मजदूर विरोधी बोनस पर सीटू ने किया बोरिया गेट पर प्रदर्शन और गेट मीटिंग। बोनस समझौते पर साइन करने वालों पर उठाए सवाल।
- सीटू ने सवाल किया कि कहीं सीटू के बहिष्कार के नाम पर उन श्रमिकों की आवाज का ही बहिष्कार न शुरू कर दिया जाए, जो बोनस फार्मूले पर सवाल उठा रहे हैं।
- सवाल यह है कि जब फार्मूला ही उचित है तो उसमें सुधार की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है और यदि वह गलत है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल बोनस समझौते के खिलाफ सीटू ने सभी प्लांट में विरोध-प्रदर्शन किया। 1 अक्टूबर को दिल्ली में हुए बोनस/एपीएलआईएस की बैठक मे सीटू ने शुरू में हुए सभी यूनियन की बैठक में ही अपनी बात को स्पष्ट रूप से कह दिया था। किंतु बोनस की बैठक में जो भी घटनाक्रम हुआ और जो निर्णय हुए उसका विरोध करते हुए 3 अक्टूबर को स्टील वर्कर्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया आह्वान पर सेल के सभी इकाइयों में सीटू के यूनियनों द्वारा विरोध प्रदर्शन एवं गेट मीटिंग किया गया, जिसके तहत भिलाई के बोरिया गेट में भी विरोध प्रदर्शन किया गया।
बोनस फार्मूले पर सीटू का स्पष्ट विरोध
महासचिव टी. जोगा राव का कहना है कि सीटू/एसडब्ल्यूएफआई ने वर्ष 2023 से ही एपीएलआईएस /बोनस फार्मूले पर अपनी आपत्ति स्पष्ट रूप से दर्ज कराई है। इस बार की बोनस वार्ता में भी सीटू ने प्रबंधन के समक्ष फार्मूले की खामियों को मजबूती से उठाया और श्रमिकों के हितों के मद्देनजर फार्मूले के आधार पर निर्धारित राशि को स्वीकार करने के बजाय उचित बोनस की मांग की। सीटू का स्पष्ट मत रहा है कि ऐसा फार्मूला, जो कर्मियों के वास्तविक योगदान और कंपनी के प्रदर्शन के अनुरूप बोनस सुनिश्चित नहीं करता, उस पर पुनर्विचार आवश्यक है।
फार्मूले पर हस्ताक्षर करने वाली यूनियनों की जवाबदेही
23 मार्च 2023 को तीन यूनियनों द्वारा एपीएलआईएस फार्मूले पर सहमति व्यक्त करते हुए समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। सीटू ने तब भी इसका विरोध किया और आज भी अपनी आपत्ति कायम रखी है। इस बार सीटू को उम्मीद थी कि फार्मूले पर हस्ताक्षर करने वाली यूनियनें अपने पूर्व निर्णय की समीक्षा कर श्रमिकों के पक्ष में खड़ी होंगी। लेकिन बोनस वार्ता शुरू होते ही सीटू को छोड़कर हस्ताक्षर किए हुए तीनों यूनियनों के साथ साथ चौथी यूनियन भी फार्मूले का बचाव करती दिखाई दीं। इसलिए अब सवाल यह है कि जब फार्मूला ही उचित है तो उसमें सुधार की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है और यदि वह गलत है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
प्रबंधन द्वारा तय की गई राशि के सामने सीटू का रुख
बोनस वार्ता में प्रबंधन निर्धारित फार्मूले के आधार पर तय की गई राशि पर कायम रहा। सीटू ने इस स्थिति को स्वीकार करने के बजाय फार्मूले पर आपत्ति दर्ज कराते हुए श्रमिकों के हित में अधिक न्यायसंगत बोनस की मांग रखी। सीटू का कहना है कि त्योहारी समय में कर्मियों की भावनाओं और पूरे वर्ष किए गए उनके श्रम को ध्यान में रखते हुए बोनस तय होना चाहिए। केवल बहुमत की राय के आधार पर समझौता कर देना श्रमिकों की सभी आपत्तियों का समाधान नहीं माना जा सकता।
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‘सीटू के बहिष्कार’ से नहीं दबेगा श्रमिकों का मुद्दा
सीटू नेताओं ने कहा कि यदि किसी यूनियन को सीटू की भूमिका पर आपत्ति है तो उसका उत्तर तर्क और तथ्यों से दिया जाना चाहिए। सीटू का बहिष्कार करने की बात करने से बोनस फार्मूले की खामियां समाप्त नहीं हो जाएंगी। सीटू भिलाई सहित सेल की अन्य इकाइयों में भी कर्मियों के बीच काम करता है और बोनस सहित श्रमिक हितों के सवालों को उठाता रहा है। सीटू ने सवाल किया कि कहीं सीटू के बहिष्कार के नाम पर उन श्रमिकों की आवाज का ही बहिष्कार न शुरू कर दिया जाए, जो बोनस फार्मूले पर सवाल उठा रहे हैं।
बोनस पर जवाबदेही और आगे का संघर्ष
सीटू ने कहा कि ट्रेड यूनियन नेतृत्व की पहली जवाबदेही कर्मियों के प्रति होती है। बोनस वार्ता में किस यूनियन ने क्या मांग रखी, किस फार्मूले का समर्थन या विरोध किया और अंतिम समझौते तक किसने क्या रुख अपनाया। यह जानकारी कर्मियों के सामने स्पष्ट रूप से रखी जानी चाहिए। सीटू बोनस के सवाल पर संयुक्त प्रयासों के साथ-साथ स्वतंत्र संघर्ष के लिए भी तैयार है। सीटू का आह्वान है कि कर्मियों को भ्रमित करने वाली बयानबाजी के बजाय बोनस फार्मूले की वास्तविक स्थिति पर खुली चर्चा हो और मजदूर विरोधी प्रावधानों के खिलाफ सामूहिक आवाज मजबूत की जाए।
