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SAIL प्रबंधन SESBF ट्रस्ट का संरक्षक है, मालिक नहीं, मामला कोर्ट में, BAKS बोला-कर्मचारियों से पूछे बगैर NPS में पैसा न भेजें

Azmat ali 26/02/2026 1 minute read
SAIL Management is the Custodian of the SESBF Trust, Not the Owner the Matter is in Court BAKS Said, Dont Send Money to NPS Without Consulting Employees

बीएकेएस बोकारो ने ईडी को पत्र लिखा। एसईएसबीएफ में जमा राशि का निवेश कर्मचारियों की सहमति से ही एनपीएस में करे सेल प्रबंधन।

  • सेल कर्मियों से संबंधित अधिकांश समितियों एवं ट्रस्टों में कथित कर्मचारी प्रतिनिधियों की नियुक्ति सदस्यता सत्यापन के बिना की गई है।

सूचनाजी न्यूज, बोकारो। बीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ ने एसईएसबीएफ ट्रस्ट के चेयरमैन सह अधिशासी निदेशक (एचआर) राजीव पाण्डेय को पत्र लिखकर मांग की है कि एसईएसबीएफ ट्रस्ट में कर्मचारियों के जमा धन को एनपीएस में निवेश करने से पहले कर्मचारियों की लिखित सहमति अनिवार्य रूप से ली जाए।

2 फरवरी 2026 को कोलकाता में एसईएसबीएफ ट्रस्ट की 50वीं ट्रस्टी बैठक तथा 86वीं मैनेजिंग ट्रस्टी बैठक आयोजित की गई थी। संघ का आरोप है कि इस बैठक में अव्यवहारिक एवं त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया के तहत निर्णय लिया गया।
संघ ने निम्न बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई है

1. कर्मचारियों की सहमति के बिना एनपीएस में हस्तांतरण का निर्णय
संघ का कहना है कि एसईएसबीएफ ट्रस्ट में जमा राशि कर्मचारियों के वेतन से की गई कटौती का हिस्सा है। ऐसे में उनकी सहमति या असहमति जाने बिना तथा कथित रूप से गैर-निर्वाचित एवं गैर-मान्यता प्राप्त यूनियन प्रतिनिधियों की सहमति के आधार पर इस राशि को नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में हस्तांतरित करने का निर्णय पूर्णतः एकतरफा एवं तानाशाहीपूर्ण है।

2. सरकार की पूर्व गाइडलाइन का उल्लेख
बैठक की कार्यवाही (मिनट्स) में उल्लेख है कि एसईएसबीएफ का गठन वर्ष 1989 में सेल कार्मिकों को अतिरिक्त पेंशन प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया था। बाद में सरकारी दिशा-निर्देशों तथा सेल पेंशन ट्रस्ट के गठन के पश्चात एसईएसबीएफ फंड को निवेश फंड के रूप में परिवर्तित किया गया। संघ का कहना है कि ऐसे में एकतरफा निर्णय लेकर जमा राशि को एनपीएस में स्थानांतरित करना उचित नहीं है।

3. जमा धन पर कर्मचारियों का पूर्ण अधिकार
संघ के अनुसार एसईएसबीएफ ट्रस्ट में जमा धन शत-प्रतिशत कर्मचारियों का है, जो उनके वेतन से कटौती कर एकत्र किया गया है। इसमें सेल या उसकी इकाई प्रबंधन का कोई योगदान नहीं है। अतः इस धन के निवेश से संबंधित निर्णय कर्मचारियों की सहमति के बाद ही लिया जाना चाहिए।

1. दोहरे मापदंड का आरोप
संघ ने कहा कि अप्रैल 2026 से बेसिक वेतन/डीए के 2% अंशदान को एनपीएस में जमा करने के लिए कर्मचारियों से सहमति लेने की बात कही जा रही है, जबकि पूर्व में जमा अंशदान को बिना सहमति एनपीएस में भेजने का निर्णय लिया गया है। इसे दोहरा मापदंड बताया गया है।

2. ट्रस्ट में अवैध प्रतिनिधित्व का आरोप
यूनियन का कहना है कि 2 फरवरी 2026 की बैठक में शामिल 15 यूनियन प्रतिनिधियों में से केवल 3 ही निर्वाचित एवं मान्यता प्राप्त यूनियनों के प्रतिनिधि बताए गए हैं, जो राउरकेला इस्पात संयंत्र, वीआईएसएल भद्रावती और सलेम इस्पात संयंत्र से हैं। शेष 12 प्रतिनिधियों के बारे में संघ का आरोप है कि वे न तो निर्वाचित हैं और न ही उनकी यूनियन मान्यता प्राप्त है।

संघ का यह भी कहना है कि अब तक सेल स्तर पर सभी यूनियनों का सदस्यता सत्यापन नहीं हुआ है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि किस यूनियन के पास कितने सदस्य हैं। यही स्थिति तीनों मैनेजिंग ट्रस्टियों के संदर्भ में भी बताई गई है।

मामला दिल्ली उच्च न्यायालय में विचाराधीन
संघ ने यह भी उल्लेख किया है कि एनजेसीएस में मनोनीत एवं गैर-निर्वाचित यूनियन प्रतिनिधियों का मामला दिल्ली उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। वहीं बोकारो, भिलाई तथा इस्को बर्नपुर की मान्यता प्राप्त यूनियनों से संबंधित मामले क्रमशः झारखंड उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं कोलकाता उच्च न्यायालय में लंबित हैं।

संघ का दावा है कि वर्तमान एसईएसबीएफ ट्रस्ट में कथित रूप से अवैध यूनियन प्रतिनिधियों की बहुलता है, इसलिए उनके द्वारा लिया गया निर्णय भी अवैध माना जाना चाहिए। इस संबंध में पत्र की प्रतिलिपि सेल चेयरमैन, निदेशक (वित्त) तथा इस्पात सचिव को भी प्रेषित की गई है।

प्रबंधन केवल संरक्षक की भूमिका में है, मालिक नहीं
बीएकेएस यूनियन ने स्पष्ट किया है कि एसईएसबीएफ ट्रस्ट में जमा धन पूर्णतः कर्मचारियों का है और प्रबंधन केवल संरक्षक की भूमिका में है, मालिक की नहीं। अतः एनपीएस में राशि स्थानांतरित करने से पूर्व कर्मचारियों से लिखित सहमति ली जाए, अन्यथा यूनियन ट्रस्टियों के विरुद्ध न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होगी।

निर्णय मनमाने ढंग से लेने का अधिकार नहीं
बीएकेएस बोकारो के अध्यक्ष हरिओम ने कहा कि सेल कर्मियों से संबंधित अधिकांश समितियों एवं ट्रस्टों में कथित कर्मचारी प्रतिनिधियों की नियुक्ति सदस्यता सत्यापन के बिना की गई है। उन्होंने कहा कि एसईएसबीएफ में जमा धन कर्मचारियों का है और प्रबंधन को इसके निवेश संबंधी निर्णय मनमाने ढंग से लेने का अधिकार नहीं है।

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