सेक्टर-9 अस्पताल जितना मजबूत रहेगा, उतना ही सेवानिवृत्त कर्मियों और उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित रहेगा।
- संयुक्त यूनियन इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, ऐक्टू, लोईमू, स्टील वर्कर्स यूनियन ने कहा-आपातकाल में भरोसे का पहला दरवाज़ा।
- आज आवश्यकता केवल एक अस्पताल बचाने की नहीं, बल्कि हजारों बुजुर्गों के सम्मान, सुरक्षा और जीवन के अधिकार की रक्षा करने की है।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेक्टर 9 अस्पताल के निजीकरण के खिलाफ संयुक्त ट्रेड यूनियनों द्वारा विभिन्न विभागों के कैंटीन और अनुभागों में कर्मियों से चर्चा की जा रही है। संयुक्त यूनियन इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, ऐक्टू, लोईमू, स्टील वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारी पर्चा बांट रहे हैं। कहा-आने वाले दिनों में अस्पताल के निजीकरण के खिलाफ संघर्ष तेज करना होगा।
उम्र बढ़ने के साथ बीमारी अचानक दस्तक देती है। हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, सांस लेने में तकलीफ या अचानक गिर जाने जैसी परिस्थितियों में हर मिनट कीमती होता है। ऐसे समय में भिलाई के सेवानिवृत्त कर्मी और उनके परिवार किसी कागजी औपचारिकता या भारी रकम की चिंता नहीं करते। वे केवल अपनी मेडिकल बुक लेकर सीधे सेक्टर-9 अस्पताल पहुंच जाते हैं। अस्पताल का पूरा तंत्र तुरंत इलाज में जुट जाता है। यही व्यवस्था हजारों बुजुर्गों के लिए मानसिक सुरक्षा और जीवन का सबसे बड़ा सहारा है।
निजी अस्पताल में पहले पैसा, फिर इलाज
इसके विपरीत निजी अस्पतालों में आपातकालीन स्थिति में पहुंचने पर सबसे पहले एडवांस जमा करने की मांग होती है। कई बार लाखों रुपये की व्यवस्था करने तक इलाज प्रभावित हो जाता है। ऐसे समय में परिवार इलाज से पहले पैसों की चिंता में टूट जाता है। बुजुर्ग माता-पिता के सामने अपने ही बच्चों की आर्थिक विवशता सबसे बड़ा दर्द बन जाती है। बीमारी से लड़ने के बजाय परिवार खर्च जुटाने की लड़ाई लड़ने लगता है। स्वास्थ्य सेवा का उद्देश्य जीवन बचाना होना चाहिए, न कि आर्थिक परीक्षा लेना।
40 हजार से अधिक सेवानिवृत्त कर्मियों की जीवनरेखा
भिलाई टाउनशिप एवं इसके आसपास में रहने वाले 40 हजार से अधिक सेवानिवृत्त कर्मी और उनके परिवार वर्षों से सेक्टर-9 अस्पताल पर निर्भर हैं। इन्हीं लोगों ने अपने युवाकाल की मेहनत से भिलाई इस्पात संयंत्र और देश के औद्योगिक विकास को मजबूत किया। आज जब उन्हें सबसे अधिक चिकित्सा सुरक्षा की आवश्यकता है, तब यही अस्पताल उनके सम्मान, विश्वास और सुरक्षित जीवन का आधार बना हुआ है। यह केवल एक अस्पताल नहीं, बल्कि मेहनतकश पीढ़ी के प्रति समाज की जिम्मेदारी का प्रतीक है।
बुजुर्गों की चिंता, पूरे समाज की जिम्मेदारी
यूनियन नेताओं ने कहा-एक सभ्य समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने बुजुर्गों के साथ कैसा व्यवहार करता है। यदि सेवानिवृत्त कर्मियों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों की महंगी व्यवस्था पर निर्भर होना पड़े, तो यह उनके साथ अन्याय होगा। जिन हाथों ने उद्योग खड़ा किया, उन्हें बुढ़ापे में इलाज के लिए दर-दर भटकने की नौबत नहीं आनी चाहिए। सेक्टर-9 अस्पताल की मजबूत सार्वजनिक व्यवस्था को सुरक्षित रखना केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि पूरे समाज का नैतिक दायित्व है।
सेक्टर-9 अस्पताल बचाना, बुजुर्गों का भविष्य बचाना है
आज आवश्यकता केवल एक अस्पताल बचाने की नहीं, बल्कि हजारों बुजुर्गों के सम्मान, सुरक्षा और जीवन के अधिकार की रक्षा करने की है। सेक्टर-9 अस्पताल जितना मजबूत रहेगा, उतना ही सेवानिवृत्त कर्मियों और उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित रहेगा। इसलिए इस अस्पताल को सार्वजनिक, सुलभ और मजबूत बनाए रखना हर संवेदनशील नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। क्योंकि जब बुजुर्ग निश्चिंत रहते हैं, तभी परिवार निश्चिंत रहता है और समाज भी सुरक्षित व मानवीय बनता है।

