कन्वेंशन में मांग उठी कि पे रिविजन वार्ता में अब और देरी न करें। कर्मचारियों के वेतन पुनरीक्षण की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने की मांग की गई।
सूचनाजी न्यूज, बोकारो। सेल और आरआईएनएल के श्रमिकों की वर्षों से लंबित मांगों को लेकर पिछले एक माह से चल रहे मजदूर जागरण अभियान के तहत 30 अगस्त 2026 को बोकारो में संयुक्त कन्वेंशन आयोजित किया गया। कन्वेंशन में श्रमिक संगठनों ने प्रबंधन के रवैये पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लंबे समय से मजदूरों की मांगें लंबित हैं, लेकिन सेल प्रबंधन और विशाखापत्तनम स्टील प्लांट (RINL) प्रबंधन समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं कर रहे हैं। सेल कर्मचारियों को बकाया 39 माह का एरियर तक नहीं दिया गया है।
श्रमिक नेताओं ने आरोप लगाया कि NJCS की बैठक तक नियमित रूप से नहीं बुलाई जा रही है और मजदूरों की प्रमुख समस्याओं पर प्रबंधन की गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है। कन्वेंशन में ऐलान किया गया कि जरूरत पड़ी तो आंदोलन को सेल की सभी इकाइयों तक ले जाया जाएगा और एक साथ हड़ताल की रणनीति भी बनाई जाएगी।
कोक ओवन से ब्लास्ट फर्नेस तक चला मजदूर जागरण अभियान
बोकारो स्टील प्लांट के विभिन्न विभागों में पिछले एक माह के दौरान संयुक्त मजदूर जागरण अभियान चलाया गया। कोक ओवन, सिंटर प्लांट, RMHP, RMP, ब्लास्ट फर्नेस, SMS, CRM, हॉट स्ट्रिप मिल, मशीन शॉप, कैंटीन, CCS और BGH समेत कई स्थानों पर बड़ी श्रमिक सभाएं हुईं। इन बैठकों में कर्मचारियों ने श्रमिक नेताओं के सामने अपनी समस्याएं रखीं और लंबित मुद्दों पर अब निर्णायक संघर्ष शुरू करने की मांग की।
पे रिविजन की वार्ता तुरंत शुरू करने की मांग
कन्वेंशन में मांग उठी कि पे रिविजन के लिए वार्ता में अब और देरी नहीं होनी चाहिए। कर्मचारियों के वेतन पुनरीक्षण की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने की मांग की गई।
इसके साथ ही 39 माह के एरियर का भुगतान करने की मांग भी प्रमुखता से उठी। श्रमिक नेताओं ने कहा कि MOM तथा मुख्य श्रम आयुक्त, नई दिल्ली के परामर्श के अनुसार एरियर का भुगतान तत्काल किया जाना चाहिए।
चार लेबर कोड के खिलाफ मजदूरों का आक्रोश
कन्वेंशन में 29 श्रम कानूनों की जगह चार लेबर कोड बनाए जाने का भी जोरदार विरोध किया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि नए श्रम कानूनों से मजदूरों के बुनियादी अधिकार कमजोर होंगे और श्रमिकों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। सभा में इसे मजदूर विरोधी कानून बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की गई।
ग्रेच्युटी और NJCS को लेकर भी नाराजगी
श्रमिक नेताओं ने मांग रखी कि ग्रेच्युटी की सीमा को पूर्व की तरह NJCS समझौते के अनुरूप यथावत रखा जाए। साथ ही NJCS को पहले की तरह सम्मान देने और श्रमिकों की प्रमुख समस्याओं के समाधान के लिए इसकी बैठकें नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की गई।
ठेका मजदूरों के मुद्दे पर प्रबंधन को घेरा
कन्वेंशन में ठेका श्रमिकों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। मांग की गई कि ठेका मजदूरों के बैंक खाते में भेजी गई राशि को ठेकेदार वापस न ले सके। ठेकेदार बदलने की स्थिति में भी बिना ठोस कारण के कार्यरत ठेका श्रमिकों को हटाने पर रोक लगाने की मांग की गई।
श्रमिक नेताओं ने 2008 में एटक यूनियन के साथ हुए समझौते को मजबूती से लागू करने की मांग की। उनका कहना था कि ठेका श्रमिकों के हितों की रक्षा से प्लांट के उत्पादन, उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार के साथ लागत में कमी और दुर्घटनाओं में भी कमी लाई जा सकती है।
40 प्रतिशत ठेका मजदूरों की कमी के फरमान का विरोध
कन्वेंशन में इस्पात सचिव के उस कथित निर्देश का विरोध किया गया, जिसमें आगामी वित्तीय वर्ष में ठेका मजदूरों की संख्या में 40 प्रतिशत कमी किए जाने की बात कही गई है। श्रमिक नेताओं ने इस पर रोक लगाने की मांग की।
वक्ताओं ने आशंका जताई कि ठेका श्रमिकों की संख्या में इतनी बड़ी कटौती से प्लांट के संचालन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने इसे प्लांट को निजी कॉर्पोरेट हाथों में सौंपने की दिशा में उठाया गया कदम बताया।
खाली आवासों को लाइसेंस पर देने की मांग
