Rourkela Steel Plant: इस्पात नगरी में डायरेक्टर इंचार्ज संग कार्मिकों ने की गणेश जी पूजा

Rourkela Steel Plant Employees Along with Director Incharge Performed Ganesh Puja in The Steel City
  • मूर्तियों को घरों में अलंकृत वेदियों पर और साथ ही बाहरी मंडपों में भव्य रूप से स्थापित किया गया। अनुष्ठानों के साथ पूजा की गई।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल के राउरकेला स्टील प्लांट के अधिकारियों और कर्मचारियों ने गणेश पूजा की। इस्पात नगरी के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और अन्य संगठनों में गणेश चतुर्थी हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाई गई।

राउरकेला इस्पात सयंत्र के निदेशक प्रभारी आलोक वर्मा ने पूजा समारोह में भाग लिया और सेक्टर-18 स्थित दीपिका इस्पात शिक्षा सदन में भगवान विनायक को पुष्पांजलि अर्पित की। उनके साथ दीपिका महिला संघति की अध्यक्षा नम्रता वर्मा, कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) तरुण मिश्रा, कार्यपालक निदेशक (वर्क्स), विश्व रंजन पलाई, कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन), अनिल कुमार, कार्यपालक निदेशक (खान), एमपी सिंह, कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं), सुदीप पाल चौधरी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं), डॉ. जेके आचार्य, मुख्य महाप्रबंधक (वित्त एवं लेखा) राजेश दासगुप्ता,डीएमएस की सभी उपाध्यक्षाएँ, प्रवती मिश्रा, प्रतिज्ञा पलई, बंदना सिंह, रीता रानी, नवनीता पाल चौधरी और प्लांट के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

Vansh Bahadur

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इसके बाद, वरिष्ठ अधिकारियों ने सेक्टर-19 स्थित इस्पात विद्या मंदिर, सेक्टर-20 स्थित इस्पात इंग्लिश मीडियम स्कूल और सेक्टर-22 स्थित इस्पात इंग्लिश मीडियम स्कूल में पूजा-अर्चना की। दीपिका महिला संघति की अध्यक्षा, उपाध्यक्षाएँ, और शासी निकाय के सदस्यों द्वारा सेक्टर-5 स्थित बिगिनर्स अकादमी में भी इसी प्रकार की पूजा अर्चना की गई।

इस्पात नगरी के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में भी गणेश पूजा उत्साह और उमंग के साथ मनाई गई, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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उल्लेखनीय है कि गणेश चतुर्थी हिंदू पंचांग के भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है। यह भारत के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। पारंपरिक कारीगरों द्वारा मूर्तियों का निर्माण त्योहार से महीनों पहले शुरू हो जाता है।

मूर्तियों को घरों में अलंकृत वेदियों पर और साथ ही बाहरी मंडपों में भव्य रूप से स्थापित किया जाता है, और धूमधाम और अनुष्ठानों के साथ उनकी पूजा की जाती है।

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