़ प्रतिरोध मज़बूत होता जा रहा है।

मज़दूर आंदोलन और किसान संघर्ष

देश भर के मज़दूर आंदोलन और किसान संघर्ष इन कॉर्पोरेट-हितैषी, जनविरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ एकजुट हो रहे हैं। नवउदारवाद के ख़िलाफ़ एकजुट संघर्षों को तेज़ करने के प्रयासों के साथ-साथ, हमें वर्तमान शासन के पीछे छिपे कॉर्पोरेट-साम्प्रदायिक गठजोड़ को उजागर करना होगा और मज़दूर वर्ग व मेहनतकश जनता के सभी वर्गों को इसके ख़िलाफ़ लामबंद करना होगा।

विभाजनकारी षड्यंत्रों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील

इस सम्मेलन का मानना है कि नवउदारवाद के ख़िलाफ़ एकजुट संघर्षों को तेज़ करने के लिए पूरे मज़दूर वर्ग और मेहनतकश जनता को एकजुट करने के हमारे प्रयासों की सफलता, शासक वर्गों द्वारा प्रचारित इन विभाजनकारी षड्यंत्रों का सफलतापूर्वक मुक़ाबला करने के हमारे प्रयासों पर निर्भर करेगी।

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