बोकारो टाउनशिप में खाली पड़े आवासों का मुद्दा भी कन्वेंशन में उठा। मांग की गई कि सभी खाली आवासों को लाइसेंस पर नाममात्र किराये में दिया जाए। नेताओं का कहना था कि इससे आवासों और अन्य परिसंपत्तियों की सुरक्षा होगी, सेल/बीएसएल को आर्थिक लाभ मिलेगा और सेक्टरों में अपराध की घटनाओं में भी कमी आ सकती है।
पानी और जर्जर सड़कों की समस्या भी उठी
सिंटर प्लांट के मजदूरों ने प्रमुख स्थानों पर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने की मांग रखी। कोक ओवन, RMP और RMHP के कर्मचारियों ने भी बैठकों के दौरान पानी की समस्या उठाई। कर्मचारियों ने अपनी आशंका जताई कि पीने के नलों में औद्योगिक पानी की आपूर्ति की जा रही है।
वहीं कोक ओवन, RMHP, सिंटर प्लांट और RMP के मजदूरों ने प्लांट के अंदर जर्जर सड़कों की समस्या भी नेताओं के सामने रखी। इसे प्राथमिकता के आधार पर ठीक कराने की मांग की गई।
BGH में स्टाफ की कमी से लेकर दवा वितरण तक सवाल
बोकारो जनरल अस्पताल (BGH) में पारा मेडिकल स्टाफ और नर्सों की कमी दूर करने की मांग उठी। सफाई कर्मचारियों की लंबित मांगों के समाधान की भी मांग की गई।
दवा वितरण व्यवस्था में फार्मासिस्टों की कमी का मुद्दा भी सामने आया। बताया गया कि फार्मासिस्टों की कमी के कारण कुछ हेल्थ सेंटरों में प्रथम पाली में सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक और कुछ जगह शाम 5 से 6 बजे तक ही दवा वितरण करने की मजबूरी है।
सेक्टर-12 आवास हादसे पर जताई नाराजगी
सेक्टर-12 में आवास गिरने की घटना पर कन्वेंशन में मौजूद नेताओं ने नाराजगी जताई। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए NJCS यूनियनों और प्रबंधन की संयुक्त समिति गठित करने की मांग की गई।
चार यूनियनों के नेताओं ने संभाला अध्यक्ष मंडल
संयुक्त कन्वेंशन के अध्यक्ष मंडल में बीएन उपाध्याय (इंटक), राम आगर सिंह (एटक), आरएन सिंह (सीटू) और आरके वर्मा (एचएमएस) शामिल रहे। कन्वेंशन के संयोजक रामाश्रय प्रसाद सिंह ने आयोजन के महत्व और आगे के संघर्ष की रूपरेखा रखी, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। मुख्य वक्ताओं में बीएन चौबे (इंटक), रामाश्रय प्रसाद सिंह (एटक), आरके गोराई (सीटू) और राजेंद्र प्रसाद सिंह (एचएमएस) शामिल रहे। वक्ताओं ने एक स्वर में प्रबंधन के मजदूर विरोधी और NJCS विरोधी रवैये को गंभीरता से लेने की अपील की।
अब सभी प्लांटों में आंदोलन ले जाने का संकल्प
कन्वेंशन में फैसला लिया गया कि मजदूर जागरण अभियान को अब सेल की सभी इकाइयों और प्लांटों तक ले जाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर सेल की सभी यूनिटों में एक साथ हड़ताल की रणनीति तैयार करने का भी संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत नेपाल में आई बाढ़ से हुई जन-धन की भारी क्षति पर शोक व्यक्त करते हुए एक मिनट का मौन रखकर की गई।
इस दौरान इंटक की ओर से केशव और अनिल कुमार तिवारी, एटक की ओर से निषाद, प्राण सिंह और आईडी प्रसाद, सीटू की ओर से इम्तियाज अंसारी, एचएमएस की ओर से अमित कुमार सिंह, एटक के आरआर दास तथा RMP से संजीव कुमार पोद्दार समेत अन्य नेताओं ने विचार रखे।
खान एवं खनिज संशोधन विधेयक का भी विरोध
कन्वेंशन में संसद में पेश खान और खनिज संशोधन विधेयक 2026 का पुरजोर विरोध करने का प्रस्ताव पारित किया गया। इंटक के बीएन उपाध्याय ने प्रस्ताव पेश करते हुए आरोप लगाया कि यह विधेयक बड़े कॉर्पोरेट घरानों को माइंस सौंपने की दिशा में उठाया गया कदम है।
BSL में सेफ्टी पर भी उठी आवाज
बोकारो स्टील प्लांट में दुर्घटनाओं और सेफ्टी को लेकर भी प्रस्ताव रखा गया। एटक के आईडी प्रसाद ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि प्रशिक्षित ठेका मजदूरों के गेट पास नहीं बनाए जाने और उनकी जगह नए लोगों को काम पर लाने की समस्या गंभीर है। उन्होंने प्रशिक्षित श्रमिकों को हटाकर नए लोगों को लाने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की।
संयुक्त कन्वेंशन से साफ संदेश गया कि लंबित वेतन पुनरीक्षण, 39 माह का एरियर, ठेका मजदूरों के अधिकार, सुरक्षा, आवास, अस्पताल और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर अब श्रमिक संगठन केवल मांग पत्र तक सीमित रहने के मूड में नहीं हैं। नेताओं ने संघर्ष को प्लांट स्तर से उठाकर सेल की सभी इकाइयों तक ले जाने का ऐलान किया है।
