महासचिव प्रशांत कुमार बेहरा ने कहा कि राउरकेला स्टील प्लांट के कर्मचारी भारी दबाव में काम कर रहे हैं। आंदोलन की चेतावनी।
- इस्पात सचिव को लेकर इंटक का बड़ा दावा, राउरकेला में प्रेस कांफ्रेंस कर लगाए गंभीर आरोप।
- 9 वर्ष 6 माह बीत जाने के बाद भी पूर्ण वेतन समझौता अधूरा।
- Pay Scale, Night Shift Allowance और House Rent जैसे मुद्दे लंबित पड़े हैं।
सूचनाजी न्यूज, राउरकेला। सेल के राउरकेला स्टील प्लांट की मान्यता प्राप्त यूनियन इंटक से संबद्ध राउरकेला श्रमिक संघ ने इस्पात सचिव की कार्यशैली को लेकर बड़ा दावा किया है। यूनियन ने प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाया कि इस्पात सचिव की नीतियों से कर्मचारियों में असंतोष और असुरक्षा बढ़ रही है तथा राउरकेला स्टील प्लांट को निजीकरण की दिशा में धकेला जा रहा है।
यूनियन के महासचिव प्रशांत कुमार बेहरा ने कहा कि राउरकेला स्टील प्लांट इस समय विस्तार परियोजना के महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। उत्पादन क्षमता को 4.5 मिलियन टन से बढ़ाकर 9.8 मिलियन टन करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए भूमि चिह्नांकन, बस्ती हटाने और विस्थापितों के पुनर्वास का काम जारी है। राउरकेला श्रमिक संघ ने शुरू से विस्तार परियोजना का समर्थन किया है, क्योंकि इससे शहर और संयंत्र के विकास की उम्मीद है।
हालांकि यूनियन ने आरोप लगाया कि दूसरी ओर इस्पात सचिव की “श्रमिक विरोधी नीतियों” के कारण कर्मचारियों पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। प्रेस कांफ्रेंस में कहा गया कि उत्पादन बढ़ने के बावजूद कर्मचारियों की संख्या घटाई जा रही है, जिससे कर्मियों को असहनीय कार्यभार झेलना पड़ रहा है।
“इस्पात मंत्री केवल नाम के, सचिव ही सर्वेसर्वा”
राउरकेला श्रमिक संघ ने दावा किया कि वर्तमान में मंत्रालय में इस्पात सचिव ही पूरी व्यवस्था नियंत्रित कर रहे हैं। यूनियन नेताओं ने कहा कि संसद में जब श्रमिकों के मुद्दे उठते हैं तो इस्पात मंत्री द्वारा एनजेसीएस मंच पर निर्णय की बात कही जाती है, लेकिन पिछले ढाई वर्षों से एनजेसीएस की बैठक तक नहीं बुलाई गई।
यूनियन ने वेतन समझौते में देरी पर भी नाराजगी जताई। कहा गया कि 9 वर्ष 6 माह बीत जाने के बाद भी पूर्ण वेतन समझौता नहीं हो पाया है। साथ ही Pay Scale, Night Shift Allowance और House Rent जैसे मुद्दे लंबित पड़े हैं।
कर्मचारियों की छंटनी और तबादलों का आरोप
प्रेस कांफ्रेंस में यह भी आरोप लगाया गया कि राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) का उदाहरण देकर पूरे सेल में स्थायी और ठेका कर्मचारियों की संख्या में 40 प्रतिशत तक कटौती की तैयारी चल रही है। यूनियन ने दावा किया कि सैकड़ों अधिकारियों के अन्य प्लांटों में तबादले की योजना बनाई जा रही है ताकि उन पर दबाव बनाया जा सके।
यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि वीआर और सीआर जैसी योजनाओं के जरिए कर्मचारियों और अधिकारियों को नौकरी से बाहर करने की तैयारी की जा रही है। साथ ही EO कैडर के 50 प्रतिशत अधिकारियों को दूसरे प्लांटों में पोस्टिंग देने की बात भी कही गई।
IGH और टाउनशिप को लेकर भी चिंता
राउरकेला श्रमिक संघ ने आरोप लगाया कि Town Engineering, Town Service, Horticulture और IGH से जुड़े विभागों के निजीकरण की दिशा में भी कार्रवाई शुरू हो चुकी है। यूनियन का कहना है कि इससे कर्मचारियों और अधिकारियों पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
यूनियन ने कहा कि यदि समय रहते स्थिति नहीं बदली गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रेस कांफ्रेंस में सभी यूनियनों से एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील भी की गई।

