स्टील एग्जीक्यूटिव फेडरेशन ऑफ इंडिया (सेफी) के चेयरमैन एनके बंछोर के नेतृत्व में उच्च पेंशन को लेकर दिल्ली में बैठकें हुईं।
- जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नियमों के अनुरूप अतिरिक्त अंशदान जमा किया है, उन्हें तत्काल उच्च पेंशन का लाभ दिया जाए।
- पीएफ ट्रस्ट को लेकर कर्मचार भविष्य निधि संगठन-ईपीएफओ की आपत्ति पर भी सवाल उठाए गए हैं।
सूचनाजी न्यूज, नई दिल्ली। कर्मचारी पेंशन योजना 1995: ईपीएस 95 हायर पेंशन (EPS 95 Higher Pension) का मुद्दा एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दरबार में पहुंच गया है। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के भिलाई, दुर्गापुर, रांची, चंद्रपुर आदि के कर्मचारियों-अधिकारियों को उच्च पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
स्टील एग्जीक्यूटिव फेडरेशन ऑफ इंडिया (सेफी) के चेयरमैन नरेंद्र कुमार बंछोर, जनरल सेक्रेटरी संजय आर्या और वाइस चेयरमैन नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री कार्यालय को मांग पत्र सौंपकर स्टील सेक्टर के अधिकारियों की समस्याओं से अवगत कराया। पीएफ ट्रस्ट को लेकर कर्मचार भविष्य निधि संगठन-ईपीएफओ की आपत्ति पर भी सवाल उठाए गए हैं।
सेफी ने मांग पत्र में कहा है कि सेल, आरआईएनएल, एनएमडीसी, मेकॉन, नगरनार स्टील प्लांट समेत विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों के करीब 20 हजार अधिकारी ईपीएस-95 हायर पेंशन के मामले में लंबे समय से परेशान हैं। प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप कर अधिकारियों को न्याय दिलाने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
सेफी ने अपने पत्र में 4 नवंबर 2022 को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्मचारियों और अधिकारियों को उच्च पेंशन का लाभ देने का रास्ता साफ हो चुका है। इसके बावजूद विभिन्न कंपनियों और ईपीएफओ स्तर पर प्रक्रिया में देरी की जा रही है, जिससे हजारों अधिकारी प्रभावित हो रहे हैं।
मांग पत्र में आरोप लगाया गया कि कई अधिकारियों का वास्तविक वेतन के आधार पर पेंशन योगदान नहीं जोड़ा गया, जबकि वर्षों तक उनसे अधिक अंशदान लिया जाता रहा। सेफी ने कहा कि इससे सेवानिवृत्त अधिकारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री से त्वरित हस्तक्षेप की मांग
सेफी प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि ईपीएस-95 हायर पेंशन के मामले में शीघ्र निर्णय सुनिश्चित कराया जाए, ताकि हजारों अधिकारियों को राहत मिल सके। संगठन ने कहा कि यह मामला केवल पेंशन का नहीं, बल्कि अधिकारियों के सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
SEFI मांग पत्र: प्रधानमंत्री को सौंपे गए मांग पत्र को पढ़िए
1. अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अपने पूरे सेवाकाल में नियमों के अनुरूप पेंशन मद में अंशदान किया है। विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों में वर्षों से चली आ रही व्यवस्था के अनुसार वेतन से कटौती कर सेल ट्रस्ट के माध्यम से राशि जमा की जाती रही। इसके बावजूद अब ईपीएफओ द्वारा उस राशि को मान्यता नहीं देना कर्मचारियों के हितों के विरुद्ध है।
2. सेल ट्रस्ट कोई अवैध संस्था नहीं है। यह एक मान्यता प्राप्त व्यवस्था के तहत संचालित संस्था है। इसके माध्यम से वर्षों से अधिकारियों एवं कर्मचारियों के पेंशन संबंधी अंशदान जमा किए जाते रहे हैं। इसके बावजूद ईपीएफओ द्वारा इस व्यवस्था पर आपत्ति उठाना उचित नहीं है।
3. विभिन्न स्टील प्लांटों एवं इकाइयों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भविष्य में बेहतर पेंशन लाभ की उम्मीद में अतिरिक्त अंशदान जमा किया। अब यदि उन्हें उच्च पेंशन का लाभ नहीं मिलता है तो यह उनके साथ अन्याय होगा।
4. ईपीएफओ की वर्तमान व्याख्या एवं कार्रवाई के कारण बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त अधिकारी एवं कर्मचारी आर्थिक असुरक्षा की स्थिति में पहुंच गए हैं। अनेक कर्मचारियों की पेंशन प्रक्रिया लंबित है तथा उन्हें मानसिक एवं आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
5. सेल, RINL, NMDC, MECON, NSL तथा नागरनार जैसे सार्वजनिक उपक्रमों में वर्षों से चली आ रही पेंशन व्यवस्था को अब विवादित बनाया जा रहा है। इससे अधिकारियों एवं कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है।
6. हमारा आग्रह है कि स्टील मंत्रालय, सेल ट्रस्ट एवं ईपीएफओ के बीच समन्वय स्थापित कर इस विवाद का समाधान कराया जाए, ताकि अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ईपीएस-95 उच्च पेंशन योजना का लाभ मिल सके।
7. जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नियमों के अनुरूप अतिरिक्त अंशदान जमा किया है, उन्हें तत्काल उच्च पेंशन का लाभ दिया जाए। यह मामला हजारों परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। अतः केंद्र सरकार मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए आवश्यक हस्तक्षेप करे।

